
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश की किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर एक बेहद शानदार और क्रांतिकारी पहल करने जा रही है। राज्य में बहुत जल्द ‘माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता नीति’ (Menstrual Health and Hygiene Policy) को लागू करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य किशोरियों को पीरियड्स (माहवारी) के दौरान जरूरी सुविधाएं मुहैया कराना, उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और समाज में इस विषय से जुड़ी तमाम पुरानी झिझक व भ्रमों को हमेशा के लिए दूर करना है। सरकार के इस बड़े कदम से राज्य की लाखों छात्राओं को सीधा और बहुत बड़ा फायदा मिलने वाला है। आइए बहुत ही आसान भाषा में जानते हैं इस नई नीति से जुड़ी तीन सबसे बड़ी और खास बातें।
कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मिलेंगे मुफ्त सैनिटरी नैपकिन
इस प्रस्तावित नीति के तहत प्रदेश के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 12वीं तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को बिल्कुल मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसके दायरे में केवल स्कूल जाने वाली छात्राएं ही नहीं आएंगी, बल्कि जो किशोरियां स्कूल नहीं जाती हैं या जिन्होंने किसी वजह से बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी है, उन्हें भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, समाज के वंचित और पिछड़े वर्ग की किशोरियों को इस योजना के तहत विशेष प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है, ताकि हर एक लड़की तक यह बेहद जरूरी स्वास्थ्य सुविधा आसानी से पहुंच सके।
पढ़ाई के साथ-साथ मिलेगी स्वास्थ्य और स्वच्छता की जरूरी जानकारी
उत्तर प्रदेश सरकार केवल मुफ्त नैपकिन बांटने तक ही सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि माहवारी से जुड़े स्वास्थ्य और स्वच्छता के अहम विषयों को स्कूलों की नियमित गतिविधियों का हिस्सा बनाने की पूरी तैयारी कर रही है। विशेष जागरूकता सत्रों के जरिए छात्राओं को सुरक्षित माहवारी प्रबंधन (Menstrual Management), पर्सनल हाइजीन और किशोरावस्था के दौरान शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दी जाएगी। समाज में इस संवेदनशील टॉपिक पर फैले झूठे मिथकों और संकोच को जड़ से खत्म करने के लिए डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। Also Readमोदी सरकार की इस स्कीम ने तोड़े सारे रिकॉर्ड! दुनिया मान रही है इसकी ताकत
अलग-अलग योजनाओं को एक साझा नीति के तहत लाने की तैयारी
माहवारी स्वास्थ्य से जुड़ी इन सुविधाओं को जमीनी स्तर पर और ज्यादा असरदार बनाने के लिए हाल ही में एक उच्च स्तरीय राज्य स्तरीय समिति की बैठक में विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय को लेकर गहरी चर्चा हुई है। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। सरकार की यह स्पष्ट कोशिश है कि अलग-अलग विभागों द्वारा चलाई जा रही पुरानी योजनाओं और पहलों को समेटकर एक ही साझा नीति के तहत व्यवस्थित किया जाए, ताकि किशोरियों तक सभी सुविधाएं बिना किसी रुकावट के प्रभावी तरीके से पहुंच सकें। इस नीति के पूरी तरह लागू होने के बाद इसका दायरा केवल मुफ्त पैड देने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बालिकाओं का संपूर्ण स्वास्थ्य, उनकी व्यक्तिगत साफ-सफाई और सही जागरूकता इसके सबसे महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
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Rozi Khan
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