
Undersea Fiber Optic Cables: मिडिल ईस्ट की धधकती आग का असर अब दुनियाभर में देखने को मिल रहा है. अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच चल रहे जंग के कारण दुनियाभर में एक अलग ही संकट पैदा हो गया है. कई देशों में पेट्रोल और LPG की कमी हो गई है. इसी बीच एक और हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है. दुनिया अभी तक परमाणु युद्धों के खतरों से ही सहमी हुई थी, लेकिन अब युद्ध का एक ऐसा नया मोर्चा खुल गया है जो बिना एक भी गोली चलाए पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और साथ ही साथ लोगों के काम से लेकर जीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर सकता है. जानकारों का मानना है कि सिर्फ अमेरिका या इजरायल ही नहीं बल्कि ईरान के पास भी एक ऐसा बटन है जिसे ‘ऑन’ करते ही वैश्विक स्तर पर ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो सकती है.
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर ईरान के पास ऐसा क्या है जिसे ऑन करते ही दुनिया भर में ब्लैकआउट हो सकता है. तो इसका जवाब है फाइबर-ऑप्टिकल केबल्स. इजरायल-ईरान संघर्ष ने एक ऐसी नई आशंका को जन्म दिया है, जो पूरी दुनिया को ऑफलाइन कर सकती है. ऊर्जा संकट और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब वैश्विक विशेषज्ञों की नींद इस बात पर उड़ी है कि क्या ईरान और उसके सहयोगी संगठन दुनिया के इंटरनेट कनेक्शन को काट सकते हैं?
ऑनलाइन से हो जाएंगे ऑफलाइन
आज हम वीडियो कॉल्स, ईमेल्स, ऑनलाइन बैंकिंग और AI सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, उनका ज्यादातर डेटा उपग्रहों से नहीं बल्कि समुद्र के अन्दर बिछी बड़ी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है. ये केबल्स हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और ग्लोबल इंटरनेट सिस्टम की असली बैकबोन मानी जाती हैं. दुनिया में कुछ समुद्री इलाके ऐसे हैं जो इस नेटवर्क के लिए बहुत ही खास हैं. इनमें लाल सागर और होर्मुज सबसे खास है, जहां से कई अंतरराष्ट्रीय केबल्स जाती हैं और अलग-अलग महाद्वीपों को कनेक्ट करती हैं. लाल सागर में लगभग 17 महत्वपूर्ण केबल्स मौजूद हैं जो यूरोप, अफ्रीका और एशिया के बीच डेटा ट्रैफिक का काम करती हैं.
वहीं होर्मुज से AAE-1, FALCON और Tata-TGN Gulf जैसी महत्वपूर्ण केबल प्रणालियां गुजरती हैं जो खास तौर पर भारत और खाड़ी देशों के बीच डेटा कनेक्टिविटी को बनाए रखने में बहुत ही खास भूमिका निभाती हैं.
मरम्मत करवाना भी बड़ा टास्क
अगर ईरान इन केबल्स पर कोई एक्शन लेता है तो इन्हें ठीक करना मुश्किल हो जाएगा. या फिर किसी मिसाइल, जहाज के एंकर या किसी साजिश के तहत केबल को नुकसान पहुंचता है तो उसे ठीक करने वाले खास जहाज वहां तक पहुंच ही नहीं पाएंगे. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। बीमा कंपनियां और शिपिंग कंपनियां पहले ही इस इलाके में काम करने से इंकार कर चुकी हैं. यानी अगर कहीं छोटा सा भी नुकसान होता है तो उसे ठीक होने में हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है और इस दौरान इंटरनेट स्रिवस बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.
भारत के लिए भी चिंता की बात?
हाल ही में दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां जैसे Amazon, Google और Microsoft ने कुछ साल पहले ही सऊदी अरब और UAE में अपना डेटा सेंटर बनाई हैं. ये केबल्स ही उन सेंटरों को एशियाई और अफ्रीका से कनेक्ट करती हैं. अगर इन समुद्री केबल्स पर हमला होता है तो केवल सोशल मीडिया ही नहीं बंद होगा, बल्कि स्टॉक मार्केट, अस्पताल की डिजिटल सेवाएं और बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह खतरे में आ जाएगा. भारत के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है क्योंकि हमारा ज्यादातर डेटा ट्रैफिक इन्हीं समुद्री रास्तों से होकर आता है. केबल्स के प्रभावित होने का सीधा मतलब है इंटरनेट की रफ्तार थम जाना या धीमी हो जाना, इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा लैग की समस्या पैदा होगी.


