Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से प्राप्त नगदी और सोने में हुई कथित चोरी के मामले ने इस समय उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में भारी भूचाल ला दिया है। राम मंदिर आंदोलन के बूते सत्ता के शिखर पर पहुंची भारतीय जनता पार्टी के लिए 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण यह पूरा घटनाक्रम बेहद संवेदनशील और राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो रहा है। खबरों कि मानें तो राम मंदिर में चंदा से लेकर चढ़ावे तक के गबन के इस मामले के प्रकाश में आने पर श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आयी जिसका असर मंदिर मैं आने वाले चढ़ावे पर भी रहा। जानकारी के मुताबिक प्रतिमाह औसतन करीब 07 करोड़ के चढावे के मुकाबले पिछले 15 दिनों में केवल 1।5 करोड़ यानी 80 फीसदी का ही चढ़ावा चढ़ा है।

यानी प्रकरण के सामने आने पर जांच के बीच राम मंदिर में दान और दर्शन दोनों पर असर देखा गया है। जबकि इस पूरे प्रकरण में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगियों और उनके पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव पर मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन के गंभीर आरोप लगने तथा उनकी संपत्ति में अप्रत्याशित रूप से उछाल व बरामदगी की बात सामने आयी।
500 वर्षों तक किया, 15 दिन और इंतजार…
जानकारों की मानें तो राम मंदिर में दान और दर्शन की इसी कमी और विपक्षी हमले के दृष्टिगत हिंदुत्व का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी के माथे पर बल ला दिया। और इस प्रकरण के सामने आने पर अयोध्या में पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT पर भरोसा और आमजन से अपील किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने मर्यादित रहते हुए 500 वर्षों तक संघर्ष किया है, 15 दिन और इंतजार कर लें, कोई अपराधी है तो बचेगा नहीं। एसआईटी जांच कर रही, दूध का दूधपानी का पानी होगा।
हांलांकि सियासी हलकों में इस बात कि चर्चा तब और बढ़ गयी जब शुक्रवार को अयोध्या दौरे और राम मंदिर दर्शन कार्यक्रम से जिला प्रशासन द्वारा जारी प्रोटोकाल में चम्पत राय का जिक्र आया और उन्हें अपने किसी प्रतिनिधि को भेजने को कहा गया। खबरों के मुताबिक जिला प्रशासन ने खुद चंपत राय से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूरी बनाने का लिखित अनुरोध किया। प्रशासन द्वारा मंदिर ट्रस्ट को भेजे गए सीएम के प्रोटोकॉल में कहा कि चंपत राय इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति को नामित कर दें। जबकि अयोध्या में राममंदिर निर्माण के बाद से अमूमन हर प्रमुख की अगवानी खुद चंपत राय ही करते रहे हैं। ऐसे में जानकारों का मानना है कि मंदिर में चढ़ावा चोरी के गंभीर आरोपों के बीच सरकार चंपत राय से दूरी बनाकर साफ संदेश देना चाहती है।
चंपत राय से CM योगी ने बनाई दूरी
चंदा चोरी विवाद के साए के बीच चंपत राय को मुख्यमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रमों और मंच से पूरी तरह दूर रखने का निर्देश दिया गया। सीएम योगी की इस दूरी को एक कड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया है कि इस मामले में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ किया जाएगा और आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
फ़िलहाल मामले में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव का नाम आने से फेस सेविंग की भी कोशिश जारी है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित भाजपा व संघ से जुड़े तमाम दिग्गज नेता इस विवाद से निपटने और संगठन की छवि बचाने में जुट गए हैं। राम मंदिर में चोरी प्रकरण से पल्ला झाड़ने वाले और खुद को निर्माण कार्य तक सीमित बताने वाले प्रधानमंत्री मोदी के अति विश्वसनीय और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मीडिया में कहा कि काउंटिंग रूम के पास एक टॉयलेट है, जहां चढ़ावे का पैसा मिला। इसकी जानकारी चंपत राय को हुई। इसके बाद जांच के लिए SIT का गठन हुआ। काउंटिंग का काम 40 से 44 लोग करते हैं, फिलहाल शक की सुई इन्हीं लोगों पर है।”
केशव प्रसाद मौर्य ने चंपत राय को बताया पूजनीय
वहीं झाँसी दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि चंपत राय आदरणीय और पूजनीय व्यक्ति हैं, जिन्होंने रामकाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया है और राम मंदिर आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से चंपत राय को अलग रखे जाने के सवाल पर डिप्टी सीएम ने कहा कि यह विषय मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र का है। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर उन्होंने कहा कि जो भी दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी। मामले की जांच चल रही है और कानून अपना काम कर रहा है। बताते चलें कि प्रकरण के शुरुआती दौर में ट्रस्ट और भाजपा के कुछ नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताया था ताकि जनता और श्रद्धालुओं के बीच पार्टी और राम मंदिर आंदोलन की छवि धूमिल न हो।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य
विपक्ष ने उठाया सवाल
उधर विपक्ष का हमला इस पूरे प्रकरण को लेकर जारी है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक हैं। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा और आरएसएस ने देश के करोड़ों राम भक्तों की आस्था के साथ छल किया है। विपक्ष ने पूरे मामले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज या केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की मांग की है। गोरतलब है कि 2027 का विधानसभा चुनाव और अयोध्या सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद, भाजपा के लिए राम मंदिर के नाम पर हुआ यह वित्तीय विवाद एक बड़ा राजनीतिक झटका है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले आस्था के सबसे बड़े केंद्र पर लगे इन दागों को धोना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यही वजह है कि योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए खुद को आरोपी चेहरों से दूर कर लिया है ताकि चुनाव में इसकी भारी राजनीतिक कीमत न चुकानी पड़े।
कहां तक पहुंची एसआईटी जांच
फ़िलहाल अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दान में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं व चोरी को लेकर एसआईटी की जांच और विपक्ष का राजनीतिक हमला दोनों ही चरम पर हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित 3 सदस्यीय विशेष जांच दल जिसकी कमान लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत संभाल रहे हैं, ने पिछले 34 दिनों में अपनी पड़ताल बेहद तेज कर दी है। एसआईटी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और पदाधिकारी गोपाल राव से लगातार दो बार में करीब 44 घंटे की कड़ी पूछताछ की है। इसके अलावा ट्रस्टी अनिल मिश्रा को भी समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। एसआईटी ने मंदिर के पिछले 3 साल के सभी वित्तीय लेनदेन, ऑडिट और चढ़ावे से जुड़े दस्तावेजों व रिकॉर्ड को जब्त कर उसकी फॉरेंसिक व गहन जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार एसआईटी को प्राथमिक जांच में मंदिर प्रबंधन की कई बड़ी प्रशासनिक खामियां मिली हैं। दान पेटियों से कैश निकालने और नोटों की गिनती का काम आउटसोर्स को दिया गया था, जहां नियमों की भारी अनदेखी की जा रही थी।
चंदा चोरी विवाद पर अखिलेश यादव का बयान
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि अयोध्या महापापियों के लिए कुरुक्षेत्र साबित होगी। यहीं भाजपाई राजनीति का आरंभ हुआ था, यहीं अंत भी होगा। अयोध्या में चढ़ावेचंदेदानशिला चोरी’ की घटना के बाद से यहाँ आनेवाले दर्शनार्थियों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ा है। लोगों की आस्थाएँ खंडित हुई हैं। इसका सीधा असर अयोध्या के स्थानीय कामकारोबार और आम आदमी की आमदनी पर पड़ा है। सरकार की गलती का खामियाजा जनता क्यों भुगते। अखिलेश यादव ने कहा कि अयोध्या और आसपास के सभी क्षेत्रों में भयंकर आक्रोश पनप रहा है। इस पावन सनातनी तीर्थ की शुचिता जिन भाजपाइयों और उनके संगीसाथियों की वजह से कलुषित हुई है, वो अपना कारनामा करके सदैव की तरह भूमिगत हो गये हैं।
अस्पष्टता के कारण वातावरण और भी शंकापूर्ण व तनावपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोग मंदिर जाने से भी घबरा रहे हैं कि कहीं उनको ही जाँच के नाम पर फँसा न दिया जाए। श्रद्धालुओं में एक अज्ञात भय व्याप्त हो गया है। जाँच कहाँ तक पहुँची इसकी डेली ब्रीफिंग होनी चाहिए क्योंकि भाजपा सरकार में हो रहे ‘चतुर्दिक महाभ्रष्टाचार’ के कारण जनता का अब एसआईटी पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं है।
लखनऊ से राजेश मिश्रा की रिपोर्ट



