
नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के बंदर अंजाली पर मिसाइल हमला किया है। यह मुंबई से रूस के सेंट पीटर्सबर्ग को जोड़ने वाले 7,200 किमी लंबी इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का अहम ट्रांजिट हब है। भारत और रूस ने इस कॉरिडोर के जरिए 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन जानकारों का कहना है कि ईरानी बंदरगाह पर मिसाइल हमले से भारत और रूस के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को झटका लग सकता है।
इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर स्वेज नहर को बाइपास करता है और माना जा रहा है कि इससे एशिया और यूरोप के बीच ट्रेड में तेजी आएगी। इजरायल और अमेरिका ने कैस्पियन सागर के तट पर स्थित बंदर अंजाली पर 18 मार्च को मिसाइल हमला किया। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इससे वहां कस्टम हाउस और दूसरे स्ट्रक्चर्स को नुकसान पहुंचा है।
मुंबई से मॉस्को 7 दिन में
मॉस्को यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया, अफ्रीका स्टडीज के प्रोफेसर रेनात कारामुरजोव ने कहा कि स्वेज नहर को बाइपास करने वाले इस रूट से सुरक्षित माना गया था लेकिन इजरायली और अमेरिकी हमलों के कारण अब इंश्योरेंस और फ्रेट के रेट में तेजी आएगी। इससे रूस और सीआईएस के दूसरे देशों पर नकारात्मक असर होगा।
रूस के पॉलिटिकल एनालिस्ट सर्गेई स्ट्रोकन ने एक टीवी डिबेट में कहा, ‘यह कॉरिडोर भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए बहुत अहम है क्योंकि इसमें मॉस्को से मुंबई के बीच ट्रांजिट टाइम 25-30 दिन से घटकर महज 7 दिन रह जाता है।’ रूस के डिप्टी पीएम विताली सेवलियेव ने कहा कि 2025 के अंत तक इस रूट से 7.5 मिलियन टन से अधिक कार्गो की आवाजाही हुई थी।
क्या है यह प्रोजेक्ट?
INSTC के तहत रूस एक ऐसी रेल लाइन बना रहा है जो रूस को सीधे ईरान के बंदरगाहों से जोड़गी। इससे मुंबई तक उसकी पहुंच आसान जाएगी। रूस ने इस प्रोजेक्ट के लिए ईरान को 1.4 अरब डॉलर का लोन देने पर सहमति जताई थी। इस रूट के जरिए सामान को सेंट पीटर्सबर्ग से मुंबई पहुंचने में महज 10 दिन का समय लगेगा। अभी इसमें 30 से 45 दिन का समय लगता है।
यह कॉरिडोर भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए बहुत अहम है क्योंकि इसमें मॉस्को से मुंबई के बीच ट्रांजिट टाइम 25-30 दिन से घटकर महज 7 दिन रह जाता है।
सर्गेई स्ट्रोकन, रूस के पॉलिटिकल एनालिस्ट
कई शताब्दियों से रूस की इकॉनमी में यूरोप के साथ ट्रेड सबसे अहम था। लेकिन यूक्रेन युद्ध ने इस स्थिति को बदल दिया है। यूक्रेन युद्ध के बाद चीन और भारत के साथ रूस का व्यापार कई गुना बढ़ गया है। इस रेल लाइन से रूस की भारत और चीन तक पहुंच आसान हो जाएगी। दावा किया जा रहा है कि यह रेल लाइन आने वाले दिनों में स्वेज नहर से होने वाले ट्रेड को कड़ी टक्कर दे सकती है।
रूस से भारत
नई रेल लाइन ईरान के दो शहरों अस्तारा और राश्त को जोड़ेगी। इससे ईरान उत्तर में अजरबैजान से जुड़ जाएगा और इस तरह रूसी रेलवे के ग्रिड तक इसकी पहुंच हो जाएगी। इस रेल लाइन के 2028 में पूरा होने की उम्मीद है। इस तरह यह पूरा स्ट्रैच 6,920 किमी लंबा होगा। फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों के जरिए रूसी कारोबारियों की भारत तक आसान पहुंच होगी। साथ ही आसानी से सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान भी पहुंचा जा सकता है।





