चेहरे पर मुस्कान और दिल में जहर, मायावी दुनिया में ढोंगी इंसानों को कैसे पहचानें? आचार्य चाणक्य से जानिए!


Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों के माध्यम से समाज को रास्ता दिखाने का नेक काम किया है. उनकी दृष्टि में पाखंडी और धूर्त व्यक्ति वह है, जिसकी कथनी और करनी में आकाश-पाताल का अंतर होता है. समाज में ऐसे लोगों को हिप्पोक्रेट्स कहा जाता है, जो सामने कुछ और और पीठ पीछे कुछ और होते हैं. चाणक्य के अनुसार, ऐसे लोगों की पहचान करना जरूरी है, अन्यथा ये आपके जीवन को गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं. चाणक्य नीति में पाखंडियों की पहचान करने के लिए 5 प्रमुख संकेत दिए गए है, जिसके आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि ढोंगी कौन है. ऐसे में आइए जानते हैं पाखंडी लोगों की पहचान करने के लिए चाणक्य नीति में वर्णित 5 सूत्र.

ऐसी सेवा के पीछे छिपा होता है कपट
चाणक्य नीति का सूत्र है- ‘सोपचारः कैतवः’. उनके अनुसार, जब कोई व्यक्ति अचानक आपकी अत्यधिक सेवा करने लगे या जरूरी से अधिक आदर-सत्कार दिखाने लगे, तो सावधान हो जाना चाहिए. धूर्त लोग अक्सर दिखावे की सेवा का सहारा लेकर आपका विश्वास जीतते हैं ताकि वे आपके गुप्त भेद जान सकें. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ऐसे लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए किसी भी हद तक झुक सकते हैं, लेकिन अवसर मिलते ही धोखा देने से नहीं चूकते.

खुद के बनाए नियमों का उल्लंघन करने वाला
चाणक्य कहते हैं कि जो मनुष्य स्वयं के लिए कड़े नियम निर्धारित करता है लेकिन उन पर अमल नहीं करता, वह अविश्वसनीय है. अगर कोई व्यक्ति अनुशासन और नैतिकता की बातें तो बड़ी-बड़ी करता है, पर खुद का जीवन अस्त-व्यस्त रखता है, तो समाज उसे पाखंडी की श्रेणी में रखता है. ऐसे लोग आखिरकार दूसरों के अधीन हो जाते हैं क्योंकि उनके चरित्र में दृढ़ता का अभाव होता है.

कर्तव्य से दूर और अनैतिक आचरण करने वाला
‘नास्ति कार्य द्यूतप्रवृत्तस्य’- इस सूत्र के माध्यम से चाणक्य समझाते हैं कि जो व्यक्ति जुए, व्यसन या अन्य अनैतिक कार्यों में लिप्त रहता है, वह अपने कर्तव्यों के प्रति कभी गंभीर नहीं हो सकता. ऐसा व्यक्ति अगर दूसरों को नैतिकता और धर्म का उपदेश दे, तो वह कोरा पाखंड है. जिस तरह जुए के व्यसन के कारण धर्मराज युधिष्ठिर की नैतिकता पर प्रश्नचिह्न लग गया था, वैसे ही कर्तव्यहीन व्यक्ति का ज्ञान सिर्फ एक ढोंग मात्र होता है.

नीतियों की अनदेखी करना
चाणक्य के अनुसार, समाज और राज्य की व्यवस्था विशिष्ट नीतियों और शास्त्र सम्मत व्यवहार पर आधारित होनी चाहिए. जो व्यक्ति या शासक स्थापित सिद्धांतों को त्यागकर केवल अपने निजी लाभ के लिए नई और मनमानी नीतियां बनाता है, वह समाज में अविश्वास का पात्र बनता है. ऐसे लोग लोक-कल्याण के बजाय सिर्फ खुद के वर्चस्व को प्राथमिकता देते हैं और पाखंड का सहारा लेकर लोगों को भ्रमित करते हैं.

कपटी लोगों की क्या है पहचान
न्याय की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति अगर व्यक्तिगत रंजिश के कारण किसी को कठोर दंड देता है, तो वह अपने पद की गरिमा गिरा देता है. ‘दण्डपारुष्यात् सर्वजनद्वेष्यो भवति’- अर्थात् द्वेषवश दिया गया दंड न्यायाधीश को जनता की नजरों में पाखंडी बना देता है. चाणक्य कहते हैं कि सच्चा न्याय वह है जो अपराधी के मन से अपराध की भावना मिटाए, न कि किसी के प्रति व्यक्तिगत नफरत को शांत करने के लिए दिया जाए. ऐसे प्रतिशोधी स्वभाव वाले लोग न्याय का मुखौटा ओढ़े हुए कपटी होते हैं.

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