Bangladesh की नई BNP सरकार का शपथ ग्रहण, India-China समेत 13 देशों को भेजा न्योता

बांग्लादेश की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। आम चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेतृत्व में नई सरकार मंगलवार को शपथ लेने जा रही है। पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे, जिससे देश में सत्ता का औपचारिक हस्तांतरण पूरा होगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह ढाका स्थित राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाज़ा में आयोजित किया जाएगा। बता दें कि यह आयोजन 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत के बाद हो रहा है। 300 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 151 सीटों की आवश्यकता होती है, जबकि बीएनपी ने इससे कहीं अधिक सीटें हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है।
गौरतलब है कि यह चुनाव 2024 के जनआंदोलन के बाद हुआ पहला आम चुनाव था, जिसके चलते लंबे समय तक सत्ता में रहीं शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था। इस बार मतदान प्रतिशत लगभग 59 प्रतिशत दर्ज किया गया। साथ ही शासन सुधारों से जुड़े एक संवैधानिक जनमत संग्रह को भी मतदाताओं की स्वीकृति मिली है।
शपथ समारोह से पहले अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने 13 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत, चीन, सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान को न्योता भेजा गया है। इसे नई सरकार की व्यापक और संतुलित विदेश नीति का संकेत माना जा रहा है।
बीएनपी नेता एएनएम एहसानुल हक मिलन ने ढाका में संवाददाताओं से बातचीत में उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी “सभी के साथ मित्रता, किसी के प्रति दुर्भावना नहीं” की नीति पर चलना चाहती है। बीएनपी ने प्रधानमंत्री मोदी के बधाई संदेश के लिए आभार भी व्यक्त किया है और भारत के साथ बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के सामने आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय कूटनीति को साधने की बड़ी चुनौती है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। विपक्ष के रूप में इस बार जमात-ए-इस्लामी गठबंधन उभरा है, जिससे संसद में वैचारिक बहस तेज होने की संभावना है। ऐसे में शपथ ग्रहण समारोह केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक यात्रा में एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

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