महाराष्ट्र में दूध पीना एक बार फिर महंगा हो गया है. राज्य में दूध उत्पादक और प्रोसेसर्स की वेलफेयर एसोसिएशन ने गाय और भैंस दोनों के दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का फैसला लिया है. नई दरें 11 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि दही और पनीर जैसे रोजमर्रा के डेयरी प्रोडक्ट्स के दाम भी करीब 10 फीसदी तक बढ़ाए गए हैं. कंपनियों का कहना है कि दूध की खरीद लागत, ट्रांसपोर्ट के लिए ईंधन और पैकेजिंग मटीरियल की कीमतें लगातार बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना मजबूरी बन गया. लेकिन महाराष्ट्र अकेला उदाहरण नहीं है. पिछले एक साल में देश भर में दूध की कीमतें कई बार बढ़ चुकी हैं और आम आदमी की रसोई का बजट लगातार गड़बड़ाता जा रहा है. दिल्ली एनसीआर में जो दूध 2022 में 58 रुपये प्रति लीटर था उसके दाम अब बढ़कर 72 रुपये हो गए हैं. आइए आपको डिटेल में बताते हैं कि इस साल देश में दूध के दामों में कितनी बार बढ़ोतरी हुई है और आगे दाम बढ़ने को लेकर एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं.

साल भर में कितनी बार बढ़े दूध के दाम

अगर सिर्फ 2026 के शुरुआती आठ महीनों की बात करें, तो देश के अलगअलग हिस्सों में कम से कम 67 बार दूध महंगा हुआ. सबसे बड़ा और चर्चित फैसला 14 मई को आया, जब देश की दो सबसे बड़ी डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने एक साथ दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए. इसके तुरंत बाद पंजाब की वेरका, राजस्थान की सरस और बिहार की सुधा डेयरी ने भी मई के आखिर तक अपनेअपने दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए. जून की शुरुआत में केरल की मिल्मा ने तो सीधे 4 रुपये प्रति लीटर का झटका दे दिया और अब अगस्त में महाराष्ट्र की बारी आई है. यानी पैटर्न साफ है जैसे ही कोई बड़ा नेशनल ब्रांड दाम बढ़ाता है, हफ्तों के भीतर बाकी राज्यों की सहकारी डेयरियां भी उसी राह पर चल पड़ती हैं ताकि उनका मार्जिन बना रहे.

2022 में 58 रुपये था, अब 72 हो गया

दिल्लीएनसीआर में फुल क्रीम दूध की कीमत का सफर इस महंगाई को सबसे अच्छी तरह बयां करता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2022 तक दिल्लीएनसीआर में फुल क्रीम दूध करीब 58 रुपये प्रति लीटर और टोंड दूध 48 रुपये प्रति लीटर मिलता था. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। फरवरी 2023 आतेआते फुल क्रीम दूध की कीमत बढ़कर 66 रुपये और टोंड दूध 54 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी. अब मई 2026 की हालिया बढ़ोतरी के बाद मदर डेयरी का फुल क्रीम दूध 72 रुपये प्रति लीटर तक जा चुका है यानी 2022 से अब तक करीब 14 रुपये यानी लगभग 24 फीसदी का सीधा उछाल.

इसी रिपोर्ट में इंडियन डेयरी एसोसिएशन के अध्यक्ष और अमूल इंडिया के पूर्व एमडी आरएस सोढ़ी ने बताया कि दूध के दाम बढ़ने का सीधा फायदा किसानों को मिलता है. उन्होंने बताया कि बीते कुछ महीनों में दूध की कीमतें आम महंगाई दर से कहीं ज्यादा, यानी 14 से 15 फीसदी तक बढ़ी थीं, लेकिन अगर पिछले तीन साल का औसत निकालें तो यह बढ़ोतरी 7 फीसदी से भी कम बैठती है. एक्सपर्ट के मुताबिक दस साल पहले फुल क्रीम दूध का दाम 42 रुपये था, यानी इस दौरान करीब 52 फीसदी का इजाफा हो चुका है. उन्होंने इसे मांगआपूर्ति का मामला बताते हुए कहा कि कोरोना के दौरान मांग घटने से किसानों को नुकसान झेलना पड़ा था, और बीते एक साल में चारे की लागत ही 20 से 25 फीसदी तक बढ़ चुकी है. सोढ़ी ने यह भी कहा कि 2047 तक भारत करीब 620 मिलियन मीट्रिक टन दूध उत्पादन करेगा, जो वैश्विक उत्पादन का 45 फीसदी होगा, और इसके लिए सहकारी क्षेत्र में और निवेश जरूरी है.

अब और कितना बढ़ सकता है भाव

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने हाल ही में देश की 37 बड़ी डेयरी कंपनियों का विश्लेषण करते हुए अनुमान लगाया है कि आने वाले महीनों में दूध की कीमतों में 4 से 5 फीसदी की और बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि कंपनियां यह बढ़ोतरी एक बार में नहीं, बल्कि किस्तों में करेंगी ताकि उपभोक्ताओं पर एक साथ बोझ न पड़े. दूध के मुकाबले पनीर, घी और फ्लेवर्ड मिल्क जैसे प्रोडक्ट्स की कीमतों में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. क्रिसिल का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में डेयरी इंडस्ट्री का कारोबार 13 से 15 फीसदी तक बढ़ सकता है, लेकिन कंपनियों को अपना मुनाफा सिर्फ 4 फीसदी के दायरे में बनाए रखने के लिए दाम बढ़ाने ही पड़ेंगे.

बढ़ाने की क्या तैयारी है

डेयरी कंपनियों की रणनीति अब साफ हो चुकी है. कीमतों को धीरेधीरे, चरणों में बढ़ाना, ताकि एक साथ बड़ा झटका न लगे और ग्राहक नाराज न हों. यही वजह है कि साल भर के भीतर अलगअलग महीनों में, अलगअलग राज्यों में 1 से 4 रुपये प्रति लीटर के छोटेछोटे हाइक देखने को मिल रहे हैं. कमजोर मानसून की आशंका, भीषण गर्मी और मवेशियों के लिए हरे चारे की बढ़ती लागत को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में भी यह सिलसिला जारी रह सकता है.

कितना हो रहा घाटा

तस्वीर का दूसरा और चिंताजनक पहलू यह है कि दाम बढ़ने के बावजूद कई जगह किसानों और डेयरियों को राहत नहीं मिल रही. उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में अयोध्या दुग्ध संघ ने हाल ही में पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत 4 रुपये प्रति लीटर तक घटा दी, जबकि पिछले एक साल में पशु आहार, चोकर और भूसे के दाम 20 से 30 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. यानी उपभोक्ता ज्यादा पैसे चुका रहा है, लेकिन किसान तक पूरा फायदा नहीं पहुंच रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक भीषण गर्मी की वजह से दूध उत्पादन में 30 फीसदी तक की गिरावट का खतरा भी बना हुआ है, जिससे आपूर्ति और मांग का संतुलन और बिगड़ सकता है. कुल मिलाकर, आने वाले महीनों में दूध और उससे बने प्रोडक्ट्स की कीमतें आम आदमी की रसोई पर दबाव बनाए रखेंगी.