
Bijnor Wedding Electricity Cut/राजवीर चौधरी: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से अजब गजब मामला सामने आया है. यहां बिजली विभाग के अफसरों ने शादी वाले दिन ही घर का बिजली कनेक्शन काट दिया. जिसके बाद दूल्हे को मेहमानों के सामने शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. यह मामला जिले के नूरपुर के डायमंड सिटी कॉलोनी का है.
दूल्हे के घर की बिजली गुल
बताया जा रहा है कि 19 फरवरी को दूल्हे शुभम चौहान की बारात नजीबाबाद के लिए रवाना होने वाली थी. घर में विवाह की खुशियां चरम पर थीं, मेहमान एकत्रित थे और बारात जाने की तैयारियां अंतिम चरण में थीं. इसी बीच नूरपुर बिजली विभाग की कार्रवाई ने पूरे कार्यक्रम को शर्मिंदगी में बदल दिया. प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो नूरपुर बिजली विभाग का एक लाइनमैन अचानक खंभे पर चढ़ गया और बिना किसी पूर्व सूचना के दूल्हे के घर का बिजली कनेक्शन काट दिया.
दूल्हा पक्ष की अपमानजनक स्थिति
यह कार्रवाई उस समय की गई, जब घर में महिलाएं, रिश्तेदार और दूर-दराज से आए मेहमान मौजूद थे. अचानक बिजली गुल होने से शादी की व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गईं और मेहमानों के सामने दूल्हा पक्ष को अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किसी प्रकार का बिजली बिल बकाया भी था तो विभाग को नियमों के तहत पहले सूचना देकर मानवीय तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए थी.
मामले पर क्या बोले स्थानीय लोग?
स्थानीय लोगों ने शादी जैसे पवित्र और सामाजिक अवसर पर इस तरह की कार्रवाई को पूरी तरह असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना बताया है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि बिजली विभाग के कर्मचारी ने न तो परिस्थिति की गंभीरता को समझा और न ही मानवीय दृष्टिकोण अपनाया, जिससे दूल्हा शुभम चौहान की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची.
नहीं है कोई बिजली बिल बकाया-दूल्हा
उधर इस पूरे प्रकरण में दूल्हे का कहना है कि उन्होंने 2 महीने पहले बिजली विभाग से बिजली कनेक्शन लिया था, जिसका वह हर महीने बिजली बिल भी दे रहे है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। उनके ऊपर कोई भी बिजली बिल बकाया नहीं है. उसके बावजूद बिजली विभाग के लाइन मैन ने बिजली कनेक्शन काट दिया. घटना के बाद कॉलोनी में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखा गया.
प्रशासन और बिजली विभाग से कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. जिसके बाद दोषी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए. दूल्हा और उसके परिवार को न्याय व सम्मान दिलाया जाए. यह घटना बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है.
यह घटना स्पष्ट करती है कि प्रशासनिक लापरवाही आम नागरिकों की खुशियों को किस तरह अपमान में बदल सकती है. अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं.





