
कीव: यूक्रेन की रणनीति हमेशा से ‘पैसा और फायदा’ रही है. दुनिया में पहचान देने वाले भारत को धोखा देने वाले यूक्रेन का पाकिस्तान के साथ लंबा रिश्ता है. पाकिस्तान को सबसे ज्यादा हथियार सप्लाई करने वाला पार्टनर यूक्रेन ही है और इससे इस देश ने करीब 411 मिलियन डॉलर कमाए हैं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। अब इसी देश के राष्ट्रपति जेलेंस्की पश्चिम एशिया में ‘सिक्योरिटी डोनर’ तलाश चुके हैं. उन्होंने सऊदी अरब के साथ ड्रोन पैक्ट बनाया है, जो पहले से ही पाकिस्तान का आका माना जाता है. पाकिस्तान और सऊदी के बीच कुछ हफ्तों पहले ही डिफेंस डील हुई है, जिसमें यूक्रेन भी मौका देखकर घुस आया है.
जेलेंस्की ने सऊदी अरब के साथ एक ‘आपसी फायदे’ वाले रक्षा समझौते पर साइन किए हैं. ये वही यूक्रेन है जो कभी भारत के कट्टर दुश्मन पाकिस्तान को टैंक और मिसाइलें सप्लाई करके भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बना था. अब जब यूक्रेन खुद संकट में है, तो वो उन देशों के साथ हाथ मिला रहा है जो पाकिस्तान के करीबी सहयोगी माने जाते हैं.
यूक्रेन का दगाबाजी वाला रिकॉर्ड
यूक्रेन का ‘दगाबाजी’ वाला इतिहास नया नहीं है. 1990 के दशक में जब भारत अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने में जुटा था तब यूक्रेन ने पाकिस्तान की सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया था. 1996 में यूक्रेन ने पाकिस्तान के साथ $650 मिलियन की एक बड़ी डील की थी, जिसके तहत उसने पाकिस्तान को 320 T-80UD मुख्य युद्धक टैंक सप्लाई किए थे. यूक्रेन ने पाकिस्तान को 320 टैंक सप्लाई किए थे. ये वही टैंक हैं जो आज भी पाकिस्तानी सेना की बख्तरबंद रेजिमेंट की रीढ़ माने जाते हैं और भारत की पश्चिमी सीमा पर तैनात हैं.
यूक्रेन के मालिशेव प्लांट ने पाकिस्तान के ‘अल-खालिद’ टैंकों के लिए 6TD-2 इंजन भी सप्लाई किए थे. रूस ने उस समय इस डील का विरोध किया था क्योंकि टैंक के कई कलपुर्जे रूसी थे लेकिन यूक्रेन ने भारत की चिंताओं को दरकिनार कर दिया था.
सिर्फ यही नहीं यूक्रेन ने 2022-23 में पाकिस्तान तो आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम भी किया था, जब सीक्रेट तरीके से उसने पाकिस्तान से 3000 करोड़ के हथियार खरीदे थे. पाकिस्तान ने यूक्रेन को 122mm और 155mm के आर्टिलरी शेल्स, रॉकेट्स और छोटे हथियार सप्लाई किए थे.
यूक्रेन ने भारत के साथ की दगाबाजी
यूक्रेन की बार आतंकवाद पालने वाले देश पाकिस्तान के साथ खड़ा दिखाई दिया है लेकिन भारत वो पहला देश है, जिसने USSR से अलग होने के बाद यूक्रेन को मान्यता दी थी. दोनों देश एक वक्त पर ट्रेड पार्टनर थे लेकिन जब भारत न्यूक्लियर हथियार से लैस देश बना तो यूक्रेन, भारत का साथ देने की हिम्मत नहीं दिखा पाया. बल्कि न्यूक्लियर टेस्ट के विरोध वाली साइड पर खड़ा रहा.
अब सऊदी अरब के साथ ‘नया खेल’
सऊदी अरब, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्थिक मददगार रहा है, अब यूक्रेन के लिए नया ‘हथियार बाजार’ बन गया है. जेलेंस्की ने रियाद में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के साथ एक डिफेंस पैक्ट साइन किया है.
यूक्रेन ने सऊदी के आसमान को ईरानी ड्रोनों से बचाने के लिए 201 एंटी-ड्रोन विशेषज्ञों को तैनात किया है. यूक्रेन अपनी ‘इंटरसेप्टर ड्रोन’ तकनीक सऊदी को दे रहा है ताकि वो अपनी तेल के खजाने की रक्षा कर सके.
एक तरफ यूक्रेन, भारत से मदद की गुहार लगाता है, वहीं दूसरी तरफ वो उन देशों के साथ सैन्य गठबंधन कर रहा है जो भारत-पाकिस्तान के समीकरणों में पाकिस्तान की ओर झुकाव रखते हैं.



