
गांधीनगर: गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को सात घंटे से ज्यादा चली लंबी बहस के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास कर दिया। इसके तहत सभी समुदायों और धर्मों के लिए शादी, तलाक, भरण-पोषण और विरासत जैसे नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू किया गया है। सत्ताधारी बीजेपी ने इसे समानता सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक सुधार बताया, जबकि कांग्रेस ने इसका जोरदार विरोध करते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और मुस्लिम-विरोधी है।
यूसीसी बिल पास करने को बताया ऐतिहासिक
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह कानून मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में बनाया गया है। बिल पास होने के बाद एक बयान में संघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सरकार ने विधानसभा में यूसीसी बिल पास कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। कोई भी नागरिक कानून से नीचे नहीं है। समान गुजरात। सशक्त गुजरात।
कानून का मकसद क्या?
राज्य सरकार ने कहा कि इस कानून का मकसद कानून के सामने समानता सुनिश्चित करना और धर्म-आधारित निजी कानूनों से पैदा होने वाली असमानताओं को दूर करना है। सरकार ने साफ किया कि यह संहिता सिर्फ नागरिक मामलों पर लागू होती है और धार्मिक मान्यताओं या रीति-रिवाजों में कोई दखल नहीं देती। सदन में चर्चा के दौरान संघवी ने कहा कि जहां भारत में आपराधिक कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। वहीं शादी, तलाक और संपत्ति से जुड़े नागरिक अधिकार ऐतिहासिक रूप से धर्म के आधार पर अलग-अलग रहे हैं।
सभी समुदायों के लिए तलाक के समान आधार और प्रक्रियाएं
उन्होंने कहा कि इस बिल का मकसद इन अंतरों को खत्म करना और एक समान व्यवस्था स्थापित करना है। यह कानून शादी और तलाक के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान करता है और सभी समुदायों के लिए तलाक के समान आधार और प्रक्रियाएं लागू करता है। यह तलाक के गैर-न्यायिक तरीकों पर रोक लगाता है, जिससे अदालत के जरिए होने वाली कानूनी प्रक्रियाएं अनिवार्य हो जाती हैं।
बिल एक ही शादी को भी अनिवार्य बनाता है
यह बिल एक ही शादी को भी अनिवार्य बनाता है और उन शादियों को अमान्य घोषित करने का प्रावधान करता है जिनमें पहचान छिपाई गई हो। इसके अलावा यह शादी में धोखाधड़ी, ज़बरदस्ती या गलत जानकारी देने से जुड़े मामलों के लिए दंडात्मक प्रावधान भी लागू करता है, जिसमें अपराधों के लिए तय सजा का प्रावधान है। यह कानून महिलाओं को निजी कानूनों से जुड़ी पाबंदियों के बिना भरण-पोषण का अधिकार भी देता है और बेटियों व पत्नियों के लिए विरासत में समान अधिकार सुनिश्चित करता है।
सरकार ने क्या काहा
इस बिल में लिव-इन संबंधों को स्थानीय अधिकारियों के पास पंजीकृत कराने का प्रावधान भी शामिल है। सरकार के अनुसार, इसका मकसद कानूनी सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संवैधानिक सुरक्षा उपायों के तहत, अनुसूचित जनजातियों को इस संहिता के प्रावधानों से छूट दी जाएगी और शादी, तलाक व विरासत से जुड़े उनके रीति-रिवाजों और परंपराओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
20 लाख सुझाव मिले
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की रिटायर जज रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली एक समिति की ओर से किए गए जन परामर्श अभ्यास के निष्कर्षों का हवाला दिया। सरकार के अनुसार, डाक, ईमेल और एक ऑनलाइन पोर्टल सहित विभिन्न माध्यमों से लगभग 20 लाख सुझाव प्राप्त हुए। सरकार ने बताया कि अधिकांश लोगों ने शादी, तलाक, भरण-पोषण और संपत्ति के अधिकारों में एक समान प्रावधानों के साथ-साथ शादी से जुड़ी घटनाओं के अनिवार्य पंजीकरण का समर्थन किया।
कब होगा लागू
इस कदम के साथ गुजरात उन राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में विधायी कदम उठाए हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। गोवा में पहले से ही एक लंबे समय से चला आ रहा साझा नागरिक कानून ढांचा मौजूद है। यह कानून आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद लागू होगा।





