
दुबई: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग और अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद अब दुनिया के अमीरों का सुरक्षित ठिकाना माना जाने वाला सऊदी अरब अब अपनी साख खो चुका है. इस देश का दुबई शहर सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है. जिस दुबई को कभी ‘पूर्व का स्विट्जरलैंड’ कहा जाता था, वहां से अब अल्ट्रा-रिच लोग अपना पैसा निकालकर भाग रहे हैं. इन लोगों को दोस्त देश अमेरिका पर भरोसा नहीं है, यही वजह है कि दुबई के अमीर किसी और देश में अपना पैसा छुपाने पर मजबूर हैं.
दुबई के रईसों में फैला खौफ
फरवरी के अंत में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और उसके बाद शुरू हुए मिसाइल हमलों ने दुबई की ‘सबसे सेफ सिटी’ वाली इमेज को बड़ा झटका दिया है. ड्रोन के मलबे से प्रमुख ठिकानों और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुंचे नुकसान ने रईसों के मन में खौफ भर दिया है.
खुद नहीं जा पा रहे तो पैसा भेजा स्विटजरलैंड
दुबई दुनिया का दूसरा सबसे व्यस्त एविएशन हब है, लेकिन युद्ध के कारण एयरस्पेस बंद होने और रूट बदलने से इसकी कनेक्टिविटी पर भारी दबाव है. विशेषज्ञों का कहना है कि लोग भले ही अभी दुबई न छोड़ें, लेकिन उनका पैसा बहुत तेजी से ‘मोबाइल’ हो गया है. यानी वो अपना कैश दुबई से बाहर सुरक्षित ठिकानों पर भेज रहे हैं.
जब भी दुनिया में अस्थिरता आती है, रईस वापस अपने पुराने और भरोसेमंद ‘सेफ हेवन’ यानी स्विट्जरलैंड की ओर लौटते हैं. डेलॉयट स्विट्जरलैंड के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में यूएई से स्विस बैंकों में जमा नकदी में 40% की बढ़ोतरी हुई है.
हालिया तनाव के बीच स्विस फ्रैंक यूरो के मुकाबले एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जो इसकी मजबूती का प्रमाण है. स्विट्जरलैंड की राजनीतिक तटस्थता और मजबूत कानूनी ढांचा इस समय अरबपतियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है.





