स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी के बीच ‘धर्मयुद्ध’ में असली लक्ष्मण और सूर्पनखा कौन?

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंर सरस्वती पर पर लगे आरोप और उसके बाद आए विवादित बयान ने पूरे मामले को ‘धर्मयुद्ध’ का रूप दे दिया है. रामायण के लक्ष्मण–सूर्पनखा प्रसंग से तुलना कर इस विवाद को और प्रतीकात्मक बनाया जा रहा है.

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ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा विवाद थमने के बजाय लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. यौन शोषण के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब इस मुद्दे ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक रंग ले लिया है. इसी बीच फलाहारी महाराज के एक विवादित बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिसके चलते पूरा मामला “धर्मयुद्ध” की तरह पेश किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर लोग दो पक्षों में बंटे नजर आ रहे हैं.

कहां से हुई विवाद की शुरुआत?

इस पूरे विवाद की जड़ वह एफआईआर है, जो आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंर सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में दर्ज कराई. मामला अदालत तक पहुंचा, जहां निर्देश के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. आरोप सामने आने के बाद धार्मिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ इसे गंभीर आरोप मान रहे हैं, तो कुछ इसे संत परंपरा पर हमला बता रहे हैं.

फलाहारी महाराज के बयान से क्यों बढ़ा विवाद?

मामला तब और भड़क गया जब फलाहारी महाराज ने सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया कि जो कोई आशुतोष ब्रह्मचारी की “नाक काटेगा” और जूते मारेगा, उसे 21 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा. इस बयान में उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप भी लगाए और उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. इस तरह का बयान न केवल सामाजिक रूप से भड़काऊ माना जा रहा है, बल्कि कानूनन भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है.

वीडियो में फलाहारी जी महाराज ने आशुतोष पांडे को व्यभिचारी, बलात्कारी, गौ हत्यारा भी बताया है. उन्होंने आगे कहा, “धिक्कार है तेरे हिंदू होने पर. ऐसे व्यभिचारी को हम हिंदू नहीं मानते.” आज एक ही तरफ लगी हुई है. जल पूरा समाज रहा है. उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी को ‘गौ हत्यारा’ और ‘अपराधी’ बताते हुए कहा कि उन्होंने शंकराचार्य पर घिनौना आरोप लगाकर 125 करोड़ हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है. उनका कहना है कि शंकराचार्य हिंदू समाज के लिए पूज्यनीय हैं और इस तरह के आरोपों से सनातनी समाज अपमानित महसूस कर रहा है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर केस क्यों दर्ज हुआ?

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वारानंद सरस्वती के खिलाफ आशुतोष ब्रह्मचारी ने यौन शोषण मामले में FIR दर्ज कराई है. यह मामला तूल पकड़ने पर अदालत ने पुलिस से अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच करने को कहा था. कथित तौर यौन शोषण का आरोप लगने के बाद से हिंदू समाज में इसको लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही है.

आशुतोष ब्रह्मचारी ने क्या आरोप लगाए?

आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बयान देने का आरोप भी लगाए हैं. सनातन व्यवस्था और संत परंपरा को “भटकाने” का दावा है. उनके अनुसार, यह केवल विचारों का मतभेद नहीं बल्कि “धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन” है.

‘धर्मयुद्ध’ का नैरेटिव कैसे बना?

फलाहारी महाराज के बयान के बाद यह विवाद दो धड़ों में बंटता नजर आने लगा. एक पक्ष इसे “धर्म और आस्था की रक्षा” का मामला बता रहा है. दूसरा पक्ष इसे कानून और व्यवस्था के खिलाफ उकसावे की कार्रवाई मान रहा है. सोशल मीडिया पर यह टकराव और तेज हो गया, जहां इसे “धर्मयुद्ध” का रूप देकर पेश किया जाने लगा.

लक्ष्मण–सूर्पनखा से तुलना क्यों हो रही है?

इस पूरे विवाद को Ramayana की उस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काटी थी. “नाक काटने” वाले बयान के बाद कुछ लोग इस घटना को प्रतीकात्मक रूप से जोड़ते हुए सवाल उठा रहे हैं. आज के विवाद में “लक्ष्मण” कौन है और “सूर्पनखा” कौन? हालांकि, यह तुलना पूरी तरह प्रतीकात्मक है और इसका वास्तविक घटनाओं से सीधा संबंध नहीं है.

असल मुद्दा क्या है?

यह विवाद कई स्तरों पर चल रहा है. एक तरफ गंभीर आरोप और उनकी जांच, दूसरी तरफ धार्मिक आस्था और संत परंपरा का सवाल. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। तीसरी तरफ भड़काऊ बयानबाज़ी, जो कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है. पूरे घटनाक्रम को “धर्मयुद्ध” या पौराणिक पात्रों से जोड़ना ज्यादा भावनात्मक और प्रतीकात्मक व्याख्या है.

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