
इंदिरा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी को लेकर इस बार तारीख को लेकर लोगों में असमंजस है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पापों से मुक्ति तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। आइए जानते हैं इंदिरा एकादशी कब है और इस दिन पूजा कैसे करनी चाहिए।
6 या 7 अक्टूबर, कब रखा जाएगा व्रत?
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 7 अक्टूबर की रात 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन सुबह 6 बजकर 17 मिनट से 10 बजकर 17 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा।
इंदिरा एकादशी की पूजा विधि
व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान करके भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान को जल अर्पित करने के बाद पीला चंदन, पीले फूल, फल और तुलसी दल चढ़ाएं। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और इंदिरा एकादशी की कथा का पाठ करें। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें तथा तुलसी दल से युक्त भोग अर्पित करें।
शाम के समय फलाहार किया जा सकता है। एकादशी के दिन चावल का सेवन न करने की धार्मिक मान्यता है। भगवान विष्णु का स्मरण करने के साथ विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जाता है। अगले दिन पूजा के बाद पारण करके व्रत पूरा किया जाता है।
इंदिरा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं में इंदिरा एकादशी के व्रत को पापों से मुक्ति और मोक्ष की कामना से जुड़ा माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। संतान की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
