वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से माल ढुलाई को रफ्तार
✍️ hellohimachalse@gmail.com📅 September 9, 2026🕐 50 minutes ago👁 0 views
नई दिल्ली: भारत के माल परिवहन नेटवर्क में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। करीब 1,506 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के दादरी से महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक मालगाड़ियों के लिए समर्पित है। इसके अंतिम हिस्सों के शुरू होने के साथ पूरा WDFC अब परिचालन में आ गया है।
NCR से बंदरगाह तक कैसे पहुंचेगा माल?
NCR और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से कंटेनर व अन्य माल पहले दादरी और जुड़े लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंचाया जाएगा। यहां से माल को समर्पित मालगाड़ियों में लोड कर WDFC के जरिए राजस्थान और गुजरात होते हुए महाराष्ट्र के JNPT तक भेजा जा सकेगा।
डबलस्टैक कंटेनर से बढ़ेगी क्षमता
WDFC की खासियत इसकी ऊंची लोडिंग क्षमता है। इस पर डबलस्टैक कंटेनर ट्रेनें चल सकती हैं, यानी एक ही ट्रेन में कंटेनर दो स्तरों पर ले जाए जा सकते हैं। इससे एक ट्रेन में ज्यादा माल पहुंचाना संभव होता है और प्रति यूनिट परिवहन लागत कम करने में मदद मिलती है।
यात्री ट्रेनों को भी मिलेगा फायदा
फ्रेट ट्रेनों के लिए अलग कॉरिडोर बनने से मौजूदा रेलवे लाइनों पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा। इससे यात्री ट्रेनों के लिए भी ज्यादा क्षमता उपलब्ध हो सकती है और रेल नेटवर्क की समयपालन क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।
NCR और बंदरगाहों के बीच तेज सप्लाई चेन
WDFC का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उत्पादन केंद्रों, लॉजिस्टिक्स हब और बंदरगाहों के बीच माल की आवाजाही अधिक तेज और भरोसेमंद हो सकती है। इससे निर्यातकों और आयातकों के लिए डिलीवरी समय घटाने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष: WDFC को NCR से पश्चिमी तट के बंदरगाहों तक माल पहुंचाने वाली एक महत्वपूर्ण रेल रीढ़ के रूप में देखा जा रहा है। इससे कंटेनर, औद्योगिक सामान, कृषि उत्पाद और अन्य माल की लंबी दूरी की ढुलाई को गति मिलने की उम्मीद है।