भारत में क्विक कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है और Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart, BigBasket तथा JioMart जैसी कंपनियों के बीच ग्राहकों तक सबसे तेज डिलीवरी पहुंचाने की होड़ लगी हुई है, लेकिन Amazon की रणनीति बाकी खिलाड़ियों से थोड़ी अलग नजर आती है. कंपनी का फोकस सिर्फ तेज डिलीवरी पर नहीं, बल्कि ऐसे ऑपरेशंस नेटवर्क के निर्माण पर है जो उसे देश का Everyday Store यानी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पहली पसंद बना सके.

Amazon का मानना है कि भविष्य में ग्राहक सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स या बड़े शॉपिंग इवेंट्स के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा के सामान जैसे फलसब्जियां, दूध, किराना, बेबी केयर, पर्सनल केयर और घरेलू जरूरतों के उत्पादों के लिए भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निर्भर होंगे. यही वजह है कि Amazon Fresh और Amazon Now को कंपनी की रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान मिला है. Amazon के अनुसार उसके प्लेटफॉर्म पर आने वाले करीब आधे ऑर्डर अब रोजमर्रा की जरूरतों वाली कैटेगरी से जुड़े हैं.

किसानों से शुरू होती है सप्लाई चेन

Amazon का नेटवर्क ग्राहक के ऑर्डर देने के बाद नहीं, बल्कि खेतों से शुरू होता है. कंपनी किसानों को पहले से मांग का अनुमान उपलब्ध कराती है ताकि वे उसी हिसाब से उत्पादन और कटाई की योजना बना सकें. फसल तैयार होने के बाद उत्पाद कलेक्शन सेंटरों तक पहुंचते हैं, जहां उनकी शुरुआती जांच और ग्रेडिंग की जाती है. इसके बाद उन्हें प्रोसेसिंग सेंटरों में भेजा जाता है, जहां सफाई, छंटाई, पैकेजिंग और गुणवत्ता जांच जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं. कंपनी के नेटवर्क से 16,000 से अधिक किसान और एग्रीगेटर जुड़े हुए हैं.

कोल्डचेन है सबसे बड़ी ताकत

ताजी सब्जियों और फलों की डिलीवरी में सबसे बड़ी चुनौती उनकी गुणवत्ता बनाए रखना होती है. Amazon इसके लिए व्यापक कोल्डचेन नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है. कंपनी के प्रोसेसिंग और फुलफिलमेंट सेंटरों में अलगअलग तापमान वाले स्टोरेज बनाए गए हैं. बेरीज, हरी सब्जियां, डेयरी और फ्रोजन उत्पादों को उनकी जरूरत के मुताबिक अलगअलग तापमान पर रखा जाता है. इससे उत्पादों की ताजगी लंबे समय तक बनी रहती है.

100 शहरों तक पहुंचेगा नेटवर्क

Amazon अब अपने माइक्रोफुलफिलमेंट सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है. कंपनी के पास फिलहाल 360 से ज्यादा माइक्रोफुलफिलमेंट सेंटर हैं और उसे 100 शहरों में 1,000 से अधिक सेंटरों तक बढ़ाने की योजना है. यह नेटवर्क Amazon Fresh और Amazon Now दोनों को सपोर्ट करेगा. हाल ही में कंपनी ने Amazon Now के तहत प्रमुख शहरों में 100 बड़े फुलफिलमेंट सेंटर शुरू करने की भी घोषणा की है, जिनकी मदद से 10 से 20 मिनट के भीतर डिलीवरी की क्षमता बढ़ाई जाएगी.

AI और डेटा से होगी तेज डिलीवरी

Amazon की सप्लाई चेन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की भूमिका लगातार बढ़ रही है. कंपनी मौसम, स्थानीय मांग, खरीदारी के रुझान और ग्राहकों की ब्राउजिंग गतिविधियों का विश्लेषण करके भविष्य की मांग का अनुमान लगाती है. इससे सही उत्पाद सही जगह और सही समय पर उपलब्ध कराए जा सकते हैं. कंपनी का कहना है कि बेहतर फोरकास्टिंग से इन्वेंट्री मैनेजमेंट और डिलीवरी स्पीड दोनों में सुधार होता है.

इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर का दांव

Amazon ने 2030 तक भारत में 35 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बनाई है. इसके तहत टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, AI और ऑपरेशंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा. कंपनी ने इस साल भारत में अपने ऑपरेशंस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 2,800 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की भी घोषणा की है.

ऑपरेशंस ही बन रहा नया प्रोडक्ट

ईकॉमर्स सेक्टर में पहले प्रतिस्पर्धा कीमत और प्रोडक्ट्स की विविधता पर होती थी. इसके बाद क्विक कॉमर्स ने डिलीवरी स्पीड को सबसे बड़ा हथियार बना दिया. अब Amazon का मानना है कि अगला मुकाबला ऑपरेशनल क्षमता और सप्लाई चेन की मजबूती पर होगा.

कंपनी खेतों, कलेक्शन सेंटरों, कोल्डचेन, AI, माइक्रोफुलफिलमेंट सेंटर और डिलीवरी नेटवर्क को एकीकृत करके ऐसा सिस्टम तैयार कर रही है, जो उसे सिर्फ ईकॉमर्स कंपनी नहीं बल्कि भारत का Everyday Store बनाने में मदद करे. ग्राहक को भले ही दरवाजे पर सिर्फ किराने का एक बैग दिखाई दे, लेकिन उसके पीछे हजारों किसानों, वेयरहाउस, डेटा सिस्टम और डिलीवरी पार्टनर्स का विशाल नेटवर्क काम कर रहा होता है.