बिना आंखों की रोशनी के किया कमाल, CBSE में 95% अंक से टॉपर बनी जैनब!


CBSE 10th Student Zainab Bilal Scores 95 Percent: ‘अगर मैं कर सकती हूं, तो कोई भी कर सकता है.’ इस लाइन में उतना ही ज्यादा वजन है जितना जैनब के सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा के अंक को जानकर लगेगा. एक ऐसी लड़की जिसे दिखाई नहीं देता और बिना किसी का सहयोग लिए सीबीएसई में 95 प्रतिशत रैंक हासिल की है. जी हां, श्रीनगर की रहने वाली जैनब ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 10वीं बोर्ड परीक्षा में 500 में से 475 अंकों के साथ सफलता हासिल की है. श्रीनगर की दृष्टिबाधित छात्रा की सफलता की कहानी प्रेरणादायक उदाहरण है. बचपन से ही पढ़ाई के मामले में जैनब अच्छी रही हैं. बिना आंखों की रोशनी के जैनब ने अच्छे अंकों से परीक्षा में सफलता पाई है.

बिना स्क्राइब और लैपटॉप की मदद के दी परीक्षा
जैनब ने उन पहली दृष्टिबाधित छात्राओं में से एक हैं जिन्होंने सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा बिना लेखक (स्क्राइब) की मदद और लैपटॉप का इस्तेमाल किए दी. श्रीनगर के दिल्ली पब्लिक स्कूल के लर्निंग रिसोर्स सेंटर में 16 साल की जैनब ने पढ़ाई की है. 95 प्रतिशत अंक के साथ सफलता हासिल करने पर उन्होंने अपने स्कूल और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया है.

जैनब आईटी सेक्टर में बनाना चाहती हैं करियर
जैनब बिलाल ने अपनी सफलता के बारे में बताने के साथ-साथ कहा कि वो आईटी सेक्टर में जाना चाहती है. आगे चलकर कंप्यूटर एप्लीकेशन में ग्रेजुएशन करेंगी. सीबीएसई में 500 में से 475 अंक हासिल किए हैं. कंप्यूटर साइंस में 100 अंक हासिल किए हैं.

सिर्फ 12 साल की उम्र में लिया इंटरव्यू
जैनब सह-पाठ्यक्रम एक्टिविटी में भी उत्कृष्ट रही हैं. जब वो सिर्फ 12 साल की थी तब उन्होंने उमर अब्दुल्ला का इंटरव्यू लिया था. सिर्फ इनका ही नहीं, इस उम्र में बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान का भी इंटरव्यू ले रखा है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जैनब द्वारा लिए गए इस इंटरव्यू को स्कूल के छात्रों द्वारा चलाए जा रहे रेडियो डीपीएस पर प्रसारित किया गया था.

जैनब का दिव्यांग बच्चों को लेकर संदेश
जैनब ने स्कूल प्रबंधक विजय धर और अपने शिक्षकों को लेकर आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि स्कूल और शिक्षकों ने उन्हें उनके लक्ष्य हासिल करने में मदद की है. साथ ही अपने माता-पिता को धन्यवाद करते हुए कहा कि ‘मेरे पास शब्द नहीं हैं, मेरे माता-पिता मेरे जीवन के सबसे बड़े सहारा रहे हैं.’ शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चों को लेकर जैनब ने कहा कि उनके माता-पिता को अपने बच्चों से हार नहीं माननी चाहिए. जैनब का कहना है कि वो अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखेंगी और अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने की कोशिश करेंगी.

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