वैश्विक अर्थव्यवस्था इस वक्त बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है. इसी बीच वाशिंगटन से एक ऐसी खबर आई है, जो दुनियाभर के बाजारों में उथलपुथल मचा सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगले हफ्ते से यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा.

‘टर्नबेरी एग्रीमेंट’ पर मंडराता खतरा
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक पोस्ट के जरिए सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से सहमत व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है. हालांकि, उन्होंने अपनी आपत्तियों को विस्तार से स्पष्ट नहीं किया. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। यह घोषणा इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि पिछले साल जुलाई में ही ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच एक अहम ट्रेड डील पर मुहर लगी थी.
इस समझौते को ‘टर्नबेरी एग्रीमेंट’ के नाम से जाना जाता है, जिसका नाम स्कॉटलैंड में स्थित ट्रंप के गोल्फ कोर्स पर रखा गया था. इस डील के तहत तय हुआ था कि अधिकांश यूरोपीय वस्तुओं पर 15% से ज्यादा टैरिफ नहीं लगेगा. अब अचानक 25% टैक्स लगाने का नया ऐलान सीधे तौर पर इस पुरानी सहमति का उल्लंघन नजर आ रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कैसे उलझा पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की जड़ें इस साल की शुरुआत में आए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से जुड़ी हैं. दरअसल, 2025 में हुए इस समझौते पर तब सवालिया निशान लग गया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति के पास यूरोपीय संघ के सामानों पर टैरिफ लगाने या आर्थिक आपातकाल घोषित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. शुरुआत में यूरोपीय सामानों पर 15% की टैरिफ सीमा तय की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सीमा घटकर 10% रह गई.
इसके बाद से ही ट्रंप प्रशासन ने दूसरे कानूनों का सहारा लेते हुए नए सिरे से आयात कर लगाने की मुहिम शुरू कर दी. वर्तमान में ट्रंप प्रशासन व्यापार असंतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिमों की आड़ में एक नई टैरिफ व्यवस्था लागू करने की जांच के बीच में है. इस जांच के नतीजे यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते को पूरी तरह से खत्म कर सकते हैं.
दुनिया के सबसे बड़े कारोबार पर क्या होगा असर?
अगर यह नया टैरिफ लागू होता है, तो इसके आर्थिक परिणाम काफी व्यापक होंगे. आम आदमी के नजरिए से समझें, तो अमेरिका में महंगी कारों और ट्रकों का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होगी और महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है.
आंकड़ों पर गौर करें तो 2024 में अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 1.7 ट्रिलियन यूरो था. यूरोपीय सांख्यिकी एजेंसी ‘यूरोस्टेट’ के अनुसार, यह रोजाना औसतन 4.6 बिलियन यूरो का भारीभरकम कारोबार है. यूरोपीय संघ का अनुमान था कि द्विपक्षीय समझौते से यूरोपीय वाहन निर्माताओं को हर महीने लगभग 500 से 600 मिलियन यूरो की बचत होगी. ट्रंप के इस नए फैसले से इस बड़ी बचत पर सीधा ग्रहण लग गया है.
“डील तो डील होती है” यूरोप ने याद दिलाया पुराना वादा
यूरोपीय संघ भी इस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फरवरी में ही यूरोपीय आयोग ने अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि “डील तो डील होती है.” उनका स्पष्ट कहना है कि अमेरिका उनका सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, इसलिए वे उम्मीद करते हैं कि अमेरिका संयुक्त बयान में किए गए अपने वादों का सम्मान करेगा.
यूरोप ने साफ कर दिया है कि उनके उत्पादों को सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी व्यवहार का लाभ मिलना जारी रहना चाहिए और पहले से तय की गई सीमा के पार किसी भी तरह का टैरिफ नहीं बढ़ना चाहिए.





