38 IAS Transfer In UP: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर रातोरात 38 आईएएस अफसरों के ट्रांसफर किए हैं. रविवार देर रात तबादले की सूची जारी की गई है. उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा में चर्चित और साहसिक छवि वाले आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही को योगी सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंपी है. उन्हें जालौन का संयुक्त मजिस्ट्रेट बनाया गया है. यह तैनाती उनके तकनीकी इस्तीफा वापस लेने के कुछ दिनों बाद आई है, जो उनके लंबे संघर्ष और ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत की जीत मानी जा रही है.
ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जिनके इस्तीफे से मच गई थी खलबली, ट्रांसफर के बाद अब मिली ये बड़ी जिम्मेदारी" loading="lazy" />रिंकू सिंह राही लगभग 44 वर्षीय 202223 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. इससे पहले वे प्रांतीय सिविल सेवा PCS अधिकारी थे. 2004 में PCS पास करने के बाद 200809 में मुजफ्फरनगर में डिस्ट्रिक्ट सोशल वेलफेयर ऑफिसर के रूप में तैनात थे. उन्होंने वहां स्कॉलरशिप और पेंशन घोटाले का खुलासा किया.
इस ईमानदारी की कीमत उन्हें भारी पड़ी
मार्च 2009 में उन पर हमला हुआ, जिसमें 7 गोलियां लगीं चेहरा, आंख समेत. वे लंबे समय अस्पताल में रहे, एक आंख की रोशनी चली गई और चेहरे पर विकृति आई, लेकिन हौसला नहीं टूटा. विकलांगता कोटा के तहत उन्होंने UPSC क्रैक किया और आईएएस बने.
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क्या हुआ था विवाद?
जुलाई 2025 में शाहजहांपुर के पूवायां में SDM के रूप में तैनाती मिली. पहले दिन ही तहसील में सफाई और शौचालय की समस्या पर क्लर्क को उठकबैठक कराई. वकीलों के विरोध पर खुद कान पकड़कर 5 उठकबैठक कीं. उनका यह वीडियो वायरल हो गया. इसके बाद उन्हें राजस्व परिषद लखनऊ में अटैच कर दिया गया. लंबे समय तक कोई फील्ड पोस्टिंग या जिम्मेदारी नहीं मिली.
पहले दिया इस्तीफा फिर…
मार्च 2026 के अंत में उन्होंने तकनीकी इस्तीफा दिया. राष्ट्रपति और DoPT को पत्र लिखा कि “बिना काम के वेतन लेना नैतिक रूप से गलत है”. उन्होंने सिस्टम में “पैरेलल सिस्टम” और ईमानदार अधिकारियों के साथ “खास सजा” का भी जिक्र किया. 20 अप्रैल 2026 के आसपास रिंकू सिंह राही ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया. और अब 34 मई 2026 को जारी 38 IAS अधिकारियों के तबादले में उन्हें जालौन में संयुक्त मजिस्ट्रेट बनाया गया है. यह फैसला उनके संघर्ष, ईमानदारी और जनसेवा की प्रतिबद्धता को नई दिशा देता है.
जनसेवा में नई छाप छोड़ेंगे
रिंकू सिंह राही की कहानी साधारण पृष्ठभूमि से उठकर सिस्टम में बदलाव लाने वाले अधिकारी की मिसाल है. घोटाले का पर्दाफाश, जानलेवा हमला, UPSC की सफलता, वायरल घटना और अब नई तैनाती, हर पड़ाव पर उन्होंने साहस और जवाबदेही दिखाई. जालौन की जनता को एक ऐसे अधिकारी मिले हैं जो बिना डरे काम करते हैं. उम्मीद है कि यह तैनाती उनके लिए नई शुरुआत साबित होगी और वे फिर से जनसेवा में अपनी छाप छोड़ेंगे.





