उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी। लगातार आ रही शिकायतों के मद्देनजर सरकार ने स्मार्ट बिजली मीटरों की प्रीपेड व्यवस्था समाप्त कर उन्हें पोस्टपेड मोड में संचालित करने का फैसला किया है। बीते कई महीनों से स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायत सामने आ रही थी। राज्य में कई जगह इस व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन भी किए गए थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कुल 86.5 लाख में से करीब 83 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर हैं जिनमें अधिकांश 1 किलोवाट और 2 किलोवाट केटेगोरी के उपभोक्ता हैं। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद अब स्मार्ट मीटर पुराने तरह से ही पोस्टपेड मीटर की तरह काम करेंगे जिसके तहत उपभोक्ताओं को पहले भुगतान के बजाय हर महीने के आखिर में बिजली बिल मिलेगा। यह कदम उन उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उठाया गया है जिन्होंने प्रीपेड प्रणाली में तकनीकी दिक्कतों की शिकायत की थी।”
सामान्य तरीके से बनाया जाएगा बिजली बिल
नई व्यवस्था के अनुसार हर महीने की 1 से 30 तारीख तक की बिजली खपत का बिल सामान्य तरीके से बनाया जाएगा और उपभोक्ताओं को अगले 10 दिनों के भीतर SMS या व्हाट्सऐप के जरिए भेजा जाएगा। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। बिल जारी होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान करना होगा। ऊर्जा मंत्री ने बिजली विभाग को निर्देश दिया है कि किसी भी स्थिति में जारी महीने के दौरान बिजली कनेक्शन न काटे जाएं।
साथ ही बकाया राशि वाले उपभोक्ताओं को 10 किस्तों में भुगतान करने की सुविधा दी जाएगी। इस फैसले के तहत पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदलने की प्रक्रिया भी फिलहाल स्थगित कर दी गई है। हालांकि, पहले से लगाए गए स्मार्ट मीटरों से जुड़ी शिकायतों का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा।
लोगों को असुविधा से बचाने के निर्देश
विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे बिजली विभाग में अपना मोबाइल नंबर अपडेट कराएं ताकि बिल और अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी समय पर मिल सके। यह फैसला गर्मी के पीक से पहले लिया गया है। मंत्री ने सोमवार को शक्ति भवन में हुई समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और बढ़ती मांग के दौरान लोगों को असुविधा से बचाने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार ने कहा है कि उपभोक्ता सुविधा उसकी ऊर्जा नीतियों का केंद्र है और स्मार्ट मीटर से जुड़े फीडबैक के आधार पर आगे भी जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश के उपभोक्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले का स्वागत करते हैं। हालांकि, एक उपभोक्ता प्रतिनिधि के तौर पर मैं मांग करता हूं कि स्मार्ट मीटर के विरोध में प्रदर्शन करने वाले किसानों और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाए।”
चढ़ती गर्मी में स्मार्ट मीटर से जनता हलकान, बिन बताए कटती है बिजली, बिल भरने पर भी वापस आने में लग जाते हैं कई दिन
उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटर आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। बिना सूचना के बिजली कट रही है, रिचार्ज के बाद भी निगेटिव बैलेंस के संदेश आ रहे हैं और भुगतान करने के बावजूद कई दिनों तक बिजली आपूर्ति सुचारू नहीं हो पा रही है। गाजियाबाद जिले में भी हजारों उपभोक्ता इन स्मार्ट मीटरों के आगे बेबस नजर आ रहे हैं। उनका दावा है कि स्मार्ट मीटर की वजह से न सिर्फ बिजली कट रही है बल्कि कुछ मामलों में पहले की तुलना में बिल भी ज्यादा आने लगा है।





