आम लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में 12 से 15 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है. खाड़ी देशों का कच्चा तेल यान ब्रेंट क्रूड के दाम 97 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है. जिसके असर से देश के वायदा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 13.50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है. इसका मतलब है कि भारत में कच्चे तेल की कीमतें 8 रुपए प्रति लीटर कम हो गई हैं. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन कम होने और समझौता होने के संकेत मिलना है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इंटरनेशनल मार्केट से लेकर भारत में कच्चे तेल की कीमतों कितनी कम हो गई है.

कच्चे तेल में बड़ी गिरावट
बुधवार को वायदा कारोबार में कच्चे तेल की कीमतें 13.50 फीसदी प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 8,380 रुपए प्रति बैरल पर आ गईं. यह गिरावट वैश्विक बेंचमार्क में भारी नुकसान और अमेरिका तथा ईरान के बीच संभावित समझौते के संकेतों के कारण हुई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, मई डिलीवरी के लिए कच्चे तेल की कीमत 1,318 रुपए, या 13.59 फीसदी गिरकर 8,380 रुपये प्रति बैरल हो गई. जबकि एक दिन पहले कच्चे तेल की कीमत 9,698 रुपए प्रति बैरल पर था. सुबह देश के वायदा बाजार में कच्चे तेल के दाम 9,610 रुपए पर ओपन हुए थे. शाम 5 बजकर 20 मिनट पर कच्चे तेल की कीमतें 1,055 यानी करीब 11 फीसदी की गिरावट के साथ 8,643 रुपए प्रति बैरल पर कारोबर कर रहा था.
एक बैरल में कितना लीटर
इंटरनेशनल मार्केट से लेकर भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज तक कच्चे तेल का वॉल्यूम बैरल में मापा जाता है. अगर इसे लीटर में कैलकुलेट किया जाए तो 158.987 लीटर यानी करीब 159 लीटर हो जाता है. मौजूदा समय में भारत में एक बैरल कच्चे तेल के दाम 8,380 रुपए पर पहुंच गए थे. इसका मतलब है कि कारोबारी सत्र में एक लीटर कच्चे तेल की कीमतें 52.70 रुपए प्रति लीटर हो गई थी. जबकि एक दिन पहले यही कीमतें 60.99 रुपए प्रति लीटर देखने को मिली थी. इसका मतलब है कि कारोबारी सत्र के दौरान एक लीटर कच्चे तेल की कीमतों में 8.29 रुपए प्रति लीटर की गिरावट देखने को मिल चुकी है. जो एक बड़ी गिरावट है. इसी तरह, जून कांट्रैक्ट भी 1,098 रुपए, या 11.69 फीसदी गिरकर 8,298 रुपए प्रति बैरल पर आ गया.
खाड़ी और अमेरिकी तेल में कितनी गिरावट?
वहीं दूसरी ओर इंटरनेशनल मार्केट में भी कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. आंकड़ों को देखें तो अमेरिकी क्रूड ऑयल डब्ल्यूटीआई के दाम में सोमवार मंगलवार के हाई के मुकाबले में 15 फीसदी से ज्यादा नीचे आ गए हैं. मंगलवार को ब्रेंट क्रूड के दाम 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहे थे. वहां से गिरकर 96.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर हैं. जबकि अमेरिकी क्रूड ऑयल डब्ल्यूटीआई के दाम में भी एक दिन पहले के पीक यानी 105 डॉलर प्रति बैरल से कम होकर 89 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है. इसका मतलब है कि अमेरिकी क्रूड के दाम में करीब 16 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है.
क्यों सस्ता हुआ कच्चा तेल?
जानकारों का कहना है कि तेल की कीमतों पर भारी दबाव तब पड़ा, जब ऐसी खबरें आईं कि वाशिंगटन और तेहरान एक शुरुआती समझौते के करीब हैं. इस समझौते का मकसद संघर्ष को खत्म करना और व्यापक परमाणु वार्ताओं के लिए रास्ता खोलना है. रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे में ईरान के परमाणु संवर्धन पर रोक लगाना शामिल है. इसके बदले में उसे प्रतिबंधों से राहत मिलेगी, उसके फ्रीज हुए अरबों डॉलर के फंड जारी किए जाएंगे, और होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग पर लगी पाबंदियों में भी ढील दी जाएगी. ब्रोकरेज फर्म कोटक सिक्योरिटीज ने कहा कि तेल की कीमतों में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट आई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज में सुरक्षा अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया, ताकि बातचीत आगे बढ़ सके. साथ ही, उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि संघर्ष विराम अभी भी लागू है. इससे भूराजनीतिक जोखिम प्रीमियम में कमी आई.
क्या कह रहे हैं जानकार
इस बीच, अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि संघर्ष विराम अभी भी बरकरार है. वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिया कि हाल ही में क्षेत्र में हुई छोटीमोटी घटनाओं के कारण तनाव बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है. इससे तेल की कीमतों पर और भी दबाव पड़ा. जूलियस बेयर में अर्थशास्त्र और नेक्स्ट जेनरेशन के रिसर्च के प्रमुख नॉर्बर्ट रुककर ने कहा कि उतारचढ़ाव का दौर जारी है. अमेरिका ने एक बार फिर होर्मुज के रास्ते होने वाले व्यापार की सुरक्षा करना बंद कर दिया है, जिससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. फिलहाल, वहां से होने वाला आवागमन लगभग ठप सा हो गया है. उन्होंने आगे कहा कि लगातार बनी हुई गतिरोध की स्थिति के बावजूद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं.
भारत में क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से भारत के आम लोगों को काफी राहत मिलेगी. कच्चे तेल की कीमतें कम होने से इंपोर्टेड महंगाई में गिरावट देखने को मिलेगी. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। साथ ही देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में महंगा करने की जो संभावनाएं लगाई जा रही हैं, उन्हें बल नहीं मिलेगा. साथ ही रुपए में गिरावट में लगाम लगेगी. जिसका असर बुधवार को देखें तो मिला जब डॉलर के मुकाबले में 61 पैसे की तेजी देखने को मिली. इंपोर्ट बिल में भी काफी कमी देखने को मिलेगी. देश के इंपोर्ट बिल में सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का होता है. देश अपनी जरुरत है 88 फीसदी कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. अगर कीमतों में कमी आएगी तो बिल भी अपने आम कम हो जाएगा. इसके लिए देश की जीडीपी को राहत मिलेगी. क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से ट्रेड डेफिसिट में दबाव कम देखने को मिलेगा.





