West Bengal Possible Minister List: पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार गठन की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री और मंत्रियों के नामों को लेकर सस्पेंस गहरा गया है. सुवेंदु अधिकारी सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं, जबकि दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक और अर्जुन सिंह जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं. संभावित कैबिनेट में रत्ना देबनाथ, उत्पल महाराज, रूपा गांगुली, राजेश कुमार और दिपांजन चक्रवर्ती समेत कई नए चेहरे शामिल हो सकते हैं.

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस वक्त नए दौर की दहलीज पर खड़ी है. बीजेपी पहली बार राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची है और अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर उठ रहा है. कोलकाता से दिल्ली तक बैठकों का दौर तेज हो चुका है. अमित शाह और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी विधायक दल की बैठक में शामिल होने वाले हैं, जहां विधायक दल का नेता चुना जाएगा. पार्टी के भीतर सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश चल रही है. बीजेपी सिर्फ सरकार नहीं बनाना चाहती, बल्कि बंगाल में लंबी राजनीतिक पारी खेलने की रणनीति पर काम कर रही है. यही वजह है कि संभावित कैबिनेट में पुराने संगठनात्मक चेहरों के साथ नए और प्रतीकात्मक नामों को भी जगह देने की तैयारी दिखाई दे रही है.
सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी माने जा रहे हैं. नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने के बाद से वे बीजेपी के सबसे मजबूत बंगाली चेहरे बन चुके हैं. संगठन में उनकी पकड़ मजबूत है और दक्षिण बंगाल में उनका प्रभाव भी काफी बड़ा माना जाता है. पार्टी नेतृत्व उन्हें आक्रामक राजनीति और जनाधार वाले नेता के रूप में देख रहा है. दूसरी तरफ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम भी लगातार चर्चा में है. आरएसएस पृष्ठभूमि से आने वाले दिलीप घोष को संगठन खड़ा करने का श्रेय दिया जाता है. बीजेपी का एक वर्ग मानता है कि बंगाल में वैचारिक मजबूती और संगठनात्मक नियंत्रण के लिए दिलीप घोष जैसे नेता की अहम भूमिका जरूरी होगी.
महिला चेहरों में अग्निमित्रा पॉल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. फैशन डिजाइनर से नेता बनीं अग्निमित्रा ने कम समय में बीजेपी में मजबूत पहचान बनाई है. पार्टी उन्हें महिला वोटरों और शहरी वर्ग के बीच लोकप्रिय चेहरे के रूप में देख रही है. सूत्रों के मुताबिक उन्हें डिप्टी सीएम या बड़े मंत्रालय की जिम्मेदारी मिल सकती है. इसके अलावा आरजी कर मामले में चर्चा में आईं रत्ना देबनाथ का नाम भी संभावित मंत्रियों में शामिल है. बीजेपी उन्हें संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दों से जुड़े चेहरे के रूप में सामने ला सकती है. पार्टी महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत दिखाने की रणनीति पर काम कर रही है.
उत्तर बंगाल से पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक मंत्री पद की रेस में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. बीजेपी क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए उत्तर बंगाल के नेताओं को अहम जिम्मेदारी देना चाहती है. बैरकपुर विधायक अर्जुन सिंह का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। श्रमिक राजनीति और औद्योगिक इलाकों में उनकी पकड़ बीजेपी के लिए अहम मानी जाती है. वहीं दो बार के विधायक गौरिशंकर घोष को संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण मजबूत दावेदार माना जा रहा है. बीजेपी की कोशिश है कि अनुभवी और जमीनी नेताओं का मिश्रण कैबिनेट में दिखाई दे.
हिंदुत्व और वैचारिक राजनीति से जुड़े चेहरों में पूर्व वीएचपी बंगाल अध्यक्ष श्रुति शेखर गोस्वामी और भारत सेवाश्रम संघ से जुड़े रहे उत्पल महाराज के नाम चर्चा में हैं. पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि बंगाल में वैचारिक आधार मजबूत करने के लिए ऐसे चेहरों को सरकार में जगह दी जा सकती है. पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व एनएसजी कमांडो दिपांजन चक्रवर्ती जैसे नाम कानून व्यवस्था और राष्ट्रवाद की राजनीति को मजबूत करने वाले चेहरों के रूप में देखे जा रहे हैं. बीजेपी पहली कैबिनेट में प्रशासनिक अनुभव और हिंदुत्व दोनों का संतुलन बनाना चाहती है.
फिल्म जगत और बौद्धिक वर्ग से जुड़े नामों में रूपा गांगुली और एडवोकेट कौस्तव बागची की चर्चा तेज है. रूपा गांगुली लंबे समय से बीजेपी का प्रमुख चेहरा रही हैं और बंगाल में महिला तथा सांस्कृतिक राजनीति में उनकी मजबूत पहचान है. वहीं कौस्तव बागची को पार्टी तेजतर्रार और कानूनी मामलों में मजबूत आवाज के रूप में देखती है. इसके अलावा दीपक बर्मन, सजल घोष, इंद्रनील खान और जॉयल मुर्मू जैसे नेताओं के नाम भी संभावित मंत्री सूची में शामिल बताए जा रहे हैं. बीजेपी सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर कैबिनेट तैयार करने की कोशिश कर रही है.
विधानसभा स्पीकर पद के लिए मानिकतला विधायक तापस राय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. पार्टी मानती है कि सदन संचालन के लिए अनुभवी और शांत स्वभाव वाला चेहरा जरूरी होगा. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की केंद्रीय टीम आरएसएस नेताओं के साथ लगातार समन्वय में है और हर नाम पर विस्तार से चर्चा हो रही है. पार्टी नेतृत्व चाहता है कि पहली बीजेपी सरकार में ऐसा संतुलन दिखे जिससे संगठन, वैचारिक आधार और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व तीनों मजबूत हों. यही वजह है कि अंतिम सूची पर अभी भी मंथन जारी है.
अब सबकी नजर शुक्रवार की विधायक दल की बैठक पर टिकी हुई है. अमित शाह की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि बीजेपी बंगाल में सरकार गठन को लेकर बेहद गंभीर है. मुख्यमंत्री के चेहरे से लेकर कैबिनेट गठन तक हर फैसला भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. बीजेपी की कोशिश सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बंगाल में लंबे समय तक राजनीतिक पकड़ बनाना है. ऐसे में यह बैठक सिर्फ सीएम चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि बंगाल बीजेपी के अगले दशक की दिशा तय करने वाली बैठक मानी जा रही है.





