International Nurses Day: केरल देश को सबसे ज्यादा नर्स देने वाला गढ़ कैसे बन गया?​

भारत के अलगअलग राज्यों की खासियत भी अलगअलग है. केरल भी ऐसा ही है. यह देश को सबसे ज्यादा नर्स देने वाला राज्य है. दुनियाभर के कई देशों में भारतीय नर्सों की मांग है. इस मांग को पूरा करने में केरल सबसे आगे है. देश को सबसे ज्यादा नर्स देने में आज भी दक्षिण के राज्यों का दबदबा है. देश में 50 फीसदी से अधिक नर्से आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना से हैं, लेकिन केरल का रिकॉर्ड सबसे पुराना है. दुनिया के देशों में केरल को इस खूबी के लिए भी जाना जाता है. इंटरनेशनल नर्स डे के मौके पर जानिए, केरल कैसे सबसे ज्यादा नर्स देने वाला राज्य बन गया.

International Nurses Day: केरल देश को सबसे ज्यादा नर्स देने वाला गढ़ कैसे बन गया?​

दक्षिण के राज्यों के बाद, 17 प्रतिशत से ज्यादा नर्सिंग कॉलेज पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र में हैं, जहां देश में सबसे अधिक 713 नर्सिंग कॉलेज हैं; इसके बाद राजस्थान और गुजरात का नम्बर आता है. भारत में 5,203 नर्सिंग कॉलेजों में से 715 सरकारी हैं. इनमें से 40 प्रतिशत दक्षिण के राज्यों में हैं. वर्तमान में देश में 35.14 लाख रजिस्टर्ड नर्सिंग कर्मचारी हैं.

केरल कैसे बना नर्सों का गढ़?

केरल को नर्सों का गढ़ कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा, इसके पीछे कई कारण हैं. आइए एकएक करके समझते हैं.

1 चर्च और मिशनरी का योगदान

केरल से सबसे ज्यादा नर्स निकलने के पीछे यहां की चर्च और मिशनरी का बड़ा रोल रहा है. अंग्रेजों के दौर में और बाद में यहां मिशनरियों ने बड़े स्तर पर अस्पताल और नर्सिंग स्कूल खोले. इससे यह सेक्टर सम्मानजनक पेशा बना. साथ ही ईसाई समुदाय की महिलाओं ने बड़ी संख्या में इसे अपनाया. नतीजा, यहां नर्सों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई.

वर्तमान में देश में 35.14 लाख रजिस्टर्ड नर्सिंग कर्मचारी हैं.

शिक्षा पर फोकस, नर्सिंग एजुकेशन बना आधार

केरल की गिनती देश के सबसे साक्षर राज्यों में की जाती है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। यहां शिक्षा के क्षेत्र में जेंडर को लेकर उस तरह से फर्क नहीं किया जाता जैसा दूसरे राज्यों में दिखता है. यहां हमेशा से ही शिक्षा पर फोकस किया गया है. मेडिकल और नर्सिंग एजुकेशन एक मजबूत आधार रहा है. यही वजह है कि यहां की लड़कियों ने इस प्रोफेशन को अपनाया.

विदेश में मिलने लगे मौके

1970 के दशक में धीरेधीरे खाड़ी देशों में हेल्थ सेक्टर का दायरा बढ़ने लगा. नतीजा वहां नर्सों की मांग बढ़ी. केरल की नर्स प्रशिक्षित होने के साथ अंग्रेजी में भी पारंगत थीं. इन्हीं खूबियों ने विदेश में नौकरी का रास्ता खाेला. नतीजा, बड़ी संख्या में नर्सें विदेश जाने लगीं और एक चेन सिस्टम बन गया. धीरेधीरे कई देशों में भारतीय नर्सों की संख्या बढ़ने लगी. वर्तमान में मिडिल ईस्ट से यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक में भारतीय नर्सें काम कर रही हैं.

कभी नर्स के पेशे को महिलाओं के लिए कम प्रतिष्ठित माना जाता था, लेकिन केरल में ऐसा नहीं था.

अंग्रेजी और प्रोफेशनल ट्रेनिंग ने बढ़ाया ग्राफ

दूसरे देशों में काम करने में अंग्रेजी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करना आसान हुआ. इसके साथ राज्य और सरकारी नर्सिंग संस्थानों के बड़े नेटवर्क में रास्ता आसान किया. बेहतर प्रोफेशनल ट्रेनिंग से विदेश में काम करना आसान हुआ. यही नहीं नर्सें अपने घरों के लिए आर्थिक सहारा भी बनीं. वो आर्थिक रूप से सम्पन्न हुईं तो यह एक मजबूत प्रोफेशन बनकर उभरा.

सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ती गई

पहले नर्स के पेशे को महिलाओं के लिए कम प्रतिष्ठित माना जाता था, लेकिन केरल में ऐसा नहीं था. यहां यह प्रोफेशनल महिलाओं के लिए काफी सम्मानजनक और सुरक्षित करियर माना गया. नतीजा, ज्यादा से ज्यादा लड़कियां इस प्रोफेशन में आईं और यह सेक्टर तेजी से बढ़ने लगा.

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