Nahane Ka Sahi Time: पहले के समय में जहां लोग सुबह सूर्योदय से पहले ही उठकर स्नान कर लेते थे तो वहीं आज के समय में स्नान का कोई एक निश्चित समय नहीं रह गया है। जिसका जब मन करता है वह तब स्नान कर लेता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में स्नान को लेकर जरूरी नियम बताए गए हैं। कहते हैं गलत समय पर किया गया स्नान आपके जीवन में परेशानियों का कारण बन सकता है। वहीं शुभ समय पर नहाने से आपका जीवन बदल सकता है। चलिए जानते हैं स्नान से जुड़े कुछ जरूरी नियम।

स्नान के प्रकार
- मुनि स्नान : सुबह 4 से 5 बजे के बीच का स्नान मुनि स्नान माना जाता है। यह स्नान बुद्धि, आरोग्य और मानसिक शांति प्रदान करता है। इस दौरान नहाना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में नहाने से जीवन में सुखशांति आती है।
- देव स्नान : सुबह 5 से 6 बजे के बीच का स्नान देव स्नान कहलाता है। कहते हैं इस समय नहाने से यश, धन और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस दौरान पवित्र नदियों का स्मरण करते हुए नहाना बेहद फलदायी होता है।
- मानव स्नान : सुबह 6 से 8 बजे के बीच का स्नान मानव स्नान कहलाता है। आमतौर पर इस समय गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग नहाते हैं।
- राक्षसी स्नान : सुबह 8 बजे के बाद नहाना राक्षसी स्नान कहलाता है। कहते हैं इस दौरान नहाने से दरिद्रता आती है। सूर्योदय के काफी देर बाद या फिर भोजन करके किया गया स्नान शास्त्रों में राक्षसी स्नान कहा गया है। ऐसे में इस समय स्नान करने से बचना चाहिए।
‘राक्षसी स्नान’ माना गया है अशुभ
अगर आप भी रोजाना 8 या 9 बजे के बाद नहाते हैं, तो अपनी ये आदत जरूर बदल लें क्योंकि ऐसा करके आप अनजाने में ही नकारात्मक ऊर्जा को न्योता दे रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि राक्षसी स्नान करने वालों के जीवन में सदैव तनाव रहता है। इसके अलावा इस समय स्नान करना शरीर के लिए भी लाभकारी नहीं माना जाता।





