पुरानी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की फिल्मों को मिली तारीफें लेकिन अब क्यों मच जाता बवाल​

“कंटेंट इज़ द किंग” अब सिनेमा जगत में इस बात पर जोर दिया जाता है लेकिन वहीं कुछ फिल्मों में एक ही तरह के प्लॉट को बार बार बदल कर अलग तरह से दिखाने की कोशिश की जाती है। बिना इस बात को ध्यान में रखे कि अब दर्शकों का नजरिया इस मामले में बदल चुका है।

पुरानी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की फिल्मों को मिली तारीफें लेकिन अब क्यों मच जाता बवाल​

लेकिन कब तक कंटेंट के नाम पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को नॉर्मलाइज़ किया जाएगा। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर आधारित फिल्मों में अब दम नहीं रहा। उनमें दिखाई गई कॉमेडी अब क्रिंज और फूहड़ दिखाई पड़ती है। जिसकी वजह से लोग ऐसी फिल्मों को नापसंद कर देते है।

आज 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। जिसके बाद एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर बहस फिर से शुरू हो गई है। हालांकि फिल्म के एक्टर आयुष्मान खुराना ने अपने किरदार को ग्रीन फ्लैग बताया था लेकिन लोगों के रिस्पॉन्स मिले जुले है।

ऐसा नहीं है कि पहले इस विषय पर बनी फिल्मों को पसंद नहीं किया गया। पहले ऐसी फिल्मों में दिखाई गई चीटिंग को एक गलती बताकर अंत में माफ कर दिया जाता था। लेकिन अब कहना सही रहेगा कि दर्शक समझदार हो गए है।

पहले जहां असल जिंदगी में भी शायद चीटिंग को माफ कर दिया जाता हो या ज्यादा बड़ा न माना जाता हो लेकिन अब वो बर्दाश्त नहीं किया जाता। यही वजह कि ऐसे कंटेंट पर भी सवाल उठाए जाते है।

असल जिंदगी में बढ़ती चीटिंग

आजकल की जेनेरेशन में चीटिंग बहुत आम हो गई है। किसी को छोड़ देना या किसी के साथ रहते भी कहीं और एक रिश्ता बनाना अब कोई बड़ी बात नहीं रह गया है। हमारे देश में जहां आज भी प्यार करने के तरीके को फिल्मों से सीखा जाता है तो वहां कोई एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर बनी फिल्म से इंस्पायर नहीं होगा ये कैसे माना जाए।

पुरानी फिल्मों में चीटिंग को मिला प्यार

इस विषय पर आधारित 90’s के दौर में बनी फिल्मों में सभी एलिमेन्टों को जोड़ा जाता था। अगर फिल्म में को दिखाया जाता था तो कॉमिक टाइमिंग, प्यार, कहानी का प्लॉट, बाकी सब भी एड किया जाता था और कहानी के अंत में उस अफेयर को एक गलती का नाम दे दिया जाता था। हालांकि चीटिंग तो चीटिंग है लेकिन तब की ऑडियंस इसे कुबूल कर लेती थी। इस लिस्ट में कई फिल्में है।

मस्ती

2004 में आई मस्ती फिल्म भी इसी पर आधारित थी। जिसमें रितेश देशमुख, विवेक ऑबेरॉय, आफताब शिवदासानी शादीशुदा होने के बावजूद एक अफेयर रखते है और बाद में उनकी पत्नियां उन्हें माफ भी कर देती है।

साजन चले ससुराल

1994 की गोविंदा की ये फिल्म भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को दिखाती है। फिल्म की अच्छी कॉमेडी ने इसे पॉपुलर तो बनाया लेकिन अंत कुछ ऐसा ही रहा।

क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता

2001 में गोविंदा की इस फिल्म में चीटिंग को अमीर लोगों का शौक बताया था। रंभा ने इस फिल्म में अफेयर पार्टनर के किरदार को निभाया था। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। बाद में फिल्म में गोविंदा की पत्नी बनी सुष्मिता सेन ने उन्हें माफ कर दिया था।

यानी कि कहानी वही, प्लॉट वही, कॉमेडी भी वही लेकिन बस उसे दिखाने का तरीका बदलकर इन फिल्मों ने खूब वाह वाही बटोरी। कमाल बात है कि तब इन मुद्दों पर इतनी बहस नहीं होती थी और दर्शक इसे महज़ एक फिल्म की तरह देखकर इंजॉय करते थे।

नई फिल्मों में चीटिंग पर उठे सवाल

बदलते नजरिए और कंटेंट की पसंद व नापसंद की वजह से अब ऐसी फिल्में चर्चा का विषय बन जाती है। फीमेल सेंट्रिक फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शक ऐसे कंटेंट पर ऐतराज़ उठाते है। फीमेल सेंट्रिक फिल्मों की बढ़ती डिमांड चीटिंग पर आधारित फिल्मों को दबा देती है। अब के समय में बनी कई फिल्में है जैसे

किस किसको प्यार करूं

2015 में कपिल शर्मा की पहली फिल्म इसी विषय पर आधारित थी। फिल्म में कपिल तीन लड़कियों संग रोमांस करते नजर आए थे। लेकिन सस्ती कॉमेडी,कमजोर स्टोरी प्लॉट और वही घिसी पिटी कहानी की वजह से फिल्म को खास रिस्पान्स नहीं मिला।

इस फिल्म का दूसरा भाग 2025 में आया और इस बार उन्होंने तीन नहीं चार लड़कियों के साथ रोमांस किया था। फिल्म में इसे मजबूरी का नाम दिया गया था।

हसीन दिलरुबा

2021 में तापसी पन्नू और विक्रांत मेसी की ये फिल्म भी इसी पर आधारित थी। इसमें चीटिंग के कान्सेप्ट को जेंडर से बदल दिया गया था। यानी कि इसमें चीटिंग लड़के के साथ हुई थी।

लेकिन एक सस्पेंस थ्रिलर होने की वजह से फिल्म को ठीक ठाक रिस्पांस मिला था पर लोगों का कहना था कि चीटिंग हर हाल में गलत है चाहे लड़के के साथ हो या लड़की।

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