‘फिल्मों में दिखावे पर नहीं, काम पर खर्च हो पैसा’, पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती फिजूलखर्ची पर कमल हासन ने किया पोस्ट​

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते बजट, कलाकारों और टीम के भारीभरकम खर्चे और सिर्फ फिल्मों को बड़ा दिखाने के लिए होने वाली फिजूलखर्ची लंबे समय से बड़ी समस्याएं रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े अभिनेता और निर्माता इन मुद्दों पर चिंता जता चुके हैं। हाल ही में कमल हासन ने भी इंडस्ट्री से अपील की कि फिल्म निर्माण को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक और टिकाऊ तरीके अपनाए जाएं।

‘फिल्मों में दिखावे पर नहीं, काम पर खर्च हो पैसा’, पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ती फिजूलखर्ची पर कमल हासन ने किया पोस्ट​

कमल हासन ने की इंडस्ट्री से अपील

शुक्रवार को कमल हासन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक लेटर शेयर किया और इसे शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “हमारी इंडस्ट्री से मेरी अपील।” अभिनेता ने उस लेटर पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का जिक्र किया, जो फरवरी के आसपास ईरान और अमेरिकाइजरायल समर्थित सेनाओं के बीच सैन्य टकराव के कारण और बढ़ गया है। अभिनेतानिर्देशक ने कहा कि इसका आर्थिक असर भारत पर भी पड़ सकता है।

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उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में लोगों की खरीदारी और खर्च करने की आदतों में बदलाव होगा, जिसका असर फिल्म इंडस्ट्री पर भी दिखाई दे सकता है। हासन ने लिखा, “पश्चिम एशिया में जारी संकट लगातार गहराता जा रहा है। इससे दुनिया भर में ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और आर्थिक स्थिरता पर दबाव बढ़ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। ईंधन, बिजली, लॉजिस्टिक्स और प्रोडक्शन की लागत लगातार बढ़ रही है।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी यह चिंता की बात है, क्योंकि पहले से ही फिल्मों का बजट बढ़ता जा रहा है और बाजार अभी पूरी तरह संभला नहीं है। बढ़ती लागत का असर सिर्फ फिल्म निर्माण पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि महंगाई के कारण आने वाले महीनों में लोगों के मनोरंजन पर खर्च करने के तरीके भी बदल सकते हैं।”

फिल्मों में दिखावे पर नहीं, काम पर खर्च हो पैसा: कमल हासन

साउथ अभिनेता ने इस बात पर भी जोर दिया कि बढ़ती लागत का बोझ इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा मेहनत करने वाले लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “इसका असर निर्माता, मजदूर, थिएटर मालिक, डिस्ट्रीब्यूटर, फाइनेंसर और पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ेगा। अगर सिनेमा को आगे बढ़ाना है, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि खर्च किया गया हर रुपया फिल्म को बेहतर बनाने में लगे, सिर्फ दिखावे के लिए नहीं।

मैं साफ कहना चाहता हूं कि फिल्म इंडस्ट्री की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कभी भी मजदूरों की सैलरी, सुरक्षा, सम्मान, खाना, यात्रा, रहने की सुविधा या इंसानियत भरे कामकाजी माहौल से समझौता नहीं होना चाहिए। सबसे ज्यादा मेहनत करने वाले लोगों पर इसका बोझ नहीं डाला जा सकता।”

प्यार दिखाने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करना जरूरी नहीं

अभिनेता ने अपने नोट में आगे लिखा, “हमें सुधार वहां करने की जरूरत है जहां बेवजह पैसा बर्बाद होता है जैसे खराब प्लानिंग, जरूरत से ज्यादा लोगों का साथ घूमना , बिना जरूरत विदेश यात्राएं, प्रोडक्शन में देरी और खर्च व असली जरूरत के बीच बढ़ता अंतर।

हर प्रेम कहानी को सिर्फ पेरिस में ही क्यों दिखाना जरूरी है और हर हनीमून का अंत स्विट्जरलैंड में ही क्यों हो? प्यार दिखाने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करना जरूरी नहीं है। भारतीय सिनेमा और भारतीयों को अपने देश और उसकी खूबसूरती पर थोड़ा ज्यादा भरोसा होना चाहिए।”

लास्ट में अभिनेता ने लिखा, “मेरा मानना है कि यह सही समय है जब भारतीय सिनेमा से जुड़े सभी लोग साथ बैठकर चर्चा करें। निर्माता, अभिनेता, निर्देशक, यूनियन, स्टूडियो, थिएटर मालिक, डिस्ट्रीब्यूटर, ओटीटी प्लेटफॉर्म और फिल्म संगठनों को मिलकर आने वाली आर्थिक चुनौतियों का सामना करने का रास्ता निकालना चाहिए।

हमें बेहतर शूटिंग अनुशासन अपनाना होगा, समय पर काम पूरा करना होगा, लग्जरी और बड़े एंटूराज खर्च कम करने होंगे, जहां संभव हो वहां विदेश यात्राओं से बचना होगा, सेट और स्टूडियो में ऊर्जा बचानी होगी और सेट निर्माण में सामान का दोबारा इस्तेमाल बढ़ाना होगा। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। अक्सर फिजूलखर्ची को ही बड़े स्तर की फिल्म समझ लिया जाता है।

जबकि हमारी कई बेहतरीन फिल्में जरूरत से ज्यादा खर्च से नहीं, बल्कि साफ सोच, अनुशासन और मजबूत इरादों से बनी हैं। अगर हम आज सिनेमा की आर्थिक व्यवस्था को सुरक्षित रखेंगे, तो कल सिनेमा का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।”

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