Gold Loan in India: किसी ने सोचा भी नहीं था कि साल 2025 में सोना चढ़कर इस लेवल पर पहुंच जाएगा. तेजी का आलम 2026 में भी जारी रहा और जनवरी के महीने में यह चढ़कर 1.92 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गया. इसके महंगे होने के साथ ही लोगों के बीच गोल्ड लोन लेने का भी चलन बढ़ा है. जब घर में पैसों की तंगी हो या कोई इमरजेंसी, तो भारतीय परिवारों के पास घर में रखे सोने की ज्वैलरी होती है. इलाज का खर्च हो, बिजनेस एक्सपेंड करने की जरूरत हो या फीस भरनी की बात हो…भारतीयों का भरोसा गोल्ड लोन की तरफ बढ़ रहा है. हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है. यह ट्रेंड पिछले एक साल के दौरान तेजी से मजबूत हुआ है.

एक रिपोर्ट के अनुसार सोने की आसमान छूती कीमत ओर सिक्योर लोन की बढ़ती डिमांड के कारण FY 2026 में गोल्ड लोन देश के रिटेल क्रेडिट मार्केट में सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बनकर उभरा है. रिपोर्ट के अनुसार FY 2026 की चौथी तिमाही में गोल्ड लोन की रफ्तार सबसे शानदार रही है. सालाना बेस पर गोल्ड लोन के पोर्टफोलियो में 50.4 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके बाद गोल्ड लोन का मार्केट बढ़कर 18.6 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया. बैंकिंग जानकारों का मानना है कि रिकॉर्ड उछाल की सबसे बड़ी वजह इंटरनेशनल मार्केट में सोने के दाम में लगातार होने वाली बढ़ोतरी है.
गहनों के बदले पहले से ज्यादा पैसा मिल रहा
सोने की कीमत बढ़ने की वजह से अब ग्राहकों को अपने पुराने गहनों के बदले पहले से ज्यादा लोन मिल रहा है. दूसरी तरफ, बैंकों और एनबीएफसी के लिए भी गोल्ड लोन सबसे सेफ माना जाता है. दरअसल, इसके पीछे ग्राहक का कीमती एसेट बैंक के पास सिक्योरिटी के तौर पर जमा रहता है. सबसे अच्छी बात यह है कि लोन की डिमांड बढ़ने के बावजूद लोग समय पर अपनी किस्त चुका रहे हैं.
तेजी से क्यों बढ़ रहा गोल्ड लोन का ग्राफ
पर्सनल लोन या होम लोन की तरह गोल्ड लोन लेने के लिए कस्टमर को लंबी कागजी कार्रवाई से नहीं गुजरना पड़ता. इसमें बहुत कड़े इनकम प्रूफ की भी जरूरत नहीं होती और न ही सिबिल स्कोर की सख्ती दिखाई जाती. भारतीय परिवारों के लिए सोना हमेशा से एक एसेट के रूप में रहा है. लोग अपने गहनों को बेचने के बजाय, अस्थायी तौर पर उन्हें बैंक के पास गिरवी रखकर अपनी जरूरत पूरी कर लेते हैं. रिपोर्ट बताती है कि FY 2026 में अनुकूल मार्केट स्थितियों और सोने की बढ़ी हुई वैल्यू के कारण बड़े लोन अमाउंट का ट्रेंड बढ़ा है. पहले के मुकाबले हर लोन में मिलने वाली रकम का औसत साइज भी पहले से काफी बड़ा हो गया है.
170 लाख करोड़ के पार पहुंचा रिटेल लोन
देश में गोल्ड लोन ही नहीं, बल्कि कुल रिटेल लोन मार्केट में भी जबरदस्त तेजी देखी जा रही है. मार्च 2026 तक देश का कुल रिटेल लेंडिंग पोर्टफोलियो पिछले साल के मुकाबले 16.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 170.2 लाख करोड़ पर पहुंच गया. इसमें रोजमर्रा के उपभोग और जरूरतों के लिए लिये जाने वाले कंजम्पशन लोन में 15.3 प्रतिशत की एनुअल ग्रोथ हुई है, जो अब 118.6 लाख करोड़ हो गया है. इस ग्रोथ को पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंस और गोल्ड लोन से सबसे ज्यादा सपोर्ट मिला है. घरों की डिमांड बढ़ने से होम लोन का मार्केट भी बढ़कर 44.4 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.
लोन मार्केट में ‘प्रीमियमाइजेशन’ का दौर
रिपोर्ट ने भारतीय ग्राहकों के बिहेवियर में आ रहे दिलचस्प बदलाव की ओर इशारा किया है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, जितने नए लोग लोन के लिए अकाउंट खुलवा रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा तेजी से लोन की कुल रकम बढ़ रही है. इसे बैंकिंग सेक्टर में ‘प्रीमियमाइजेशन’ कहा जाता है. इसका सीधा सा मतलब हुआ कि अब लोग छोटी रकम के बजाय बड़ी रकम का लोन लेने को तवज्जो दे रहे हैं. यह बदलाव केवल गोल्ड लोन में ही नहीं, बल्कि होम लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंस में भी साफ देखा जा रहा है.
तेजी से लोन बढ़ने के बाद भी नहीं डूबा बैंकों का पैसा
आमतौर पर जब लोन मार्केट तेजी से बढ़ता है तो बैंकों का पैसा डूबने या किस्तें लेट होने का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन भारतीय बाजार ने सबको हैरान कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार देश में लोन की डिमांड बढ़ने के बावजूद लोन की किस्तें चुकाने में होने वाली देरी के मामलों में कमी आई है. होम लोन, गोल्ड लोन, पर्सनल लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन समेत सभी प्रमुख कैटेगरीज में लोन की क्वालिटी बेहतर हुई है. इससे यह साफ होता है कि भारतीय ग्राहक न केवल जरूरत के समय खुलकर लोन ले रहे हैं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए समय पर रीपेमेंट भी कर रहे हैं.





