जोड़ों के दर्द में रोज खा रहे हैं पेन किलर? डॉक्टरों ने दी चेतावनी, पेट, किडनी और दिल पर हो सकता है असर​

जोड़ों के दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के रोजाना पेन किलर दवाएं खाने लगते हैं। हालांकि, शॉर्टटर्म में आराम देने वाली यह दवा लंबे समय में आपके शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक पेन किलर्स का ओवरडोज लेने से पेट में अल्सर, किडनी की कार्यक्षमता में कमी और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

जोड़ों के दर्द में रोज खा रहे हैं पेन किलर? डॉक्टरों ने दी चेतावनी, पेट, किडनी और दिल पर हो सकता है असर​

यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स के मस्कुलोस्केलेटल पोस्ट ग्रेजुएट लेक्चरर Anthony Paul Smith ने जानकारी साझा कर बताया है कि जोड़ों के दर्द और गठिया से परेशान लोग अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के पेन किलर दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि यह दवा दर्द और सूजन से अस्थायी राहत दिला सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसका सेवन कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इससे पेट में जलन, अल्सर, आंतरिक रक्तस्राव, किडनी को नुकसान, हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी जमा होना, दिल से जुड़ी जटिलताएं और कुछ अस्थमा मरीजों में सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

पेन किलर कैसे काम करती है?

पेन किलर नॉनस्टेरॉयडल एंटीइंफ्लेमेटरी ड्रग्स नामक दवाओं के समूह में शामिल है। यह शरीर में सूजन, दर्द और सूजन से जुड़े रसायनों को कम करके काम करती है। गठिया या जोड़ों के दर्द के दौरान यह अस्थायी रूप से दर्द और अकड़न कम कर सकती है, जिससे चलनेफिरने में आसानी होती है। हालांकि, यह दवा केवल लक्षणों को कम करती है। यह गठिया की असली समस्या जैसे कार्टिलेज का घिसना, हड्डियों में बदलाव या जोड़ों की अंदरूनी सूजन को ठीक नहीं करती।

लंबे समय तक सेवन क्यों बन सकता है खतरनाक?

कई लोग मानते हैं कि बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाली दवा सुरक्षित होती है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक Ibuprofen  लेने से पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंच सकता है। इसके कारण पेट में दर्द, अपच, अल्सर और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव तक हो सकता है। खासतौर पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, अधिक मात्रा में दवा लेने वालों और कई सप्ताह या महीनों तक लगातार सेवन करने वालों में यह खतरा बढ़ जाता है।

किडनी और दिल पर पड़ सकता है बुरा असर

Ibuprofen  किडनी तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। किडनी को सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त रक्त की आवश्यकता होती है। यदि कोई व्यक्ति डिहाइड्रेशन का शिकार है या पहले से किडनी अथवा हृदय रोग से पीड़ित है, तो लंबे समय तक Ibuprofen  लेने से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और स्थिति और गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक NSAIDs का उपयोग कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ा सकता है। इसके अलावा शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। कई रिसर्च में इस दवा के लम्बे समय तक इस्तेमाल करने के दिल के लिए साइड इफेक्ट बताए गए हैं।

अस्थमा मरीजों को क्यों रहना चाहिए सावधान?

कुछ अस्थमा मरीज NSAIDs के प्रति संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों में Ibuprofen  लेने के बाद सांस फूलना, घरघराहट या सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, यह दवा शरीर के उन प्राकृतिक रसायनों को प्रभावित करती है जो श्वसन मार्ग को खुला रखने में मदद करते हैं।

दूसरी दवाओं के साथ कर सकती है रिएक्शन

बुजुर्ग मरीज अक्सर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिप्रेशन या खून पतला करने वाली दवाएं भी लेते हैं। ऐसे में Ibuprofen इन दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकती है। इसके साइड इफेक्ट का खतरा बढ़ सकता है या अन्य दवाओं का असर कम हो सकता है।

जोड़ों के दर्द के लिए क्या हैं बेहतर विकल्प?

  1. एक्सपर्ट के मुताबिक जोड़ों के दर्द का अगर आप बेहतर इलाज करना चाहते हैं तो आप सिर्फ दवाओं पर निर्भर नहीं रहे। आप रेगुलर बॉडी को एक्टिव रखें। नियमित व्यायाम करें। वॉकिंग, साइकिलिंग, तैराकी और मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज जोड़ों पर दबाव कम करने और दर्द घटाने में मदद कर सकती हैं।
  2. जोड़ों के दर्द से राहत पाना चाहते हैं तो आप अपना वजन कंट्रोल करें। घुटनों और कूल्हों के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए वजन कम करना बेहद फायदेमंद हो सकता है। इससे जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।
  3. दवा से ज्यादा जरूरी फिजियोथेरेपी है। फिजियोथेरेपी कराने से जोड़ों में ताकत, लचीलापन और गतिशीलता बढ़ाने में मदद मिलती है। फिजियोथेरेपी कराने से जोड़ों का दर्द और स्टिफनेस कंट्रोल होती है। ये दर्द का इलाज करने का सुरक्षित तरीका है।
  4. गर्म सिकाई और सपोर्टिव फुटवियर का इस्तेमाल करें। गर्म सिकाई मांसपेशियों को आराम देने और अकड़न कम करने में मदद कर सकती है। वहीं सही जूते पहनने से भी जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है।
  5. जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए आप दर्द को कंट्रोल करने वाले जेल का इस्तेमाल करें। स्किन पर लगाने वाले एंटीइंफ्लेमेटरी जेल कई लोगों में राहत दे सकते हैं और इनके साइड इफेक्ट टेबलेट की तुलना में कम हो सकते हैं।
  6.  जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए दवाओं के साथसाथ व्यायाम, वजन नियंत्रण, फिजियोथेरेपी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। आईबुप्रोफेन जोड़ों के दर्द में अल्पकालिक राहत देने वाली प्रभावी दवा हो सकती है, लेकिन इसे लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के लेना जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी दवा का नियमित या लंबे समय तक सेवन करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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