जापान ने पाकिस्तान की ऐसी धज्जियां उड़ा दी है जिसके बाद 25 करोड़ पाकिस्तानी इस वक्त अपना सिर पीट रहे हैं। पाकिस्तानी समुदाय द्वारा बनाई गई एक मस्जिद पर जापान ने अब एक ऐसा फैसला सुना दिया है जिसके बाद पाकिस्तान को लोग सिर्फ एक ही सलाह दे रहे हैं। अगर इतनी बेइज्जती हो तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना ही सही है। सबसे मजेदार बात तो यह है कि जिस मस्जिद का उद्घाटन पाकिस्तान के राजदूत ने बड़े गर्व के साथ किया था उसी मस्जिद को अब किसी भी वक्त जापान में गिराया जा सकता है। यानी पहले फीता काटा गया। फोटो खिंचवाई गई, खूब ढोंग किया गया, जश्न मनाया गया और बड़ीबड़ी ढींगे हाकी गई। लेकिन जब जांच हुई तो ऐसा खुलासा सामने आया जिसके बाद अब पूरा पाकिस्तान सफाई देता फिर रहा है। इतना ही नहीं आपको यह भी बता दें कि मामला सामने आते ही पाकिस्तान का दूतावास भी इस मस्जिद से खुद को किनारा करते हुए दिखाई दे रहा है। लेकिन कहानी सिर्फ एक मस्जिद के बनने की या उस पर कारवाही की नहीं है।

बता दें कि जापान में मस्जिद को लेकर विवाद का यह मामला पहला नहीं है। इसके पहले भी मस्जिद निर्माण को लेकर हजारों जापानी नागरिक सड़कों पर उतर चुके हैं और बड़े पैमाने पर इन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया था। दरअसल बता दें कि मामला जापान के सेतामा प्रांत के कावोई शहर का है। यही पाकिस्तानी समुदाय की तरफ से एक यहां पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। इसी इलाके में 3 अप्रैल 2026 को इसका उद्घाटन भी बहुत जोर शोर से किया गया और उद्घाटन समारोह में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद भी शामिल हुए थे। उन्होंने फीता काटा था। उस समय सब कुछ सामान्य दिख रहा था। पाकिस्तान ने बड़े गर्व से इसे दिखाया। लेकिन कुछ ही समय बाद स्थाई प्रशासन की जांच में ऐसा कुछ खुलासा सामने आया जिसने पूरे मामले को विवादों में ला दिया। काबगोई सिटी हॉल ने यह पाया कि जिस जमीन पर यह पाकिस्तानी मस्जिद बनाई गई है वो अर्बन डेवलपमेंट कंट्रोल एरिया के अंतर्गत आती है और यह मस्जिद अवैध है। यानी ऐसा क्षेत्र जहां विशेष सरकारी अनुमति के बिना निर्माण कार्य बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता। प्रशासन का यह आरोप है कि निर्माण के लिए जरूरी परमिशन नहीं ली गई थी और सिटी हॉल ने अपने आधिकारिक बयान में यह साफ कहा है कि यह निर्माण नगर नियोजन कानून के तहत आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना ही ले लिया गया और इसे बना दिया गया। इतना ही नहीं प्रशासन का यह भी कहना है कि संबंधित लोगों को लंबे समय तक नियमों और कानूनी प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। लेकिन उसके बावजूद भी नियमों का पालन नहीं किया गया। इस मस्जिद को बनाने के लिए। अब स्थाई स्तर पर इस मस्जिद को गिराने की मांग लगातार उठ रही है और प्रशासन उस मांग की समीक्षा भी कर रहा है। यानी जिस इमारत का उद्घाटन कुछ सप्ताह पहले हुआ था वही अब ध्वस्तकरण के खतरे का सामना कर रही है। लेकिन पाकिस्तान की मुश्किल आपको बता दें कि यहीं खत्म नहीं हुई। जैसे ही यह विवाद बढ़ा जापान से टोक्यो स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने खुद को इस पूरे प्रोजेक्ट से अलग ही कर दिया और यह पाकिस्तान की फितरत है। पाकिस्तानी दूतावास ने बयान जारी करते हुए यह कहा कि जापानी कानूनों का उल्लंघन करने वाली किसी भी परियोजना से उसका कोई भी संबंध नहीं है। साथ ही जापान में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय से यह अपील भी की गई कि वो धार्मिक स्थलों के निर्माण समेत हर मामले में जापानी कानूनों का पूरी तरह से पालन करें। यानी कि दोहरा चरित्र दूतावास को यह तक सफाई देनी पड़ी कि राजदूत अब्दुल हमीद उद्घाटन समारोह में इसलिए शामिल हुए क्योंकि उन्हें यह बताया गया था कि सभी जरूरी कानूनी मंजूरियां पहले ही ली जा चुकी है।
उद्घाटन के समय जो जानकारी दी गई थी बाद में वो सवालों के घेरे में आ गए। वैसे आपको बता दें कि जापान में मस्जिद को लेकर विवाद का यह मामला पहला नहीं है और नया नहीं था। कुछ समय पहले फूजी सावा शहर में भी एक विशाल मस्जिद के निर्माण को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे। हजारों स्थाई नागरिक उस समय आपको बता दें कि सड़कों पर उतर आए थे क्योंकि प्रस्तावित मस्जिद एक प्राचीन शिंो मंदिर के बेहद करीब बनाई जा रही थी। स्थाई लोगों का यह कहना था कि यह उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को प्रभावित करेगी। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। खतरे में लाकर रख देगी। यानी जापान में मस्जिद निर्माण का मुद्दा पहले भी बहस और विवाद का कारण बन रहा है। अब कावागोई का यह नया मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है और यह बता दिया है कि जापान में नियम का पालन करना होगा। फिलहाल अंतिम फैसला जापान से आना बाकी है। लेकिन इतना पूरा मामले को देखकर यह तय है कि जिस मस्जिद को पाकिस्तान अपनी उपलब्धि की तरह देख रहा था वही अब उसके लिए अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगीगी का कारण बन गई है। और जापान ने एक बार फिर से यह दिखा दिया है कि उसके यहां किसी की पहचान नहीं। सिर्फ कानून चलता है और जापान के जो रूल्स हैं वो बिल्कुल साफ है कि आपकी जो भी धार्मिक आस्था है उसको ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी। लेकिन जो जापान की संस्कृति है जो जापान में जो चलता है और जापान के जो कानून है उनका पालन आपको करना पड़ेगा।





