लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कैंट स्थित सूर्य ऑडिटोरियम में आज “बाढ़ एवं बाढ़ संबंधी आपदा प्रबंधन संगोष्ठी” का भव्य आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में देश भर के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, आपदा प्रबंधन पेशेवरों, शिक्षाविदों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण, अत्याधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणाली , सामुदायिक सहभागिता और जलवायु अनुकूल आपदा प्रबंधन जैसे बेहद संवेदनशील और जरूरी विषयों पर गंभीर विचारविमर्श किया गया।

इस संगोष्ठी में विशेष रूप से बिहार का आपदा प्रबंधन मॉडल चर्चा का मुख्य केंद्र रहा। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा विकसित की गई तकनीक आधारित पूर्व चेतावनी तंत्र, सामुदायिक जागरूकता अभियान, क्षमता निर्माण और राहत एवं पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्थाओं की विशेषज्ञों ने जमकर सराहना की। संगोष्ठी में यह बात उभरकर सामने आई कि बिहार ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जो कार्य किए हैं, उसने देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय और बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है।
डॉ. उदय कान्त मिश्र के नेतृत्व की सराहना
बिहार में आए इस सकारात्मक बदलाव और उल्लेखनीय उपलब्धियों के पीछे बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कान्त मिश्र के नेतृत्व और मार्गदर्शन को मुख्य वजह बताया गया। डॉ. उदय कान्त मिश्र के निर्देशन में बिहार ने बाढ़ प्रबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जनकेंद्रित आपदा तैयारी के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। उनका मानना है कि आपदा प्रबंधन केवल आपदा के बाद किया जाने वाला राहत कार्य नहीं है, बल्कि यह समाज को सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की एक सतत प्रक्रिया है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। संगोष्ठी में सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकाला गया कि बाढ़ जैसी बड़ी चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है; इसके लिए आधुनिक तकनीक, कुशल प्रशासन, विशेषज्ञों की राय और व्यापक जनभागीदारी का समन्वय बेहद जरूरी है। एक सुरक्षित और आपदाप्रतिरोधी समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास ही सबसे बड़ा साधन है।





