स्क्रैप कारोबारी को राहत, 44 लाख रुपये की टैक्स मांग पर ITAT ने पल्टा फैसला​

पुणे स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने एक स्क्रैप कारोबारी को बड़ी राहत दी है. आयकर विभाग ने उसके बैंक खाते में जमा 1.28 करोड़ रुपये को अघोषित आय मानते हुए करीब 44 लाख रुपये का टैक्स नोटिस जारी कर दिया था. अब ITAT ने मामले को दोबारा जांच के लिए भेज दिया है.

स्क्रैप कारोबारी को राहत, 44 लाख रुपये की टैक्स मांग पर ITAT ने पल्टा फैसला​

क्या था मामला?

यह मामला स्क्रैप व्यापारी वजीद खान से जुड़ा है, जो पिछले कई वर्षों से इस कारोबार में हैं. वित्त वर्ष 201516 के दौरान उनके सहकारी बैंक खाते में 1.28 करोड़ रुपये नकद जमा हुए थे.

वजीद खान ने अपने आयकर रिटर्न में केवल 3,00,340 रुपये की आय घोषित की थी. लेकिन आयकर विभाग के इनसाइट पोर्टल ने खाते में जमा बड़ी नकद राशि को चिन्हित कर लिया, जिसके बाद विभाग ने मामले की दोबारा जांच शुरू की.

व्यापारी ने क्या सफाई दी?

वजीद खान का कहना था कि बैंक खाते में जमा पैसा उनके स्क्रैप कारोबार की बिक्री से आया था. उन्होंने बताया कि इस कारोबार में नकद लेनदेन आम बात है और उनकी आय पर 8% अनुमानित लाभ के आधार पर टैक्स लगाया जाना चाहिए.

हालांकि, वह अपने दावों के समर्थन में सभी लेनदेन के रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाए. उनका कहना था कि कंप्यूटर में वायरस आने से हार्ड डिस्क खराब हो गई और जरूरी डेटा नष्ट हो गया.

क्यों लगाया 44 लाख रुपये का टैक्स?

आयकर अधिकारी उनकी दलील से संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने पूरे 1.28 करोड़ रुपये को आयकर अधिनियम की धारा 69A के तहत अज्ञात स्रोत से प्राप्त धन मान लिया. इसके बाद धारा 115BBE के तहत इस राशि पर टैक्स लगाया गया, जिससे करीब 44 लाख रुपये की कर मांग बन गई. आयकर आयुक्त ने भी विभाग के फैसले को सही ठहराया.

ITAT ने कैसे दी राहत?

ITAT में सुनवाई के दौरान वजीद खान ने पिछले और अगले वर्षों के आयकर रिकॉर्ड पेश किए. इन रिकॉर्ड्स में आयकर विभाग ने उनके स्क्रैप कारोबार और 8% लाभ मॉडल को स्वीकार किया हुआ था. ट्रिब्यूनल ने “संगतता के सिद्धांत” का हवाला देते हुए कहा कि यदि विभाग ने अन्य वर्षों में एक व्यवस्था को स्वीकार किया है, तो बिना किसी बड़े बदलाव के किसी एक साल में अलग रुख नहीं अपनाया जा सकता.

छोटे कारोबारियों के लिए सबक

कर विशेषज्ञों का कहना है कि नकद लेनदेन वाले कारोबारियों को बिक्री रजिस्टर, कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट, GST रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए. इससे भविष्य में ऐसे टैक्स विवादों से बचा जा सकता है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। साथ ही, यह फैसला बताता है कि अगर किसी करदाता का रिकॉर्ड कई वर्षों से एक जैसा रहा है, तो वह भी उसके पक्ष में मजबूत सबूत बन सकता है.

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