शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक दिवंगत राकेश झुनझुनवाला की पत्नी रेखा झुनझुनवाला का नाम देश के सबसे बड़े निवेशकों में शामिल है. मार्च 2026 तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक उनका सार्वजनिक पोर्टफोलियो करीब 48,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें 27 कंपनियां शामिल हैं. Titan, Tata Motors और Star Health जैसी बड़ी कंपनियों के अलावा उन्होंने फार्मा सेक्टर में भी मजबूत दांव लगाया हुआ है. खास बात यह है कि फार्मा सेक्टर की दो कंपनियों Jubilant Pharmova और Wockhardt में उनका कुल निवेश करीब 1,550 करोड़ रुपये है.

रेखा झुनझुनवाला की फार्मा सेक्टर में सबसे बड़ी हिस्सेदारी Jubilant Pharmova में है. मार्च 2026 तिमाही के अनुसार कंपनी में उनकी 6.4% हिस्सेदारी है, जिसकी मौजूदा वैल्यू करीब 999 करोड़ रुपये है. उनके पास कंपनी के लगभग 1.02 करोड़ शेयर हैं. जुबिलेंट फार्मोवा एक इंटीग्रेटेड फार्मा कंपनी है, जो रेडियोफार्मास्यूटिकल्स, कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च सेवाओं के कारोबार में मौजूद है. कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसका रेडियोफार्मास्यूटिकल्स बिजनेस माना जाता है. यह हार्ट और कैंसर स्कैन में इस्तेमाल होने वाले विशेष रेडियोधर्मी पदार्थों का निर्माण और सप्लाई करती है.
करीब 15,471 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली यह कंपनी अमेरिका में तीसरी सबसे बड़ी रेडियोफार्मास्यूटिकल निर्माता है. इसके अलावा कंपनी वहां 46 साइट्स के साथ दूसरा सबसे बड़ा रेडियोफार्मेसी नेटवर्क भी संचालित करती है. इस कारोबार में नई कंपनियों के लिए प्रवेश आसान नहीं होता, क्योंकि उत्पादों का निर्माण और सप्लाई बेहद तेजी से करनी पड़ती है. यही वजह है कि इस बिजनेस में प्रतिस्पर्धा सीमित रहती है. रेखा झुनझुनवाला सितंबर 2021 से कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बनाए हुए हैं. पिछले करीब पांच वर्षों में उन्होंने इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है. इससे साफ संकेत मिलता है कि यह निवेश किसी शॉर्ट टर्म ट्रेड की बजाय लंबी अवधि के भरोसे पर आधारित है.
कारोबार में चुनौतियों के बावजूद निवेश बरकरार
हालांकि Jubilant Pharmova का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेज नहीं रहा है. कंपनी की बिक्री में पिछले पांच साल के दौरान औसतन करीब 6% सालाना वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं, ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर दबाव बना रहा है. पुरानी जेनेरिक दवाओं के कारोबार में मार्जिन घटने का असर कंपनी के नतीजों पर दिखा है. FY21 में कंपनी का EBITDA 1,403 करोड़ रुपये था, जो FY26 में घटकर करीब 1,260 करोड़ रुपये रह गया. FY23 में कंपनी को नुकसान भी उठाना पड़ा था. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। हालांकि बाद में कुछ सुधार दिखाई दिया, लेकिन FY26 में मुनाफे में फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इसके बावजूद रेखा झुनझुनवाला ने अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखी हुई है.
Wockhardt में लगाया हाईरिस्क दांव
फार्मा सेक्टर में रेखा झुनझुनवाला की दूसरी बड़ी पसंद Wockhardt है. कंपनी में उनकी 1.8% हिस्सेदारी है, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 558 करोड़ रुपये है. उनके पास लगभग 28.37 लाख शेयर हैं. Wockhardt को लंबे समय तक भारी कर्ज, अमेरिकी नियामक USFDA की पाबंदियों और लगातार घाटे जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था. यही वजह थी कि यह कंपनी निवेशकों के लिए जोखिम भरी मानी जाती थी. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कंपनी की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है.
करीब 31,965 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली Wockhardt आज ब्रिटेन की शीर्ष तीन भारतीय जेनेरिक दवा कंपनियों में शामिल है. आयरलैंड के रिटेल और हॉस्पिटल चैनल में भी यह छठी सबसे बड़ी जेनेरिक दवा सप्लायर है. भारत में कंपनी का Methycobalamin ब्रांड अपने सेगमेंट में अग्रणी माना जाता है.
घाटे से मुनाफे की राह पर लौटी कंपनी
पिछले पांच वर्षों में Wockhardt की बिक्री में औसतन करीब 5% की वृद्धि हुई है, लेकिन कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि मुनाफे में सुधार रही है. FY21 में जहां कंपनी ऑपरेटिंग स्तर पर घाटे में थी, वहीं FY26 में उसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट बढ़कर 652 करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछली दो तिमाहियों में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 20% से ऊपर रहा है. इसके अलावा चार साल तक लगातार घाटे में रहने के बाद कंपनी ने FY26 में 199 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है. कंपनी ने अपने कर्ज को भी काफी हद तक कम किया है. FY17 में करीब 4,160 करोड़ रुपये का कर्ज FY26 में घटकर 2,233 करोड़ रुपये के आसपास रह गया. हालांकि बैलेंस शीट पूरी तरह मजबूत नहीं कही जा सकती, लेकिन स्थिति पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है.
Jubilant Pharmova और Wockhardt में कुल मिलाकर करीब 1,550 करोड़ रुपये का निवेश दिखाता है कि रेखा झुनझुनवाला फार्मा सेक्टर में लंबी अवधि के अवसरों पर भरोसा रखती हैं. एक ओर उन्होंने मजबूत और स्थिर बिजनेस मॉडल वाली कंपनी चुनी है, तो दूसरी ओर सुधार की राह पर चल रही हाईरिस्क कंपनी में भी दांव लगाया है. यही रणनीति उनके पोर्टफोलियो को बाकी निवेशकों से अलग बनाती है.





