मुंबई में रहने वाले एक इन्वेस्टमेंट बैंकर की मासिक खर्चों की विस्तृत जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. इस पोस्ट ने देश के सबसे महंगे शहरों में से एक मुंबई में रहने की असली लागत पर नई बहस छेड़ दी है. वर्ली जैसे पॉश इलाके में रहने वाले इस पेशेवर ने बताया कि उनके हर महीने के बुनियादी खर्च करीब 1.3 लाख रुपये हैं, और इसमें छुट्टियों का खर्च भी शामिल नहीं है. यह पोस्ट खासकर इन्वेस्टमेंट बैंकिंग जैसे चुनौतीपूर्ण और लंबे काम के घंटों वाले क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवरों के बीच चर्चा का विषय बन गई है.

हर महीने 1.3 लाख रुपये का बजट
सोशल मीडिया पर अपनी खर्चों की जानकारी साझा करते हुए बैंकर ने बताया कि सबसे बड़ा खर्च किराया है. वह हर महीने 60,000 रुपये किराया देते हैं. उन्होंने लिखा, मैं ऑफिस से सिर्फ 5 मिनट की दूरी पर रहता हूं. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में आपका समय ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है. इसलिए मैं आनेजाने के समय पर समझौता नहीं करता. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि ऑफिस के पास रहना कोई लग्जरी नहीं, बल्कि लंबे कामकाजी घंटों के बीच समय बचाने की जरूरत है.
घरेलू मदद क्यों है जरूरी?
इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में अक्सर 80 घंटे या उससे ज्यादा का साप्ताहिक काम करना पड़ता है. ऐसे में घर के कामों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है. बैंकर हर महीने करीब 5,000 रुपये घरेलू मदद पर खर्च करते हैं. उन्होंने कहा, मेरे पास जो दो घंटे खाली मिलते हैं, उन्हें मैं खाना बनाने में नहीं लगाना चाहता. उनकी यह बात बड़े शहरों में काम करने वाले कई पेशेवरों को काफी वास्तविक लगी.
सुविधा की कीमत भी चुकानी पड़ती है
बैंकर के पास अपनी कार नहीं है. वह टैक्सी और कैब सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, जिस पर हर महीने करीब 10,000 रुपये खर्च होते हैं. उनका मानना है कि इससे पार्किंग और ट्रैफिक जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है और सुविधा भी बनी रहती है.
देर रात तक काम, इसलिए खाना बाहर से
लंबे ऑफिस घंटों के कारण वह रात का खाना अक्सर बाहर से मंगाते हैं. इस पर उनका करीब 15,000 रुपये प्रति माह खर्च होता है. उन्होंने बताया कि वह अक्सर रात 11 बजे के बाद घर पहुंचते हैं, इसलिए खाना ऑर्डर करना ही सबसे आसान विकल्प है.
बिजली, किराना और परिवार से मिलने का खर्च
किराया और खाने के अलावा वह हर महीने करीब 12,000 रुपये किराना और बिजली पर खर्च करते हैं. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, मुंबई का बिजली बिल आपको जमीन पर ले आता है. इसके अलावा 10,000 रुपये दोस्तों के साथ मिलनेजुलने और सामाजिक गतिविधियों पर खर्च होते हैं. परिवार से मिलने के लिए दिल्ली आनेजाने की फ्लाइट्स पर भी हर महीने लगभग 12,000 रुपये खर्च होते हैं. इन सभी खर्चों को जोड़ने पर उनका मासिक बजट करीब 1.3 लाख रुपये पहुंच जाता है.
फिर भी छुट्टियों का खर्च शामिल नहीं
पोस्ट की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इस पूरे बजट में एक भी छुट्टी या घूमनेफिरने का खर्च शामिल नहीं है. बैंकर ने लिखा, कुल खर्च 1.30 लाख रुपये प्रति माह, और इसमें एक भी वेकेशन नहीं है.
‘मुंबई कमाई वापस ले लेती है’
पोस्ट के अंत में उन्होंने मुंबई और दिल्ली की तुलना करते हुए कहा कि समान जीवनशैली के लिए मुंबई में रहना दिल्ली के मुकाबले लगभग 1.5 गुना महंगा है. उन्होंने लिखा, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग अच्छी सैलरी देती है, लेकिन मुंबई चुपचाप वह पैसा वापस ले लेती है. यह पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है और लोगों के बीच इस बात पर चर्चा छिड़ गई है कि ऊंची सैलरी के बावजूद बड़े शहरों में रहने की लागत कितनी तेजी से आय का बड़ा हिस्सा खा जाती है.





