पश्चिम बंगाल: सिक्किम से सिलीगुड़ी जा रहा परिवार तीस्ता नदी में समाया, एक ही परिवार के 4 लोगों का खौफनाक अंत…​

सिक्किम और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 10 पर एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। गंगटोक से सिलीगुड़ी जा रही एक टाटा नेक्सॉन कार अनियंत्रित होकर तीस्ता नदी के तेज बहाव में समा गई। रविवार सुबह चले एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद नदी की गहराइयों से कार को ढूंढ निकाला गया, जिसके भीतर से एक 5 साल की मासूम बच्ची और तीन वयस्कों समेत एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव बरामद किए गए हैं।

पश्चिम बंगाल: सिक्किम से सिलीगुड़ी जा रहा परिवार तीस्ता नदी में समाया, एक ही परिवार के 4 लोगों का खौफनाक अंत…​

अस्पताल में भर्ती रिश्तेदारों से मिलने जा रहा था परिवार

मृतकों की पहचान स्मारिका न्यौपाने , सैब्या न्यौपाने , जीका दहल और पांच वर्षीय मासूम दित्या छेत्री के रूप में हुई है। यह परिवार पूर्वी सिक्किम के काबी लुंगचोक का रहने वाला था। बीते 5 जून को यह सभी लोग अस्पताल में भर्ती अपने किसी रिश्तेदार की तीमारदारी के लिए सिलीगुड़ी जा रहे थे। 5 जून की शाम राम्बी इलाके के पास इस परिवार से आखिरी बार संपर्क हुआ था, जिसके बाद से ही इनका फोन बंद आ रहा था और ये लापता हो गए थे।

मलबे से मिले सुराग के बाद रेस्क्यू

6 जून को परिजनों द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पश्चिम बंगाल पुलिस और स्थानीय बचाव दलों ने दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्टा और समाजसेवी विक्रम राय के सहयोग से एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। तलाशी के दौरान बाघपुल के पास, जो कि एक भूस्खलन प्रभावित हिस्सा है, कार की बैटरी और बंपर के टुकड़े मिले। इसके बाद खोजबीन का दायरा तीस्ता नदी की ओर बढ़ाया गया।

भारी बारिश और नदी के तेज बहाव के बीच शनिवार शाम को डूबी हुई कार की लोकेशन का पता चला। रात के अंधेरे और खराब मौसम के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा, लेकिन रविवार सुबह तड़के दोबारा अभियान शुरू कर कार के भीतर से चारों शवों को बाहर निकाल लिया गया। इस हादसे का मुख्य कारण भारी बारिश, भूस्खलन और NH10 की जर्जर स्थिति को माना जा रहा है। इस घटना से पूरा सिक्किम सदमे में है, क्योंकि हादसे का शिकार हुए तीनों वयस्क सरकारी पदों पर तैनात थे। स्मारिका एसटीएनएम अस्पताल में नर्सिंग लेक्चरर थीं, सैब्या संस्कृति विभाग में जूनियर इंजीनियर और जीका बागवानी विभाग में कार्यरत थीं।

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