Patna Khan Sir Coaching Case: पटना के चर्चित शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर इस समय बेहद गंभीर कानूनी संकट का सामना कर रहे हैं. पटना में खान ग्लोबल स्टडीज इंस्टीट्यूट के बाहर हुई फायरिंग और हिंसा के मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने इस मामले में कई कड़े कदम उठाए हैं और खान सर पर भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट के तहत कई संगीन आरोप लगाए हैं. इस पूरे विवाद ने न सिर्फ शिक्षा जगत को हैरान किया है, बल्कि खान सर की मुश्किलें भी काफी बढ़ा दी हैं, क्योंकि उन पर लगी धाराएं बेहद गंभीर श्रेणी की हैं.

क्या सरेंडर करेंगे खान सर?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पटना पुलिस फिलहाल बेहद फूंकफूंक कर कदम रख रही है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रशासन जल्दबाजी में गिरफ्तारी करने के मूड में नहीं है और वह खान सर के खुद आत्मसमर्पण करने का इंतजार कर रहा है. कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस सोमवार तक स्थिति पर पूरी नजर बनाए रखेगी. बाजार में इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि खान सर सोमवार को पटना सिविल कोर्ट में सरेंडर कर सकते हैं, ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके.
जमानत के लिए कानूनी टीम की तैयारी
दूसरी तरफ खान सर की लीगल टीम भी उन्हें इस बड़ी आफत से बचाने के लिए पूरी ताकत से जुट गई है. उनकी कानूनी टीम को पूरा भरोसा है कि वे अदालत के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे और उन्हें अग्रिम जमानत के रूप में बड़ी राहत मिल जाएगी. हालांकि, मामला हाईप्रोफाइल होने और इसमें गोलीबारी शामिल होने की वजह से कोर्ट से राहत पाना इतना आसान भी नहीं होगा. रोशन आनंद नामक एक अन्य आरोपी को इस मामले में पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है.
खान सर पर लगी धाराएं कितनी गंभीर?
खान सर पर पटना पुलिस ने जो सबसे खतरनाक कानूनी फंदा कसा है, वह है बीएनएस की धारा 109. यह धारा सीधे तौर पर हत्या के प्रयास से संबंधित है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। कानून के मुताबिक यह धारा तब लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दूसरे की जान लेने की कोशिश करता है, लेकिन वह उसमें सफल नहीं हो पाता. इस गंभीर अपराध में दोषी साबित होने पर आरोपी को पूरे 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है.
आर्म्स एक्ट का लगा कड़ा शिकंजा
गोलीबारी की इस घटना के कारण खान सर पर आर्म्स एक्ट की कई धाराओं को भी जोड़ा गया है. पुलिस ने मामले में आर्म्स एक्ट की धारा 25 , 27 और 35 के तहत केस दर्ज किया है. आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत सार्वजनिक स्थान पर हथियार के अवैध प्रदर्शन या इस्तेमाल पर अधिकतम 2 साल की सजा का प्रावधान है. वहीं धारा 27 के तहत खतरनाक हथियार का इस्तेमाल करने पर कम से कम 3 साल की कैद हो सकती है.
संयुक्त जिम्मेदारी का कानूनी पेंच
इस मामले का एक और पेचीदा पहलू आर्म्स एक्ट की धारा 35 है, जो संयुक्त जिम्मेदारी से जुड़ी हुई है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी परिसर में हिंसा या फायरिंग होती है, तो वहां के संचालक या मुख्य व्यक्ति को भी उस अपराध के लिए बराबर का जिम्मेदार माना जा सकता है. इसी वजह से कोचिंग संस्थान के मुखिया होने के नाते खान सर पर यह धारा लगाई गई है, जो उनकी मुश्किलों को दोगुना कर देती है.
गैरजमानती धाराओं के कारण बढ़ी आफत
इस मामले में खान सर की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन पर लगी ज्यादातर धाराएं पूरी तरह से गैरजमानती हैं. इसका सीधा अर्थ यह है कि अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती है, तो पुलिस स्टेशन से उन्हें बेल नहीं मिल पाएगी. उन्हें अनिवार्य रूप से कोर्ट के सामने पेश होना होगा और जेल जाना पड़ेगा. हत्या का प्रयास और कोचिंग परिसर के भीतर खुलेआम हथियारों का इस्तेमाल होने के कारण मामले की संवेदनशीलता बहुत ज्यादा बढ़ गई है.





