इतिहास रचने से लेकर दुनिया के सामने अपनी विरासत दर्ज कराने तक, सूर्यकुमार यादव का सफर बहुत तेजी से आगे बढ़ा। भारत को लगातार दूसरा टी20 विश्व कप जिताने के तीन महीने के भीतर ही उन्होंने न सिर्फ कप्तानी गंवा दी, बल्कि उस टीम में अपनी जगह भी खो दी जिसकी अगुआई करते हुए उन्होंने आईसीसी ट्रॉफी जीती थी।

ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय क्रिकेट अपने चौथे विश्व कप विजेता पुरुष कप्तान को किस रूप में याद रखेगा? भारत के विश्व कप विजेता कप्तानों कपिल देव, एमएस धोनी और रोहित शर्मा की कतार में सूर्यकुमार शायद सबसे कम करिश्माई नजर आते हैं। सूर्यकुमार यादव के व्यक्तित्व में वह गंभीरता और प्रभाव नहीं दिखता जो इन दिग्गजों से जुड़ा रहा है।
सूर्यकुमार यादव हालांकि, बतौर बल्लेबाज बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने ने टी20 क्रिकेट में ऐसे शॉट खेले और मैदान के ऐसे हिस्सों में रन बनाए, जिनकी कल्पना भी बहुत कम बल्लेबाज कर पाते हैं। कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं जिन्हें कोई दोहराना नहीं चाहेगा।
पिछले साल एशिया कप के दौरान उन्होंने टॉस पर विरोधी कप्तान से हाथ नहीं मिलाया। मैच के बाद औपचारिक अभिवादन से भी दूरी बनाए रखी और पुरस्कार वितरण समारोह में ट्रॉफी लेने से इनकार कर पूरे कार्यक्रम को विवादों में ला दिया।
पाकिस्तान के खिलाफ उस मुकाबले में सूर्यकुमार का व्यवहार उन्हें एक अलग तरह का कप्तान बनाता है। उन्होंने खेल और राजनीति को खुलकर एकदूसरे से जोड़ने का काम किया। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम में वह संतुलन, गरिमा और परिपक्वता नजर नहीं आई, जिसकी अपेक्षा मुश्किल परिस्थितियों में खिलाड़ियों से की जाती है।
उस समय एशिया कप ऐसे माहौल में खेला गया था जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ था और हालिया घटनाएं दोनों देशों के लोगों के मन में ताजा थीं। हालांकि, यह पहली बार नहीं था। अतीत में भी दोनों देशों के क्रिकेटर युद्ध और तनाव के बीच एकदूसरे के खिलाफ खेले हैं, लेकिन खिलाड़ियों ने कभी राजनीतिक मतभेदों को मैदान पर अपने व्यवहार पर हावी नहीं होने दिया।
मैच का नतीजा चाहे जो रहा हो, खिलाड़ी एकदूसरे से हाथ मिलाते रहे, गले मिलते रहे और पुरस्कार समारोहों में हंसीमजाक भी करते रहे। 2017 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल के बाद विराट कोहली, युवराज सिंह और शोएब मलिक की बातचीत वाला वीडियो आज भी याद किया जाता है। उस दृश्य को देखकर यह समझना मुश्किल था कि कौन सी टीम जीती और कौन हारी। हालांकि, एशिया कप में ऐसा नहीं हुआ। सूर्यकुमार ने हारने वाली टीम पर कुछ तीखी टिप्पणियां कीं और भारतपाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता को लेकर भी बयान दिया।
एक पाकिस्तानी पत्रकार ने उनसे पूछा था: क्या आपको लगता है कि इस बार पाकिस्तान ने बेहतर मुकाबला किया? जवाब में सूर्यकुमार ने कहा था: मैं एक बात कहना चाहता हूं। आपको इस प्रतिद्वंद्विता वाली बात पूछना बंद कर देना चाहिए। अगर दो टीमें 1520 मैच खेलें और रिकॉर्ड 77 या 87 हो, तब उसे प्रतिद्वंद्विता कहते हैं। लेकिन अगर रिकॉर्ड 101 या ऐसा कुछ हो, तो उसे प्रतिद्वंद्विता नहीं कहा जा सकता।
उनके ये शब्द उन प्रशंसकों को निराश कर सकते थे जो भारतपाकिस्तान मुकाबलों की ऐतिहासिक प्रतिस्पर्धा का आनंद लेते हैं। खेल में जिम्मेदार कप्तान आमतौर पर ऐसे व्यापक और अंतिम फैसले सुनाने से बचते हैं। यह काम अक्सर उत्साही प्रशंसकों का माना जाता है, कप्तानों का नहीं।
दिलचस्प यह है कि सूर्यकुमार कभी ऐसे खिलाड़ी नहीं माने गए जो विवादित या कटु बयान दें। उनके साथ खेलने वाले साथी और उन्हें बचपन से कवर करने वाले पत्रकार उन्हें एक मिलनसार इंसान बताते हैं। बॉलीवुड की हल्कीफुल्की कॉमेडी फिल्मों के शौकीन सूर्यकुमार यादव अक्सर मजाकिया जवाबों के लिए जाने जाते रहे हैं, तीखी टिप्पणियों के लिए नहीं।
यही सूर्यकुमार 2022 टी20 विश्व कप के दौरान दुनिया के सामने एक नई बल्लेबाजी शैली लेकर आए थे। क्रिकेट जगत ने शायद ही पहले कभी ऐसा बल्लेबाज देखा था, जो 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंद को एक घुटने पर बैठ स्क्वायर लेग के ऊपर छक्के के लिए भेज दे। उनके पास रैंप शॉट था, रिवर्स रैंप था और विकेटकीपर के सिर के ऊपर से गेंद को स्टैंड में पहुंचाने की अद्भुत कला भी थी। उनकी बल्लेबाजी रोमांच से भरी होती थी।
मुंबई के मैदानों पर सख्त प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में पलेबढ़े सूर्यकुमार मूल रूप से पारंपरिक बल्लेबाज थे, लेकिन टी20 युग में उन्होंने अपने खेल को बदला और रन बनाने के नएनए तरीके खोजे। अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में वह किसी गंभीर कला फिल्म की तरह नहीं, बल्कि ऐसी मनोरंजक फिल्म की तरह थे जिसे देखने के लिए दर्शक सिनेमाघरों में उमड़ पड़ते हैं। प्रशंसक उन्हें इसलिए पसंद करते थे, क्योंकि उनकी बल्लेबाजी उन्हें अपने गली क्रिकेट के दिनों की याद दिलाती थी। वह वही शॉट खेलते थे जिन्हें लोग खेलने का सपना तो देखते हैं, लेकिन खेल नहीं पाते।
इन्हीं शानदार प्रदर्शनों ने उन्हें कप्तानी की दौड़ में पहुंचाया। उन्हें अवसर भी मिला और किस्मत का साथ भी। उन्हें ऐसी टीम की कमान मिली जो पहले से संतुलित थी और अपनी जीत का तरीका खोज चुकी थी। कप्तान रोहित शर्मा ने टीम को आक्रामक बल्लेबाजी का जो खाका दिया था, वह खिलाड़ियों के लिए बिल्कुल उपयुक्त साबित हुआ।
टीम का सिद्धांत साफ था विकेट गिरने पर भी आक्रमण जारी रखना है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती जैसे मैच विजेता खिलाड़ी मौजूद थे। सूर्यकुमार यादव को इस चैंपियन टीम को संभालने और सही दिशा देने का श्रेय जरूर मिलना चाहिए, लेकिन विश्व कप जीतने में इस मजबूत ढांचे की भी बड़ी भूमिका रही।
अहमदाबाद की उस यादगार रात को सूर्यकुमार को लगा होगा कि उनकी खराब फॉर्म की लंबी चर्चा अब हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। जीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भविष्य के सपनों की बात की। उन्होंने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने और उसके बाद एक और टी20 विश्व कप जीतने की उम्मीद जताई।
अगले दिन एक लंबे इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘‘विश्व कप जीतने के बाद मेरी जिंदगी फिर बदल जाएगी।’’ उनकी जिंदगी बदली भी, लेकिन शायद वैसी नहीं जैसी उन्होंने कल्पना की थी। भारतीय क्रिकेट में एक पुरानी सच्चाई आज भी कायम है अगर बल्लेबाज रन नहीं बना रहा हो तो उसे बहुत दूर के सपने देखने की सलाह नहीं दी जाती।
टेस्ट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के मामले में भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो वीरेंद्र सहवाग 90 और रोहित शर्मा 88 का ऋषभ पंत 97छक्कों के बाद नंबर आता है।





