वाशिंगटन ने ईरान के सैन्यऔद्योगिक परिसर को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद की कमर तोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 10 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंधों की घोषणा की। इन कंपनियों पर ईरान को घातक शाहेद ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण के लिए जरूरी पुर्जे और कच्चा माल मुहैया कराने का गंभीर आरोप है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा से ठीक पहले चीन पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में इसे देखा जा रहा है।
एक बयान में, ट्रेजरी विभाग ने कहा कि वह ईरान के सैन्यऔद्योगिक आधार के खिलाफ और आर्थिक कार्रवाई करने के लिए तैयार है, ताकि तेहरान को अपनी उत्पादन क्षमताएं फिर से बनाने से रोका जा सके।
विभाग ने यह भी चेतावनी दी कि वह उन विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बना सकता है जो ईरान के अवैध व्यापार में मदद कर रहे हैं। इनमें चीन की स्वतंत्र “टीपॉट” तेल रिफाइनरियों से जुड़ी कंपनियाँ और ईरान की गतिविधियों में मदद करने वाली एयरलाइंस भी शामिल हैं।

जिन संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए, उनमें चीन की Yushita Shanghai International Trade Co Ltd शामिल है। इस पर आरोप है कि इसने ईरान को चीन से हथियार खरीदने की कोशिशों में मदद की। दूसरी कंपनी दुबई की Elite Energy FZCO है, जिस पर आरोप है कि इसने खरीदफरोख्त के कामों में शामिल हांगकांग की एक कंपनी को लाखों डॉलर ट्रांसफर किए।
हांगकांग की HK Hesin Industry Co Ltd और बेलारूस की Armory Alliance LLC पर खरीद नेटवर्क में बिचौलिए के तौर पर काम करने का आरोप लगाया गया, जबकि हांगकांग की Mustad Ltd पर आरोप है कि इसने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के लिए हथियार खरीदने में मदद की।
ईरान की Pishgam Electronic Safeh Co पर ड्रोन में इस्तेमाल होने वाली मोटरें खरीदने के लिए प्रतिबंध लगाया गया, जबकि चीन की Hitex Insulation Ningbo Co Ltd पर बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान सप्लाई करने का आरोप लगाया गया।
Obsidian Risk Advisors के मैनेजिंग प्रिंसिपल ब्रेट एरिक्सन ने कहा कि इन प्रतिबंधों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय सहयोगियों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को सीमित करना है।
28 फरवरी को ईरानी ठिकानों पर US और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इस बंदी से इस रणनीतिक जलमार्ग से होने वाली जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस जलमार्ग से दुनिया के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है, जिससे ऊर्जा की कीमतें तेज़ी से बढ़ गई हैं।
ब्रिटिश सरकार द्वारा वित्तपोषित Centre for Information Resilience के अनुसार, ईरान के पास हर महीने लगभग 10,000 ड्रोन बनाने की औद्योगिक क्षमता है।
एरिक्सन ने कहा कि ये ताज़ा प्रतिबंध बहुत ही सीमित दायरे में लगाए गए हैं, जिससे ईरान को अपने खरीद के रास्ते बदलने का समय मिल गया है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन ने अभी तक उन चीनी बैंकों को निशाना नहीं बनाया है जो ईरान की अर्थव्यवस्था को लगातार मदद दे रहे हैं।





