Bageshwar Dham Ki Katha: आस्था और भक्ति की दुनिया में आपको कई ऐसी कहानियां मिलेगी जो सीधे दिल को छू जाती हैं। ऐसी ही एक अनसुनी कथा बागेश्वर धाम सरकार द्वारा भी सुनाई गई, जिसमें एक गरीब किसान की सच्ची भक्ति ने भगवान को भी गप्पू जी नाम से पुकारने पर मजबूर कर दिया। यह कथा इस चीज का सबूत है कि भगवान को पाने के लिए किसी बड़े मंत्र या कठिन अनुष्ठान की नहीं बल्कि सच्चा भाव की जरूरी है।

साधु जी भाव के भूखे हैं भगवान
कहानी सुनाते हुए कहते है कहानी की शुरुआत एक भोलेभाले किसान से होती है, जो पंडित जी के पास जाकर कहता है कि उसे एक ऐसा मंत्र बता दें जिसे वह कही भी कभी भी बोल सके खेत में काम करते समय, खाते, पीते जप कर सके।
इसको सुनने के बाद पंडित जी ने उसे गोपालगोपाल जपने की सलाह दी। लेकिन हुआ कुछ ऐसा की वो रास्ते में जाते समय मंत्र भूल गया और उसे लगा कि नाम गप्पू जी है। जिसके बाद वह घर जा कर अपनी पत्नी को बताते है, जिसके बाद वो पूरे मन से गप्पू जी, गप्पू जी जपना शुरू कर देते है। खातेपीते, सोतेजागते हर समय यही नाम उनके होठों पर रहने लगा।
जब गप्पू जी सुनकर खुद भगवान पहुंचे
कहानी आगे बढ़ती है जिसमें एक दिन किसान खेत में हल चलाते हुए जोरजोर से गप्पू जी पुकार रहा था। तभी वहां से भगवान कृष्ण और माता रुक्मिणी गुजर रहे थे। इस जाप को सुनने के बाद रुक्मिणी जी ने पूछा कि यह किसका नाम इतनी जोर जोर से ले रहा है?
यह बात सुनकर प्रभु मुस्कुराकर बोले, यह मेरा ही नाम ले रहा है। इस बात को सुनने के बाद रुक्मिणी जी ने किसान से पूछा कि गप्पू जी कौन है, तो भजन में बाधा आने पर किसान गुस्सा हो गया और बोला, तेरे खसम का नाम है।
यह बात सुनकर भगवान हंसने लगे और बताया कि उनका यह नाम बचपन की एक लीला से जुड़ा है, जब उन्होंने माखन का बड़ा टुकड़ा एक ही बार में गप से खा लिया था। यह सुनकर साफ हो जाता है कि सच्चे भाव से किया गया जप भगवान तक जरूर पहुंचता है।
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भक्ति में डूबे भोलेनाथ, बने गोपी
कथा में ये भी दिखता है कि भक्ति का रंग इतना गहरा होता है कि स्वयं भी वृंदावन में महारास में शामिल होने के लिए गोपी बन गए। उधर जाने से पहले माता पार्वती ने बताया था की वहां श्रीकृष्ण के अलावा कोई पुरुष नहीं जा सकता। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। तब भोलेनाथ ने गोपी का रूप धारण किया लेकिन वहां पहुंचने पर जब उनकी पहचान खुली तो सब हंसने लगे। तब से वह स्थान गोपेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
कथा का सार: सच्चे दिल से पुकारो
इस कथा से हमे सिखने को मिलता है कि भगवान को पाने के लिए विद्वान होना जरूरी नहीं, बल्कि सच्चा और निष्कपट दिल होना चाहिए। कहानी में किसान के गलत नाम जप पर भी भगवान को बुला लेता है क्योकि भक्ति का असली अर्थ सिर्फ भाव है।





