ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पुराना तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया। ईरान ने कड़े शब्दों में UAE पर निशाना साधते हुए उसे न केवल हमले में ‘मददगार’ बताया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए उसे सीधे तौर पर ‘हमलावर’ करार दिया। यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब UAE के प्रतिनिधि ने तेहरान पर अमीरात को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। ईरान के कानूनी और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए तेहरान का पक्ष मजबूती से रखा।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 1974 के एक प्रस्ताव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह “साफ़ करता है कि जब कोई देश हमलावरों को सुविधाएँ देता है और सेवाएँ मुहैया कराता है, तो यह सिर्फ़ मदद नहीं होती; ऐसा आचरण अपने आप में एक हमला माना जाता है।” उन्होंने कहा, “इसलिए, UAE एक हमलावर है, न कि सिर्फ़ हमले में मददगार।”
उन्होंने आगे कहा कि जब उसकी आबादी और बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचाया जा रहा हो, तो ईरान चुप नहीं बैठ सकता। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। हमलावरों के साथ सहयोग करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने UAE से कहा, “हम एक शक्तिशाली और महान देश हैं, जिसका राष्ट्र गौरवशाली है। हम चुपचाप खड़े होकर यह नहीं देख सकते कि हमलावर हमारे लोगों और बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाएँ, खासकर तब जब इसमें हमारे पड़ोसियों में से एक—यानी संयुक्त अरब अमीरात—की भागीदारी और सहयोग हो।”
ईरान ने अपनी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया
ग़रीबाबादी के अनुसार, तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पूरी तरह से पालन करते हुए कार्रवाई की और आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने आगे कहा “हमारे पास UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की सभी सुविधाओं को निशाना बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था; या फिर UAE में मौजूद उन सभी सुविधाओं और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना ज़रूरी था, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका की कोई भूमिका या भागीदारी थी। यह एक युद्ध था, और उस युद्ध में हमने अपने देश की रक्षा की। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पूरी तरह अनुरूप थी और आत्मरक्षा के हमारे स्वाभाविक अधिकार के दायरे में थी। UAE एक हमलावर है। आप इन झूठों और खोखले आरोपों के पीछे नहीं छिप सकते। एकमात्र देश जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए, वह UAE है।
ईरानी अधिकारी ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान ने पहले ही UAE सहित क्षेत्रीय देशों को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल की ओर से संभावित हमलों के बारे में चेतावनी दे दी थी, और उन्हें “हमलावरों” का समर्थन न करने की हिदायत दी थी। उन्होंने कहा कि उनके सीनियर अधिकारी खतरों से पूरी तरह वाकिफ थे, फिर भी उन्होंने चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करना ही चुना।
ईरान का आरोप: आम नागरिकों पर भारी असर
ग़रीबाबादी ने UAE पर ऐसे हमलों में मदद करने का आरोप लगाया, जिनकी वजह से हज़ारों लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा, “आपकी मदद और भागीदारी से, और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के खिलाफ़ हमले में UAE की सीधी संलिप्तता के ज़रिए, हमलावरों ने 130,000 आम नागरिकों के ठिकानों पर हमला किया। 4,000 से ज़्यादा बेकसूर आम नागरिक शहीद हो गए हैं।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि UAE झूठी कहानियाँ गढ़कर अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता।
उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को 120 से ज़्यादा डिप्लोमैटिक नोट सौंपे थे, जो कुल मिलाकर 500 से ज़्यादा पन्नों के थे। उन्होंने आगे कहा कि UAE के इलाके से उड़ान भरने वाले हर लड़ाकू विमान का ठीकठीक समय और उड़ान का रास्ता रिकॉर्ड किया गया था।
ईरान ने BRICS से अमेरिकी दबाव का सामना करने की अपील की
खास बात यह है कि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी धमकियों के खिलाफ़ एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया। BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतों को “इतिहास के कूड़ेदान” में फेंक देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कमरे में मौजूद कई देशों ने “उसी घिनौनी ज़ोरज़बरदस्ती के थोड़ेबहुत अलगअलग रूप” झेले हैं, और उन्होंने BRICS सदस्यों से अपील की कि वे और भी मज़बूत और एकजुट तरीके से इसका जवाब दें।
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Firm Response by the Deputy Foreign Minister to the Baseless Allegations Made by the UAE Representative
At the second session of the Meeting of BRICS Foreign Ministers currently underway in New Delhi, Dr. Kazem Gharibabadi, Deputy Foreign Minister for Legal and International… pic.twitter.com/wK06Ny402c
— Iran in India May 14, 2026





