Manoj Tiwari Exposed TMC and Mamamta Banerjee: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और और तृणमूल कांग्रेस के निवर्तमान विधायक मनोज तिवारी ने मंगलवार को कहा कि उनके लिए ‘तृणमूल कांग्रेस का अध्याय अब खत्म हो गया है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट देने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उन्होंने पांच करोड़ रुपये देने से इनकार कर दिया था।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज और बंगाल क्रिकेट के इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में खेल राज्य मंत्री थे। ममता का 15 साल का कार्यकाल हालिया विधानसभा चुनावों में सोमवार को बीजेपी की प्रचंड जीत के साथ ही समाप्त हो गया है। इसके बाद पूर्व क्रिकेट मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार में किए गए भ्रष्टाचार समेत सरकार के काम करने के तरीके को लेकर बड़े खुलासे किए हैं, जो कि टीएमसी की मुसीबतों में इजाफा कर सकता है।
टिकट के लिए मांगे 55 करोड़ रुपये
मनोज तिवारी ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ”इस करारी हार से मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई है। जब पूरी पार्टी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो और किसी भी क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ हो तो ऐसा होना ही था।” उन्होंने कहा, ”सिर्फ वही लोग टिकट खरीद पाए जो भारीभरकम रकम दे सकते थे। इस बार कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दिए। मेरे से भी पैसे मांगे गए थे लेकिन मैंने देने से मना कर दिया। यह तो देखिए कि जिन लोगों ने पैसे दिए उनमें से कितने लोग चुनाव जीत पाए हैं।”
मनोज तिवारी ने कहा, ”जहां तक तृणमूल की बात है तो मेरे लिए अब वह अध्याय पूरी तरह से खत्म हो चुका है।” तिवारी ने कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था, भले ही 2019 में तृणमूल ने उन्हें लोकसभा का टिकट देने की पेशकश की थी। आखिरकार 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने शिबपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
टीएमसी में लोकतंत्र की कमी का लगाया आरोप
मनोज तिवारी ने कहा, ”उस समय मैं आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी में खेलने को लेकर गंभीर था जब दीदी चाहती थीं कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं।” तिवारी ने कहा, ”मैंने विनम्रता से मना कर दिया था लेकिन 2021 के चुनावों से पहले दीदी ने एक बार फिर मुझे बुलाया और कहा, ‘मनोज मेरे पास तुम्हारे लिए एक संदेश है और अरूप तुम्हें वह संदेश देगा।’ मुझे शिबपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया और मैंने सोचा कि मैं कुछ सार्थक बदलाव ला सकता हूं।” तिवारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है।
उन्होंने कहा, ”मैंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया है, जहां तृणमूल के सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था। मुझे राज्य मंत्री के नाम पर बस एक ‘लॉलीपॉप’ थमा दिया गया था, जिसका असल में कोई मतलब ही नहीं था। अगर मैं खड़ा होकर कहता, ‘दीदी, मैं आपका ध्यान एक खास समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं।’ तो वह बीच में ही हमें रोक देतीं और कहतीं, ‘मेरे पास तुम लोगों के लिए समय नहीं है।’
काम में अड़ागा डालने का रवैया मनोज तिवारी
मनोज तिवारी ने कहा कि हावड़ा जिले में सीवेज और ड्रेनेज प्रणाली के खराब होने की पुरानी समस्या को उनके बारबार प्रयास करने के बावजूद कभी हल नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ”मौजूदा विधायक होने के नाते मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में ड्रेनेज के काम के लिए हर जगह दौड़भाग करता रहा लेकिन जिन लोगों ने वर्षों तक हावड़ा नगर पालिका पर कब्जा जमाए रखा और चुनाव नहीं होने दिए उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की।” इस पूर्व क्रिकेटर ने कहा, ”वे बस विकास कार्यों में अड़ंगा डालते रहते थे जबकि वे बहुत ही बुनियादी काम थे। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने जो कुछ काम करवाए वे सिर्फ विधायक कोष से ही नहीं बल्कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मैंने अपनी जेब से भी पैसे दिए।”
मनोज तिवारी ने कहा, ”हर साल दीदी भूमिगत ड्रेनेज प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ की घोषणा करती थीं लेकिन बात बस घोषणा तक ही सीमित रहती थी यानी सिर्फ कोरे वादे।” तिवारी को अपनी छवि को लेकर भी कई लड़ाइयां लड़नी पड़ी जिसमें उन पर यह आरोप भी शामिल है कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में बिल्डरों से जबरन वसूली की थी। उन्होंने हालांकि इस आरोप को हंसी में उड़ा दिया। उन्होंने कहा, ”मैं आपको बता दूं कि जब मैंने 2021 के चुनावों से पहले अपना आय का हलफनामा जमा किया था तो मैंने यह बताया था कि मेरे पास 20 करोड़ रुपये नकद हैं। मैंने 10 साल तक आईपीएल खेला है, 20 साल तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला है और काफी वर्षों तक भारतीय टीम का हिस्सा रहा हूं।”
फर्जी आरोपों और अपमान का दाव
पूर्व क्रिकेट ने टीएमसी और ममता बनर्जी पर कई बड़े हमले बोले। उन्होंने कहा, ”मुझे जबरन वसूली के पैसों की कोई जरूरत नहीं है। सातआठ ऐसे स्थानीय पार्षद थे जो नियमित रूप से दीदी को चिट्ठियां लिखते रहते थे। मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए थे।” जानेमाने क्रिकेटर तिवारी को राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास से अपमानित महसूस हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बिस्वास ने अपनी असुरक्षा के कारण उन्हें अपने मंत्री पद के कर्तव्य निभाने की अनुमति नहीं दी।
मनोज तिवारी ने आरोप लगाते हुए कहा, ”अरूप दा किसी भी खेल के बारे में क, ख, ग भी नहीं जानते। ऐसे कई कार्यक्रम होते थे जहां अरूप दा और मुझे दोनों को बुलाया जाता था लेकिन मुझे मंच पर नहीं बुलाया जाता था। एक बार डूरंड कप के अनावरण के मौके पर खेल के पन्नों में मेरी तस्वीरें छपी थीं और उसके बाद अगले डूरंड कप से मुझे कोई न्योता ही नहीं मिला।”
तिवारी इस बात से खुश हैं कि उन्होंने कोलकाता में महान फुटबॉल लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया जो अंत में एक ‘बड़ी गड़बड़’ साबित हुआ। इस खराब तरीके प्रबंधित कार्यक्रम की वजह से मशहूर सॉल्ट लेक स्टेडियम में तोड़फोड़ हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि स्टेडियम में खचाखच भरी भीड़ को मेस्सी की एक झलक भी ठीक से देखने को नहीं मिली क्योंकि राजनेता और स्थानीय प्रशासक इस स्टार फुटबॉलर के चारों ओर जमा हो गए थे जिसे सुरक्षा कारणों से जल्दी ही वहां से ले जाया गया।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड की लेवल दो की कोच परीक्षा पास करने के बाद तिवारी बंगाल की रणजी टीम के मुख्य कोच बनना चाहते हैं। तिवारी ने कहा, ”बंगाल क्रिकेट संघ ने मुख्य कोच के पद के लिए आवेदन मंगाए थे। मैंने अपनी बीसीसीआई लेवल दो परीक्षा पास की है और आने वाले समय में मैं कोचिंग को गंभीरता से लेना चाहता हूं।”
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों में बीजेपी की 207 सीटों के साथ प्रचंड जीत हुई। दूसरी ओर टीएमसी को महज 80 सीटें मिली हैं। ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका यह भी है कि वे भवानीपुर विधानसभा सीट से भी चुनाव हार गई। आम तौर पर चुनाव हारने के बाद सीएम इस्तीफा देते हैं, फिर जब तक जीते हुए दल का सीएम नहीं बनता है, तब तक के लिए उन्हें कार्यवाहक सीएम नियुक्त किया जाता है लेकिन ममता बनर्जी ने ऐलान कर दिया है, कि सीएम पद से इस्तीफा ही नहीं देंगी।





