प्रॉपर्टी से मोहभंग गल्फ के NRI भारत में इस जगह लगा रहे हैं सबसे ज्यादा पैसा!​

खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब तक भारत में जमीन या फ्लैट खरीदना इनकी पहली पसंद हुआ करता था, लेकिन अब इस चलन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. ‘इक्विरस वेल्थ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गल्फ में रहने वाले NRI अब भारतीय रियल एस्टेट से अपना पैसा निकालकर शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं.

प्रॉपर्टी से मोहभंग गल्फ के NRI भारत में इस जगह लगा रहे हैं सबसे ज्यादा पैसा!​

प्रॉपर्टी का मोह छूटा, शेयर बाजार पर बढ़ा भरोसा

अप्रैल 2026 में यूएई, सऊदी अरब, कतर समेत अन्य खाड़ी देशों के 8,300 एनआरआई के बीच एक बड़ा सर्वे किया गया. आंकड़े बताते हैं कि 73 फीसदी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में अपना निवेश बढ़ाया है. इसके ठीक उलट, 40 फीसदी एनआरआई रियल एस्टेट से अपना एक्सपोजर कम कर रहे हैं. रिपोर्ट इसे निवेश की दुनिया का ‘द डिफाइनिंग ट्रेड’ मानती है. इसका सीधा मतलब है कि अब लोग फिजिकल एसेट की जगह वित्तीय पोर्टफोलियो को तरजीह दे रहे हैं. इसके अलावा, 43 प्रतिशत लोगों ने फिक्स्ड डिपॉजिट और डेट फंड्स में भी पैसा लगाया है, जबकि 28 प्रतिशत ने सोने में निवेश बढ़ाया है.

दुनिया में उथलपुथल, लेकिन निवेशकों में घबराहट नहीं

वैश्विक स्तर पर जो भूराजनीतिक तनाव चल रहा है, उसका असर निवेशकों के फैसलों पर साफ दिख रहा है. सर्वे में शामिल 83 प्रतिशत लोगों ने माना कि वैश्विक घटनाक्रम उनके वित्तीय फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। 41 प्रतिशत निवेशकों के लिए क्षेत्रीय अस्थिरता सबसे बड़ा जोखिम है, जबकि 23 प्रतिशत बढ़ती महंगाई को लेकर चिंतित हैं. हालांकि, इस अनिश्चितता के बावजूद बाजार में किसी तरह की घबराहट या ‘पैनिक सेलिंग’ नहीं है. निवेशक काफी अनुशासित हो गए हैं. वे अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं, बचत बढ़ा रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि नौकरी जाने का डर केवल 12 प्रतिशत लोगों को है, जो दिखाता है कि उनकी आय फिलहाल सुरक्षित है.

अब मजबूरी नहीं, मुनाफे के लिए घर आ रहा पैसा

पहले गल्फ से भारत भेजे जाने वाले पैसे का मुख्य उद्देश्य परिवार का खर्च चलाना होता था. लेकिन अब यह गणित पूरी तरह बदल चुका है. अब 27 प्रतिशत रेमिटेंस विशुद्ध रूप से निवेश के लिए और 22 प्रतिशत रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए भेजा जा रहा है. परिवार के खर्च के लिए भेजी जाने वाली रकम का हिस्सा अब केवल 26 प्रतिशत रह गया है. जब नए निवेश की बात आती है, तो 42 प्रतिशत लोगों की पहली पसंद भारतीय शेयर बाजार ही है. इसके बाद फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स और गोल्ड का नंबर आता है.

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

इस पूरे ट्रेंड से एक बात स्पष्ट होती है कि विदेशी धरती पर बैठे भारतीयों को भारत की आर्थिक तरक्की पर अटूट विश्वास है. दुनिया भर में चल रही अनिश्चितताओं के बावजूद 75 प्रतिशत गल्फ एनआरआई लगातार निवेश कर रहे हैं. वे बाजार में स्थिरता का इंतजार करने के बजाय खुद को लंबी अवधि के निवेशक के रूप में स्थापित कर रहे हैं. यह आम निवेशकों के लिए भी एक संकेत है कि पूंजी को सिर्फ प्रॉपर्टी जैसी गैरतरल संपत्तियों में फंसाने के बजाय, सुनियोजित वित्तीय साधनों के जरिये प्लानिंग करना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है.

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