Donald Trump ने ठुकराया Iran का शांति प्रस्ताव: ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ करार देते हुए दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी​

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए युद्ध विराम के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक कड़े संदेश में ट्रंप ने इस प्रस्ताव को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति को संकट में डाल दिया है। इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम, समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है जिससे कई देश ईंधन की कमी का सामना कर रहे हैं।
ट्रंप ने रविवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट किया, ‘‘मैंने अभीअभी ईरान के तथाकथित ‘प्रतिनिधियों’ का जवाब पढ़ा। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।’’

Donald Trump ने ठुकराया Iran का शांति प्रस्ताव: 'पूरी तरह अस्वीकार्य' करार देते हुए दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी​

इससे पहले ट्रंप ने ईरान पर लगभग 50 वर्षों से अमेरिका के साथ खेल खेलने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा, ‘‘अब वे ज्यादा समय तक खुश नहीं रह पाएंगे।’’
ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ से कहा, ‘‘मुझे उनका पत्र पसंद नहीं आया। यह ठीक नहीं है। मुझे उनकी प्रतिक्रिया पसंद नहीं आई।”
हालांकि उन्होंने ईरान के जवाब के बारे में और अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।
इसी बीच, रिपब्लिकन पार्टी से सांसद लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप को अब सैन्य कार्रवाई करने पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं राष्ट्रपति ट्रंप के ईमानदार प्रयासों की सराहना करता हूं, जो ईरानी आतंकवादी शासन के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए कूटनीतिक समाधान तलाश रहे हैं।’’

 

ग्राहम ने कहा, ‘‘ हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नौवहन पर उनके लगातार हमलों, हमारेसहयोगियों पर निरंतर हमलों और अब अमेरिका के कूटनीतिक प्रस्ताव पर पूरी तरह अस्वीकार्य प्रतिक्रिया को देखते हुए, मेरी राय में अब दिशा बदलने पर विचार करने का समय आ गया है।

राष्ट्रपति ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद पश्चिम एशिया में स्थिति और भी विस्फोटक होने की आशंका है। जहाँ एक ओर ट्रंप ने शांति प्रस्ताव को ठुकरा कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य विकल्प मेज पर होने से वैश्विक समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि व्हाइट हाउस का अगला कदम क्या होगा।

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