MP के सतना जिले से एक खबर सामने आई है जहां पर हत्या के आरोप में 14 साल जेल में रह रहे कैदी और महिला मुस्लिम अफसर की बीच लव स्टोरी शुरू हो गई जिसके बाद उन दोनों ने शादी कर ली.

मध्य प्रदेश के सतना और छतरपुर जिलों में एक अनोखी प्रेम कहानी और विवाह इन दिनों सुर्खियों में है. सतना सेंट्रल जेल में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर कार्यरत फिरोजा खातून ने हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट चुके धर्मेंद्र उर्फ अभिलाष के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया.
यह शादी 5 मई को छतरपुर के लवकुशनगर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई, जिसमें सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से कई अप्रत्याशित पहलू सामने आए. इस विवाह को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चाओं का दौर जारी है.
जेल की चारदीवारी में शुरू हुई प्रेम कहानी
फिरोजा खातून और धर्मेंद्र की मुलाकात सतना सेंट्रल जेल में ड्यूटी के दौरान हुई थी. उस समय फिरोजा वारंट शाखा की जिम्मेदारी संभाल रही थीं, जबकि धर्मेंद्र हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और जेल में वारंट संबंधी कार्यों में सहयोग करता था. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी, जो पहले दोस्ती और फिर प्रेम संबंध में बदल गई. साल 2022 में अच्छे आचरण के चलते धर्मेंद्र को जेल से रिहा कर दिया गया, लेकिन दोनों के बीच संपर्क बना रहा और अंततः उन्होंने शादी का फैसला लिया.
कौन है धर्मेंद्र उर्फ अभिलाष, जिसे मिली थी उम्रकैद की सजा?
धर्मेंद्र सिंह, जो चंदला का रहने वाला है, वर्ष 2007 के एक चर्चित हत्या मामले में दोषी पाया गया था. उस पर तत्कालीन चंदला नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्णा दत्त दीक्षित की हत्या और शव को दफनाने का आरोप था. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. लगभग 14 वर्षों तक जेल में रहने के बाद उसे अच्छे आचरण के आधार पर रिहा किया गया.
क्यों नहीं शामिल हुआ परिवार?
रिपोर्ट्स के अनुसार, फिरोजा खातून के परिवार ने इस विवाह का विरोध किया और समारोह में शामिल नहीं हुए. ऐसे में विवाह के दौरान एक अलग ही स्थिति देखने को मिली. स्थानीय स्तर पर मौजूद विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने ‘कन्यादान’ की रस्म निभाई. इसके अलावा बजरंग दल के कार्यकर्ता भी विवाह समारोह में मौजूद रहे.
कैसे हुई हिंदू रीति-रिवाज से शादी?
यह विवाह छतरपुर के लवकुशनगर में पूरी तरह वैदिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ. मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ दोनों ने सात फेरे लिए. शादी के बाद यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का बड़ा विषय बन गया, क्योंकि इसमें धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक तीनों पहलू शामिल हैं.
क्या जेल प्रशासन में भी रही इस शादी की चर्चा?
शादी की खबर सामने आने के बाद सतना सेंट्रल जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया. कई लोगों ने इस जोड़े को शुभकामनाएं दीं, जबकि कुछ ने इसे लेकर अलग राय भी व्यक्त की. यह विवाह केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि समाज में बदलते रिश्तों और सीमाओं पर भी सवाल खड़े करता है. एक ओर यह प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उदाहरण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं पर बहस को भी जन्म दे रहा है.





