भारी कर्ज के बोझ तले दबी टेलीकॉम कंपनी, वोडाफोन आइडिया को सरकार से एक और बड़ी राहत मिली है. दूरसंचार विभाग ने कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू बकाये में भारी कटौती की है. दरअसल, लंबे समय से एजीआर की गणना को लेकर सरकार और टेलीकॉम कंपनियों के बीच कानूनी खींचतान चल रही थी. टेलीकॉम ऑपरेटरों का तर्क था कि सरकार के एजीआर कैलकुलेट करने का तरीका सही नहीं है, क्योंकि इसी के आधार पर लाइसेंस फीस और अन्य देनदारियां तय होती हैं.

इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए एक विशेष समिति ने वीआई की याचिकाओं पर गौर किया. गुरुवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक वीआई का कुल एजीआर बकाया अब 64,046 करोड़ रुपये तय किया गया है. यह आंकड़ा कंपनी के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है, क्योंकि इससे पहले का अनुमानित बकाया करीब 87,695 करोड़ रुपये था. यानी सीधासीधा 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का वित्तीय बोझ कम कर दिया गया है.
चुकाने के लिए मिला लंबा वक्त
बकाये की रकम कम करने के साथ ही दूरसंचार विभाग ने इसे चुकाने की शर्तों को भी बेहद आसान बना दिया है. कंपनी को यह भारीभरकम रकम तुरंत नहीं चुकानी है. नई व्यवस्था के तहत, वीआई को वित्त वर्ष 203132 से लेकर अगले चार सालों तक हर साल कम से कम 100 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा. इसके बाद, जो भी रकम बचेगी उसे वित्त वर्ष 203536 से लेकर 204041 के बीच छह बराबर सालाना किस्तों में चुकाया जा सकेगा. इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि मार्च 2026 में कंपनी के सामने जो 16,400 करोड़ रुपये के तत्काल भुगतान का पहाड़ खड़ा था, वह अब टल गया है. इससे पहले दिसंबर में भी सरकार ने बकाये पर आंशिक रोक लगाते हुए भुगतानों को 2030 के दशक तक टाल दिया था, ताकि कंपनी के पास रोजमर्रा के कामकाज के लिए नकदी बनी रहे.
जियो और एयरटेल को मिलेगी कड़ी टक्कर?
भले ही गुरुवार को बीएसई पर वीआई के शेयर मामूली गिरावट के साथ 10.22 रुपये पर बंद हुए हों, लेकिन यह सरकारी राहत कंपनी के भविष्य के लिए बेहद अहम है. मौजूदा समय में वीआई पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये का कुल कर्ज है, जिसमें वैधानिक बकाया भी शामिल है. हालांकि, एजीआर बकाये में इस ताजा कटौती से कंपनी की बैलेंस शीट को थोड़ी सांस लेने की जगह मिलेगी. बाजार में कंपनी को लेकर भरोसा मजबूत होगा, जिससे नए निवेशकों से बाजार से फंड जुटाने में आसानी होगी. इस नए पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने नेटवर्क को बेहतर बनाने में कर सकेगी, ताकि रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी दिग्गज कंपनियों के सामने टिक कर मुकाबला किया जा सके.
हर मुश्किल वक्त में सरकार बनी कंपनी की ‘तारणहार’
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने वोडाफोन आइडिया को संकट से निकाला है. टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और एकाधिकार को रोकने के लिए सरकार लगातार दखल देती रही है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। साल 2021 के टेलीकॉम रिलीफ पैकेज के तहत, सरकार ने वीआई के बकाया के एक हिस्से को शेयर में बदल दिया था, जिससे वह 48.99% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक बन गई थी. इसके बाद फरवरी 2023 में करीब 16,000 करोड़ रुपये के ब्याज को इक्विटी में बदला गया, जिससे सरकार की हिस्सेदारी लगभग 33% हो गई. हाल ही में, अप्रैल 2025 में भी 36,950 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम नीलामी बकाये को शेयर में तब्दील किया गया था.





