उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे आने लगे हैं. अभी तक बीजेपी 5 सीटों पर जीत गई है और एक सीट पर आगे है. वहीं, सपा अभी 2 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, जबकि 3 पर आगे हैं. पिछली बार के मुकाबले इस चुनाव में सपा को दो सीटों का फायदा होता दिख रहा है, जबकि बीजेपी को न तो कई नफा है और न ही कोई नुकसान. पिछली बार सभी बीजेपी 6 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी, जबकि दो निर्दलीय चुनाव जीते थे.

हालांकि, राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से तुरंत पहले हुए इस चुनाव के नतीजे ने बीजेपी की धड़कन बढ़ा दी है. 11 सीटों पर हुए ये चुनाव 72 जिलों को कवर करते हैं. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई जनसभा की थी. बीजेपी के मंत्रियों से लेकर विधायकों की फौज मैदान में डटी रही. इसके बावजूद नतीजे 2020 की ही तरह आए हैं. सीएम योगी के गृह जिले गोरखपुर में बीजेपी मामूली वोटों की बढ़त बनाए हुए है.

वाराणसी और आगरा के नतीजों ने चौंकाया

बीजेपी को वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. इन दोनों सीटों पर 2020 में भी बीजेपी हारी थी. यही वजह है कि इस बार बीजेपी ने दोनों सीट पर जीत दर्ज करने के लिए अपनी पूरी फौज उतार दी थी. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसभाएं की. कई मंत्रियों की ड्यूटी लगाई गई. विधायक से लेकर संगठन तक के लोगों ने हर शिक्षक को अपने पाले में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. बावजूद इसके दोनों सीटों पर सपा जीत गई.

झांसी और लखनऊ में बीजेपी को सेटबैक

झांसी और लखनऊ की स्नातक सीटों पर बीजेपी पीछे चल रही है. 2020 में लखनऊ स्नातक सीट से बीजेपी जीती थी, जबकि झांसी स्नातक सीट से सपा जीती थी. इस बार दोनों सीटों पर बीजेपी ने अपनी प्रतिष्ठा लगा दी थी. मंत्री से लेकर विधायक और सांसद तक… लगातार जनसंपर्क कर रहे थे और बीजेपी के पक्ष में वोट मांग रहे थे, लेकिन मतपेटी जैसी खुली, वैसी ही उनकी मेहनत बेकार जाती हुई दिख रही है. दोनों सीटों पर सपा की लीड बनी हुई है.

योगी के गढ़ में कांटे की टक्कर

सबसे ज्यादा रोचक मुकाबला गोरखपुर शिक्षक सीट पर देखने को मिल रहा है. यहां से बीजेपी ने ध्रुव त्रिपाठी को मैदान में उतारा, जबकि सपा की ओर से संजयन त्रिपाठी मैदान में उतरे. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। बीजेपी और सपा का समीकरण निर्दलीय प्रत्याशियों ने बिगाड़ दिया है. यहां पर निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव और बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी के बीच कांटे की टक्कर चल रही है. अभी बीजेपी महज कुछ वोटों से आगे है. सीएम योगी के गढ़ में मिल रही ऐसी टक्कर ने बीजेपी को परेशान कर दिया है.

योगी सरकार की सक्रियता के बावजूद मुकाबला

यह चुनाव इसलिए भी अहम था क्योंकि इसके नतीजे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आए रहे हैं. बीजेपी की तरफ से संगठन के नेता, मंत्री और विधायक मैदान में सक्रिय थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी चुनावी सभाएं की थीं. पार्टी के लिए यह चुनाव अपने संगठनात्मक प्रभाव और शिक्षकस्नातक मतदाताओं के बीच समर्थन को बनाए रखने की परीक्षा था. इसके बावजूद नतीजों और रुझानों में सपा ने कई सीटों पर मुकाबला बनाए रखा.

क्या बीजेपी के लिए यह बड़ा सेटबैक है?

इस चुनाव को बीजेपी के लिए बड़ा सेटबैक बताने से पहले दो पहलुओं को अलगअलग देखना होगा. पहला सीटों की संख्या के लिहाज से… 2020 में बीजेपी ने छह सीटें जीती थीं… इस बार पांच सीटों पर जीत और एक पर बढ़त का रुझान अगर अंतिम नतीजे में बदलता है, तो पार्टी का आंकड़ा छह रह सकता है. इस लिहाज से बीजेपी को सीटों का सीधा नुकसान नहीं दिखता. इतनी मेहनत के बाद भी बीजेपी सीट का आंकड़ा बढ़ा नहीं पाई.

दूसरा पहलू सपा की बढ़त है. पिछली बार तीन सीटें जीतने वाली सपा इस बार पांच सीटों तक पहुंच सकती है. इससे विधान परिषद में उसका प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर एक राजनीतिक उपलब्धि मिलेगी. साथ ही, यह नतीजा बीजेपी के लिए इस बात की समीक्षा का विषय बन सकता है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी ने पूरी ताकत लगाई, वहां विपक्ष ने कितनी चुनौती पेश की.

पूर्वांचल और बुंदेलखंड में खतरे की घंटी

बीजेपी को सबसे बड़ा सेटबैक उसी पूर्वांचल में लग रहा है, जहां से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते हैं और यहीं की एक सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद हैं. बुंदेलखंड की इकलौती सीट पर हुए चुनाव में भी बीजेपी बुरी तरह पिछड़ चुकी है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल और बुंदेलखंड ने बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. हालांकि, पश्चिम यूपी और रूहेलखंड में बीजेपी को फायदा होता दिख रहा है. यहां की चार सीटों पर बीजेपी एकतरफा वोटों से जीती है.