How to Control Mood Swing During Periods: महिलाओं में पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग यानी पलपल में मिजाज का बदलना बहुत अधिक होता है। इसका संबंध महिलाओं की हॉर्मोनल कंडीशन से होता है। इस स्थिति में कभी बहुत खुश होना, कभी बहुत रोना और कभी बिल्कुल उदास होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

हैरानी की बात है कि जब महिलाओं के साथ ऐसा होता है, तब यह स्थिति इतनी भयावह हो सकती है कि उन्हें आत्महत्या तक के विचार आ सकते हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। पोस्ट 40 या मेनोपॉज का समय शुरू होने के आसपास महिलाओं के मूड में अक्सर इस तरह के बदलाव नजर आते हैं, जिसकी कोई दवा भी नहीं है।
क्यों होता है मूड स्विंग
पीरियड्स के दौरान कमर में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, असहजता के साथ ही पेट फूलना, दर्द और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं होती हैं और यह पलपल मूड को बदलती हैं। इसी कारण से महिलाओं और लड़कियों को सबसे ज्यादा चिड़चिड़ापन, उदासी, रोने का मन करना और तनाव ग्रस्त होना जैसी दिक्कतें होती हैं।
कब होता है मूड स्विंग
किशोरावस्था: लड़कियों में 1015 साल की उम्र में पीरियड्स पहली बार शुरू होते हैं। इस उम्र में शरीर और मन में कई तरह के बदलाव होते हैं। हॉर्मोनल बदलाव के कारण मूड बारबार बदलने लगता है। उनके लिए सभी चीजें नई होती हैं, जिससे उन्हें जूझना पड़ता है।
प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद: प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद महिलाओं को थकान, नींद की कमी और नई जिम्मेदारियों से गुजरना पड़ता है, जिससे मूड जल्दीजल्दी बदल सकता है।
मेनोपॉज: यह 4045 साल की उम्र के बाद होता है। इस समय हॉर्मोन, खासकर में उतारचढ़ाव होता है, जिससे मूड में बदलाव महसूस होता है।
मूड स्विंग के लक्षण
मूड स्विंग के कई कारण हो सकते हैं। शारीरिक और मानसिक दोनों ही मूड स्विंग को प्रभावित करते हैं।
- शरीर में एनर्जी की कमी होना
- हर समय थकान महसूस होना
- जरूरत से ज्यादा खाना खाना
- भूख न लगना
- नींद की कमी
- बेचैनी महसूस होना
- उदास रहना
- चीजों को भूल जाना
- आत्मविश्वास में कमी होना
कैसे करें निदान
अगर आपको भी पीरियड्स के दौरान इस तरह की समस्या होती हैं, तो आप अपने आसपास के माहौल को खुशनुमा रखने की कोशिश करें। इस दौरान अच्छे माहौल में रहें, जहां पर आपको तनावमुक्त समय मिल सके। इस दौरान सब्जियों और फलों का सेवन अधिक से अधिक करें। योग या करें। इसके अलावा पानी अधिक मात्रा में पिएं क्योंकि पानी मूड और हार्मोन्स को पलपल बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पानी हार्मोन्स को काफी हद तक कंट्रोल करता है। पानी की मात्रा पीरियड्स के दौरान ज्यादा रखें।





