शेयर बाजार में निवेश करने वालों की नजर हमेशा ऐसे शेयरों पर होती है जो कम समय में शानदार रिटर्न दे सकें. इन दिनों तेजस नेटवर्क्स का शेयर बिल्कुल ऐसा ही कमाल कर रहा है. मंगलवार, 7 मई को इस शेयर ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि निवेशकों के चेहरे खिल उठे. बीते सिर्फ चार ट्रेडिंग सेशन के भीतर इस कंपनी के शेयरों में लगभग 33 फीसदी का भारीभरकम उछाल देखने को मिला है. एक समय ऐसा भी था जब पिछले एक साल के दौरान इस शेयर ने अपने निवेशकों को काफी निराश किया था और इसमें 22 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई थी. लेकिन अब पासा पूरी तरह से पलट चुका है. आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने इस शेयर को अचानक रॉकेट बना दिया?

तेजस नेटवर्क्स के शेयरों में गजब की मजबूती
मंगलवार की सुबह जब शेयर बाजार खुला, तो तेजस नेटवर्क्स के शेयरों में गजब की मजबूती देखी गई. कारोबार के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब शेयर लगभग 20 फीसदी की लंबी छलांग लगाते हुए 554.95 रुपये के स्तर तक पहुंच गया. हालांकि, दिन चढ़ने के साथ मुनाफावसूली के चलते यह तेजी थोड़ी नरम पड़ी. दोपहर एक बजे के आसपास यह शेयर करीब 15.60 फीसदी की बढ़त के साथ 533 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. किसी भी आम निवेशक के लिए यह समझना जरूरी है कि शेयर बाजार में बिना किसी ठोस कारण के इतनी बड़ी हलचल अमूमन नहीं होती है. इस अचानक आई बहार के पीछे एक बेहद सकारात्मक रिपोर्ट और कंपनी की एक बड़ी सफलता का हाथ है.
क्या है इस उछाल का असली कारण?
इस तूफानी तेजी की असल वजह टेलीकॉम और तकनीक की दुनिया से जुड़ी एक बड़ी कामयाबी है. एक्सचेंज4मीडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, तेजस नेटवर्क्स के उपकरणों ने डायरेक्टटूमोबाइल ब्रॉडकास्टिंग के लिए जरूरी लैब और फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पास कर लिए हैं. सबसे खास बात यह है कि इन ट्रायल्स को कई मंत्रालयों का समर्थन प्राप्त था. किसी भी टेक कंपनी के लिए ऐसे ट्रायल्स को क्लियर करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. इसका सीधा सा अर्थ यह है कि तेजस नेटवर्क्स की यह नई तकनीक तकनीकी और नियामक दोनों ही पैमानों पर पूरी तरह से खरी उतरी है. इस खबर ने बाजार में कंपनी के भविष्य को लेकर एक मजबूत भरोसा पैदा कर दिया.
तकनीकी मोर्चे पर कंपनी का दमदार प्रदर्शन
जब कोई नई तकनीक बाजार में आने वाली होती है, तो उसे कई सख्त पैमानों से गुजरना पड़ता है. हाल ही में हुए इन ट्रायल्स के दौरान कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जो इस पूरे प्रोजेक्ट की गंभीरता को दर्शाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, लैब ट्रायल के दौरान मुख्य रूप से ट्रांसमिटर स्पेक्ट्रल कंप्लायंस पर बारीकी से ध्यान दिया गया. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसके अलावा, इस बात की भी कड़ी जांच की गई कि यह नई तकनीक मौजूदा टेरेस्ट्रियल मोबाइल नेटवर्क्स के साथ बिना किसी बाधा के कैसे काम करेगी.





