
नई दिल्ली: खुला, बंद, बंद लेकिन खुला… होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का केंद्र बन गया है। इसकी नाकेबंदी दोनों तरफ से दबाव बनाने की रणनीति का अहम फैक्टर है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल व्यापार के लिए अहम चैनल है। इसका नतीजा यह है कि एनर्जी सप्लाई के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं रुकावटों और अनिश्चितताओं का सामना कर रही हैं।
भारत उन एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिन्हें अपने कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी जरूरतों के लिए होर्मुज स्ट्रेट की जरूरत है। पिछले महीने अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष के दौरान ईरान ने इस अहम ऊर्जा गलियारे को बंद करने का फैसला किया। इसके बाद से ईरान ने बीच-बीच में भारतीय जहाजों को गुजरने की इजाजत दी है।
क्यों जटिल हो गए हैं हालात?
हालांकि, अब स्थिति और जटिल हो गई है।
कुछ दिनों पहले ईरान ने घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है।
लेकिन, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने या वहां से आने वाले जहाजों की नाकेबंदी जारी रखी।
इसके चलते ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया।
भारतीय झंडे वाले जहाजों पर फायरिंग
भारतीय झंडे वाला टैंकर ‘देश गरिमा’ शनिवार दोपहर को होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर गया। हालांकि, दो अन्य जहाज सनमार हेराल्ड और जग अर्नव संघर्ष वाले रास्ते से गुजरते समय ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नावों से फायरिंग की चपेट में आ गए। उन्हें वापस लौटना पड़ा। क्रू में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई अभी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए स्थिर लग रही है। इसे वेनेजुएला, पश्चिम अफ्रीका और दूसरे खास सप्लायरों से लगातार इंपोर्ट का सपोर्ट मिला है। साथ ही अमेरिकी बैन में छूट को बढ़ाया गया है। इससे तत्काल की जरूरतों को पूरा करने के लिए समुद्र में पहले से मौजूद रूसी क्रूड तक पहुंच मिलती है।
भारत ने फायरिंग की घटना पर अपनी ‘गहरी चिंता’ जताने के लिए शनिवार को ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहली को बुलाया। मीटिंग के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत व्यापारी जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को कितना महत्व देता है। साथ ही याद दिलाया कि ईरान ने पहले भी भारत जाने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित किया था।
उन्होंने राजदूत से तेहरान में अधिकारियों को भारत की स्थिति बताने और स्ट्रेट से भारत जाने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित ट्रांजिट को तेजी से बहाल करने की अपील की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि राजदूत इन चिंताओं को बताने के लिए सहमत हो गए।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
मरीनट्रैफिक के डेटा से पता चलता है कि भारतीय बंदरगाहों की ओर जाने वाले कई भारतीय और विदेशी जहाज अभी भी होर्मुज स्ट्रेट के पास मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 13 भारतीय जहाज अभी फारस की खाड़ी (होर्मुज के पश्चिम में), छह ओमान की खाड़ी (होर्मुज के पूर्व में), एक अदन की खाड़ी में और तीन लाल सागर में हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, निकालने के लिए 17 जहाजों की पहचान की गई है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इनमें चार एलपीजी कैरियर, तीन एलएनजी कैरियर और 10 कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इनमें से तीन भारतीय झंडे वाले हैं। जबकि बाकी 14 विदेशी जहाज हैं।
इसके अलावा, केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स मिनिस्ट्री ने निकालने के लिए 16 और जहाजों की लिस्ट तैयार की है। इसमें एक भारतीय झंडे वाला जहाज (जग अर्नव) भी शामिल है। इसे शनिवार को आईआरजीसी ने निशाना बनाया था।
भारत को देखनी पड़ी है सप्लाई में रुकावट
अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारत सप्लाई में रुकावटें देख रहा है। वह अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर काफी ज्यादा निर्भर है। इसका खास तौर से एलपीजी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। सरकार को घरेलू खपत के लिए सप्लाई डायरेक्ट करने और कमर्शियल उपलब्धता को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
सरकार के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात की वजह से घरेलू एलपीजी सप्लाई में कुछ रुकावटें आ रही हैं। हालांकि, घरों में डिस्ट्रीब्यूशन को प्राथमिकता दी गई है। कमर्शियल साइड पर रिफॉर्म से जुड़ी सप्लाई सहित एलोकेशन को संकट से पहले के लेवल के लगभग 70% तक बढ़ा दिया गया है।
क्रूड के मोर्चे पर रूस ने संभाला
क्रूड के मामले में भारत ने लड़ाई शुरू होने के बाद से रूसी क्रूड ऑयल की खरीद को तेजी से बढ़ाया है। असल में भारत का रूसी तेल इंपोर्ट अब जून 2023 के अपने सबसे ऊंचे लेवल के करीब है। जल्द ही इसमें कमी आने की उम्मीद नहीं है। इसमें डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के रूसी तेल पर एक महीने के लिए बैन हटाने और फिर बाद में इसे एक और महीने के लिए बढ़ाने से मदद मिली है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत का क्रूड ऑयल बास्केट अलग-अलग तरह का है। रूसी क्रूड की मौजूदगी से स्थिति कम चिंताजनक है। लेकिन, एलपीजी और एलएनजी रुकावट का एरिया बने रह सकते हैं।
केप्लर में मैनेजर मॉडलिंग और रिफाइनिंग सुमित रितोलिया ने टीओआई को बताया, ‘भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई अभी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए स्थिर लग रही है। इसे वेनेजुएला, पश्चिम अफ्रीका और दूसरे खास सप्लायरों से लगातार इंपोर्ट का सपोर्ट मिला है। साथ ही अमेरिकी बैन में छूट को बढ़ाया गया है। इससे तत्काल की जरूरतों को पूरा करने के लिए समुद्र में पहले से मौजूद रूसी क्रूड तक पहुंच मिलती है। अप्रैल में रूसी बैरल इंपोर्ट अभी के लिए लगभग 1.6 mbd तक बढ़ गया है। इसके और बढ़ने की संभावना है।’
हालांकि, उन्होंने बताया कि एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई अभी भी काफी सीमित है। उन्होंने आगे कहा, केप्लर के डेटा के मुताबिक, इस समय कम से कम दो एलपीजी टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के पास फंसे हुए हैं। अगर यह नाकेबंदी जारी रहती है, खासकर अगर पाबंदियां भारतीय झंडे वाले जहाजों पर भी लागू होती हैं तो आने वाले दिनों में सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।’





