ईरान वॉर बन रहा मुकेश अंबानी के सामने रोड़ा! रिलायंस बदल सकती है IPO का पूरा प्लान?​

रिलायंस इंडस्ट्रीज की अपनी डिजिटल शाखा, Jio Platforms के लिए प्रस्तावित IPO को जियो पॉलिटिकल टेंशन और ईरान वॉर के कारण बढ़ी बाजार की अस्थिरता की वजह से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. अब ग्रुप इस डील के स्ट्रक्चर की समीक्षा कर रहा है, जिससे इसकी समयसीमा प्रभावित हो रही है और भारतीय शेयरों में गिरावट तथा कैपिटल के आउटफ्लो के इस दौर में निवेशकों के रिटर्न पर भी असर पड़ सकता है. जिसकी वजह से पूरा प्रोसेस काफी स्लो हो गया है. जो ड्राफ्ट पेपर साल के फर्स्ट हाफ में सबमिट होना था और इश्यू को पब्लिक करना था वो अब दूसरे हाफ के लिए टलता हुआ दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट के अनुसार अभी ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने की डेट फिक्स नहीं है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। रिलायंस अपना प्लान बदल सकती है और यह डेट साल के सेकंड हाफ में कभी भी आ सकती है. जानकारों का मानना है कि इस आईपीओ का साइज 4 बिलियन डॉलर के आसपास का हो सकता है.

ईरान वॉर बन रहा मुकेश अंबानी के सामने रोड़ा! रिलायंस बदल सकती है IPO का पूरा प्लान?​

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अरबपति मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली इस कंपनी ने अपनी तैयारियां धीमी कर दी हैं, क्योंकि वह भूराजनीतिक तनाव और बाज़ार में उतारचढ़ाव के चलते इस सौदे की संरचना की समीक्षा कर रही है. इन लोगों ने बताया कि कंपनी अभी भी IPO के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज जमा करने की योजना बना रही है और किसी भी समय इस पर आगे बढ़ सकती है. Jio की लिस्टिंग जो लगभग दो दशकों में रिलायंस इंडस्ट्रीज की किसी बड़ी यूनिट की पहली पब्लिक पेशकश होगी. भारत के कमजोर पड़ते कैपिटल मार्केट के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक मौका साबित हो सकती है.

कंपनी का प्लान

इस प्लान को मार्च में तब बड़ा सपोर्ट मिला, जब सरकार ने बड़े IPO को आसान बनाने के लिए लिस्टिंग नियमों में बदलाव को मंजूरी दी, लेकिन इस डील को इस साल की पहली छमाही में पूरा करने का मुकेश अंबानी का वादा अब खतरे में दिख रहा है. इस डील की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, कंपनी ने अब अपनी स्ट्रेटजी बदलते हुए पूरी तरह नए शेयर जारी करने का फैसला किया है और पुराने निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की अपनी पहले वाली योजना को रद्द कर दिया है.

कितने का होगा IPO

रिपोर्ट के मुताबिक, इस IPO के जरिए करीब 4 अरब डॉलर तक जुटाए जा सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो यह देश की अब तक की सबसे बड़ी लिस्टिंग होगी, जो हुंडई मोटर इंडिया की ओर से जुटाए गए 3.3 अरब डॉलर से भी काफी ज्यादा होगी. यह मार्केट के लिए बड़ा सपोर्ट साबित हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब इस साल अब तक हुए IPO से कुल मिलाकर करीब 3.5 अरब डॉलर ही जुट पाए हैं. यह पिछले दो सालों की तेज रफ्तार फंड जुटाने वाली लिस्टिंग्स के मुकाबले काफी कम है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि भारत, ईरान में चल रहे युद्ध के आर्थिक असर से जूझ रहा है. इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन कम इस्तेमाल करने और विदेश यात्रा सीमित रखने की अपील की है. सरकार विदेशी मुद्रा भंडार बचाने और देश से पैसा बाहर जाने से रोकने के लिए कदम उठा रही है, क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात खर्च को काफी बढ़ा सकती हैं.

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