चीनी ताइपे को 3-0 से रौंद भारत थॉमस कप के सेमीफाइनल में, दो मैच पॉइंट बचाकर लक्ष्य सेन बने हीरो

लक्ष्य सेन की जोरदार वापसी के बाद सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की युगल जोड़ी तथा युवा आयुष शेट्टी के बेहतरीन खेल के प्रदर्शन से भारत ने शुक्रवार एक मई 2026 को डेनमार्क के होर्सेंस में चीनी ताइपे के खिलाफ 30 की अजेय बढ़त हासिल करके थॉमस कप बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल्स के सेमीफाइनल में जगह पक्की की।

चीनी ताइपे को 3-0 से रौंद भारत थॉमस कप के सेमीफाइनल में, दो मैच पॉइंट बचाकर लक्ष्य सेन बने हीरो

लक्ष्य सेन ने दो मैच पॉइंट बचाते हुए विश्व के छठे नंबर के खिलाड़ी चोउ टिएन चेन को हराकर भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई। लक्ष्य सेन इस मैच में अधिकतर समय पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने गजब का जुझारूपन दिखाया तथा एक घंटे और 28 मिनट तक चले मैराथन मुकाबले में 1821, 2220, 2117 से जीत दर्ज की।

इसके बाद सात्विक और चिराग की युगल जोड़ी ने चियू सियांग चिएह और वांग चीलिन को एक घंटे और 15 मिनट में 2321 1921 2112 से हराकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। इसके बाद जिम्मेदारी आयुष शेट्टी पर आ गई और इस युवा खिलाड़ी ने शानदार प्रदर्शन किया।

हाल ही में ने दूसरे एकल में विश्व में नंबर आठ और मौजूदा ऑल इंग्लैंड ओपन चैंपियन लिन चुनयी को 2116, 2117 से हराकर भारत को सेमीफाइनल में पहुंचा दिया।

भारत की इस जीत पर पूर्व कोच विमल कुमार ने कहा, ‘‘यह यादगार प्रदर्शन है। इससे भारतीय बैडमिंटन में बढ़ते आत्मविश्वास, तैयारी और ताकत का पता चलता है।’’ भारत 2022 का चैंपियन है। वह सेमीफाइनल में फ्रांस या जापान में से किसी एक टीम का सामना करेगा।

इस जीत से का थॉमस कप में पदक भी पक्का हो गया है। उसने 2022 में थॉमस कप जीता था। इसके अलावा भारत ने 1952, 1955 और 1979 में कांस्य पदक जीते थे। और चोउ के बीच इस मुकाबले से पहले आपस में रिकॉर्ड 44 से बराबरी पर था।

इस मुकाबले में लंबी रैलियों, सटीक स्ट्रोकप्ले और उतारचढ़ाव से भरपूर रोमांचक द्वंद्व देखने को मिला। चोउ ने पहला गेम में 1015 से पिछड़ने के बाद जीता, लेकिन दूसरे गेम में लक्ष्य ने दबाव में शानदार वापसी की।

भारतीय खिलाड़ी ने 1317 से पीछे रहने के बाद लगातार 4 अंक जीत स्कोर बराबर कर लिया। चोउ को दो मैच पॉइंट मिले, लेकिन लक्ष्य ने संयम बनाए रखा और दोनों को बचाकर मैच को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। तीसरे गेम में 36 वर्षीय चोउ शारीरिक रूप से कमजोर पड़ते नजर आए।

लक्ष्य ने इंटरवल तक 117 की बढ़त के साथ अपनी स्थिति मजबूत की। बाद में भी खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और मैच जीतने में सफल रहे। सात्विक और चिराग ने शुरुआत में संघर्ष किया। वे 55 से बराबरी पर थे, लेकिन 813 से पीछे हो गए।

भारतीय खिलाड़ियों ने वापसी की कोशिश की, लेकिन चियू और वांग ने 1815 से मैच पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। सात्विक और चिराग ने हार नहीं मानी। उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए स्कोर 1819 तक पहुंचा दिया और इसके बाद पहला गेम अपने नाम कर दिया। दूसरा गेम भी काफी कड़ा रहा। शुरुआत में दोनों जोड़ियां 88 के स्कोर पर बराबरी पर थीं।

भारतीय जोड़ी ने इसके बाद 1411 की बढ़त बनाई, लेकिन ताइवानी खिलाड़ियों ने जोरदार वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। इसके बाद आक्रामक खेल का सिलसिला जारी रहा, जिसमें दोनों टीमों का पलड़ा बराबर रहा लेकिन आखिर में चियू और वांग ने बढ़त बनाकर मैच को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। तीसरे गेम में खेल का रुख पूरी तरह से बदल गया।

भारतीय टीम आक्रामक और सटीक खेल दिखाते हुए तेजी से 93 की बढ़त बनाने में कामयाब रही। सात्विक ने नेट और बैककोर्ट दोनों जगह शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय जोड़ी को 136 और फिर 157 की बढ़त दिलाई। सात्विक और चिराग ने जल्द ही कई मैच पॉइंट हासिल किए और आसानी से मैच अपने नाम कर लिया। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। आयुष ने संयमित और आक्रामक प्रदर्शन करते हुए लिन को हराया जो पैर में चोट के कारण पूरी तरह से फिट नहीं थे।

पहले गेम में 711 से पिछड़ने के बाद आयुष ने धैर्य का परिचय दिया और अहम मौके पर आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए लगातार कई विनर्स लगाकर स्कोर को 1312 कर दिया। भारतीय खिलाड़ी ने इसके बाद लगातार सात अंक बनाकर पहला गेम अपने नाम किया।

आयुष ने दूसरे गेम में भी उसी लय को बरकरार रखा और शुरुआत में पिछड़ने के बावजूद 97 से बढ़त बना ली। वह इंटरवल तक 118 से आगे थे। दर्शकों से मिल रहे अपार समर्थन और भारत माता की जय के नारों के बीच आयुष ने 1511 और फिर 1913 की बढ़त हासिल की।

लिन ने अंतिम क्षणों में वापसी की कोशिश की और स्कोर का अंतर 1619 तक कम कर दिया, लेकिन आयुष ने संयम बनाए रखा। कई मैच पॉइंट हासिल करते हुए प्रतिद्वंदी के शॉट को लंबा जाने देकर मैच जीत लिया। इसके साथ ही भारतीय खिलाड़ियों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

दो बार घुटने की चोट, कई शुरुआती हार और लंबा इंतजार। इन सबके बाद इनुंगानबी ताखेल्लामबम ने एशियन जूडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया और भारत को 13 साल बाद मेडल दिलाया।

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