Met Gala 2026: राजा रवि वर्मा की ‘पेंटिंग्स’ से प्रेरित आउटफिट पहनकर करण जौहर ने किया मेट गाला डेब्यू, मनीष मल्होत्रा ने किया डिजाइन

Met Gala 2026: फैशन की दुनिया का सबसे बड़ा इवेंट मेट गाला इस बार भी अपने ग्लैमर, स्टाइल और हाईप्रोफाइल मौजूदगी के लिए सुर्खियों में बना हुआ है। इस ग्रैंड इवेंट में दुनियाभर के बड़े सितारों ने शिरकत की। वहीं, इस साल बॉलीवुड के फेमस फिल्ममेकर करण जौहर ने भी मेट गाला के रेड कारपेट पर अपना डेब्यू किया। उन्होंने वहां डिजाइनर मनीष मल्होत्रा का डिजाइन किया आउटफिट पहना, जो अब चर्चा में बना हुआ है।

Met Gala 2026: राजा रवि वर्मा की ‘पेंटिंग्स’ से प्रेरित आउटफिट पहनकर करण जौहर ने किया मेट गाला डेब्यू, मनीष मल्होत्रा ने किया डिजाइन

दरअसल, करण जौहर का मेट गाला आउटफिट महान चित्रकार राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स से इंस्पायर्ड था। इसे हाथों से की गई चित्रकारी, थ्रीडी स्कल्पटिंग, क्विल्टिंग तकनीक और बारीक पारंपरिक जरदोजी की कढ़ाई से बनाकर तैयार किया गया था। इस पोशाक में राजा रवि वर्मा की कुछ सबसे मशहूर पेंटिंग्स को पिरोया गया था, जिनमें हंस दमयंती, कादंबरी और अर्जुन, सुभद्रा शामिल हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, करण ने अपने इस खास लुक को चुनने की वजह के बारे में भी बताया।

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क्यों करण ने पहना राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स से इंस्पायर्ड आउटफिट

करण ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि राजा रवि वर्मा की कला उन्हें हमेशा से प्रेरित करती रही है क्योंकि उनकी पेंटिंग्स सीधे भावनाओं को दर्शाती हैं, और बतौर फिल्ममेकर करण भी सिनेमा में यही करने का प्रयास करते हैं। वहीं, फिल्ममेकर ने इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए अपने दोस्त मनीष मल्होत्रा का शुक्रिया भी अदा किया।

करण ने मनीष की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति को ग्लोबल लेवल पर पेश करने की जो कला मनीष के पास है, वह बेमिसाल है। करण ने अपने इस लुक को पूरा करने के लिए मिनिमल ज्वेलरी, स्टाइलिश रिंग्स और सनग्लासेस पहने। उनका ओवरऑल स्टाइल क्लीन, स्लीक और हाईफैशन रेड कार्पेट वाइब दे रहा था।

कौन थे राजा रवि वर्मा

19वीं सदी के महान भारतीय चित्रकार राजा रवि वर्मा को आधुनिक भारतीय कला का जनक माना जाता है। उन्होंने यूरोप की पेंटिंग तकनीक को भारतीय विषयों पर इस्तेमाल किया। उनकी कला की खासियत यह रही कि उन्होंने देवीदेवताओं को पहली बार मानवीय रूप में चित्रित किया, जिससे वे आम लोगों के लिए और भी सजीव और करीब महसूस होने लगे।

उनकी पेंटिंग्स के जरिए ही हिंदू देवीदेवताओं की छवि घरघर तक पहुंची और एक सांस्कृतिक पहचान बनी। ऑयल पेंटिंग और वेस्टर्न तकनीक का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने भारतीय विषयों को कैनवास पर उतारा, जो आज भी भारतीय कला की पहचान मानी जाती है।

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